बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर की लागत 964 से बढ़कर 1635 करोड़ पहुंची, फेज-तीन में 671 करोड़ का नुकसान
अधिकारियों की लापरवाही के कारण दिल्ली सरकार को बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर फेज-तीन परियोजना में 671 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसकी लागत 964 करोड़ से ...और पढ़ें

मयूर विहार के पास खादर में निर्माणाधीन बारापुला फेज-तीन का एलिवेटेड कारिडोर। पारस कुमार
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही के चलते दिल्ली सरकार को बारापुला एलिवेटेड काॅरिडोर फेज-तीन परियोजना में 671 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। देरी के कारण इस परियाेजना की लागत 964 करोड़ से अब बढ़कर 1635.03 करोड़ हो गई है। परियोजना पर अब तक 1036.35 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
31 जुलाई तक काम पूरा होने की उम्मीद
332.68 करोड़ रुपये का काम अभी शेष है और पूर्ववर्ती आप सरकार के समय मामला आर्ब्रिट्रेशन (मध्यस्थता) में चलले जाने पर सरकार को उल्टे ठेकेदार कंपनी को करीब 266 करोड़ का भुगतान करना पड़ा है। दिल्ली सरकार की व्यय एवं वित्त समिति ने हाल में संशोधित प्रस्ताव में परियोजना के लिए 1635.03 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। सभी अड़चनें दूर हो जाने के बाद अब परियोजना पर 31 जुलाई तक काम पूरा होने की उम्मीद है।
2015 में परियोजना पर शुरू किया था काम
मयूर विहार फेज-एक से सराय काले खां तक बन रही साढ़े तीन किलोमीटर लंबी इस परियोजना के पूरी होने के बाद पहले से बने बारापुला फेज-एक व दो को मिलाकर एम्स तक साढ़े 9 किलोमीटर यातायात सिग्नल फ्री हाे जाएगा। जिससे गाजियाबाद, पूर्वी दिल्ली से दक्षिणी दिल्ली और इंदिरा गांधी हवाई अड्डे तक आना-जाना आसान हाे सकेगा।
मौजूदा सरकार इस परयोजना के काम में हुई देरी की जांच एसीबी से करवा रही है लेकिन सरकार का कहना है कि इस जांच से परियोजना किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दी जाएगी और इसे जल्द पूरा किया जाएगा।
जमीन पूरी उपलब्ध नहीं होने के बाद भी 2015 में परियोजना के लिए काम शुरू कर दिया गया था। इस अनुभव को देखते हुए अब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने टेंडर जारी करने से पहले परियोजना की व्यवहार्यता फिजिबिलिटी स्टडी को अनिवार्य कर दिया है।
अभी करीब 500 मीटर एरिया में काम शेष
बारापुला फेज-तीन परियोजना का 23 सितंबर 2014 को शिलान्यास हुआ था। मगर काम एक साल बाद शुरू हो सका था। अब परियोजना का करीब 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के बीच आ रहे हरे पेड़ों को हटाने की अनुमति मिलने के बाद अब अधिकतर पेड़ हटाए या जा चुके हैं। अभी करीब 500 मीटर एरिया में काम शेष है, जिस पर अभी 10 पिलर और 14 स्पैम बनाए जाने हैं।
उल्टे ठेकेदार कंपनी को देना पड़ा भुगतान
परियोजना को लेकर भुगतान के मामले में विभिन्न विवादों के चलते निमार्णकर्ता लार्सन एंड टुब्रो कंपनी इसे लेकर आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) में चली गई थी। जहां से ठेकेदार कंपनी के पक्ष में फैसला आया और उसे एक केस में 44.31 करोड़, दूसरे केस में 36.42 करोड़ और तीसरे केस में 185.27 करोड़ रुपये अदा करने का आदेश दिया गया। इसे लेकर वर्तमान सरकार ने पूर्व सरकार पर लापरवाही और भ्रष्टाचार करने का अारोप लगाया है। कुछ माह पहले यह मामला जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को सौंपा जा चुका है। जिसमें बगैर जमीन के परियोजना पर काम शुरू कराने वाले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है।
- बारापुला फेज-दो और एक पर हो चुका है काम
- बारापुला फेज-दो के तहत जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से आइएनए तक 2018 में तथा
- बारापुला फेज-एक के तहत राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के लिए 2010 में सराय काले खान से नेहरू स्टेडियम तक एलिवेटेड कारिडोर बनाया गया था।
प्रमुख बिन्दु
- मयूर विहार फेज-एक से सराय काले खां से तक बारापूला एलिवेटेड कारिडोर फेज-तीन परियोजना को दिल्ली कैबिनेट ने सितंबर 2011 को मंजूरी दी थी।
- तत्कालीन कांग्रेस की शीला सरकार ने इस परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत 964 करोड़ रुपये रखी थी।
- परियोजना पर काम की शुरुआत अप्रैल 2015 से शुरू हुई, जिसे 30 महीनों में पूरा होना था।
- अब परियोजना की कुल लागत 1635.03 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
यह भी पढ़ें- दिल्ली-NCR की हवा फिर 'बहुत खराब', अगले कुछ दिनों नहीं राहत के आसार नहीं; 380 तक पहुंचा AQI

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।