ग्रीन बसें, टॉप रैंकिंग... फिर भी बाकी सवाल; 2025 ने दिल्ली को कौन से सबक सिखाए? 2026 में अग्निपरीक्षा
दिल्ली ने 2025 में कई सबक सीखे, जिसमें बुनियादी ढांचे, इलेक्ट्रिक बसों और शिक्षा में सुधार व कमियां शामिल हैं। सड़कों पर गड्ढे, जाम, बसों की कमी और वि ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2025 दिल्ली के लिए धूप और छांव जैसा रहा। कहीं बेहतरी और चमक दिखी तो कहीं पुराने जख्म और हरे हो गए। बुनियादी ढांचे से लेकर इलेक्ट्रिक बसों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों तक, शहर ने कुछ अहम सबक सीखे हैं।
अब अहम ये है कि 2026 में इन गलतियाें को दाेहराया न जाए। एक ही गलती बार-बार न की जाए, जो दिल्ली वासियों के लिए नासूर बन जाए। आइए जानते हैं कि बीते साल दिल्ली में क्या बेहतर या अच्छा हुआ और कहां कमी रह गई, जिसे इस साल दूर करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार को उठानी होगी।

सड़कें और फ्लाईओवर: योजनाएं बहुत बनीं पर...
क्या अच्छा हुआ?
- बरापुल्ला फेज-3 को करीब एक दशक बाद पेड़ों की अंतिम मंजूरी मिली।
- एलिवेटेड रिंग रोड, देशबंधु गुप्ता रोड, आईटीओ चौराहा, अंधेरिया मोड़, पीरागढ़ी जैसे जाम पॉइंट्स पर नए फ्लाईओवर और सुधार योजनाएं आईं।
- मिंटो ब्रिज पर ड्रेनेज सुधार से मानसून में बार-बार बंद होने की बीमारी नियंत्रण में आई।
क्या सबक मिला?
- जून में 3,400 गड्ढे एक दिन में भरने के दावे, कुछ ही हफ्तों में खोखले साबित हो गए।
- एनएच-44 सिंगोला फ्लाईओवर पर क्रेटर, सवित्री, महाराजा रणजीत सिंह फ्लाईओवर और आउटर रिंग रोड का उद्धार नहीं हो सका।
2026 के लिए सीख
अब 'रिपेयर' नहीं, री-डिजाइन और क्वालिटी ऑडिट चाहिए। वरना हर मॉनसून, कोई न कोई अंडरपास-फ्लाईओवर बंद होता रहेगा और दिल्ली की जनता परेशानी होती रहेगी। इस काम को तरीके से पूरा करने की जरूरत न कि फौरी इंतजामाें की।
जाम का आतंक: लिस्ट बनी, लेकिन राहत नहीं
233 कंजेशन स्पॉट चिह्नित हुए, 62 के लिए दीर्घकालीन समाधान तय हुए, फिर भी त्योहार, बारिश या वीआईपी मूवमेंट आते ही दिल्ली ठहर जाती है।

2026 के लिए सीख
कागज पर नहीं, जमीन पर ट्रैफिक प्रबंधन के लिए इंजीनियरिंग नजर आए। फ्लाईओवर के एंट्री-एग्जिट की डिजाइन, सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन और ऑन-ग्राउंड ट्रैफिक मार्शलिंग अब टालने वाले विषय नहीं हैं। अगर सरकार सही मायनों में दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या का हल निकालना चाहती है तो ये कदम उठाने ही होंगे।
बसें: इलेक्ट्रिक आईं, लेकिन संख्या कम होती गई
क्या अच्छा हुआ?
लंबे इंतजार के बाद 3,518 इलेक्ट्रिक बसें दिल्ली में लाई गईं, जिनमें 1,700 DEVI मिनी बसें भी थी। जिससे तंग गलियों में भी में पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को बेहतर किया जा सके। ये छोटी बसें दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।

हकीकत ये भी है
- डीटीसी बसों का कुल बेड़ा 7,000 था, तो इस वक्त 5,200 पर आ गया।
- दिल्ली में बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्टेंशन के लिए 11,000 बसों की जरूरत है, लेकिन इसे पूरा नहीं किया जा पा रहा।
2026 के लिए सीख
किसी भी शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्टेंशन की बात करें तो यहां सिर्फ क्वालिटी ही जरूरत नहीं है। क्वालिटी के साथ क्वांटिटी भी जरूरी है, या यूं कहें कि अनिवार्य है। वरना बसें होने के बावजूद बस स्टॉप पर इंतजार और लंबा होता जाएगा। लोग प्राइवेट व्हीकल को प्रिफरेंस देने लेंगे और ग्रीन बसें चलाने की जो मूल वजह है, यानी प्रदूषण से निजात, उसका पलीता लग जाएगा।
दिल्ली यूनिवर्सिटी: रैंक बढ़ी पर भरोसा नहीं
क्या अच्छा हुआ?
QS एशिया रैंकिंग में सुधार और DUSU चुनावों में अनुशासन का पालन किया जाना अच्छा रहा। डीयू के 32 कॉलेज नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क में फीचर हुए।

कहां चूक गए?
विश्वविद्यालय में अंडरग्रेजुएट की 9,000 सीटें फिर खाली रह गईं। एग्जाम पेपर देर से पहुंचे, CUET रिजल्ट लेट हुआ और सत्र ही पटरी से उतर गया।
2026 के लिए सीख
सिस्टम को केवल ऑनलाइन नहीं, रिलायबल भी बनाना होगा। वरना दुनिया की टॉप 6% यूनिवर्सिटी में शामिल होना भी यहां पढ़ने वाले छात्रों के लिए बेकार है।
सरकारी स्कूल: सफलता के बीच तनाव
2025 में दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने 96.99% पास प्रतिशत के साथ निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ दिया। यह बीते एक दशक में शिक्षा व्यवस्था में आए सुधारों का सीधा नतीजा है।
लेकिन साल भर फीस बढ़ोतरी को लेकर अभिभावकों का गुस्सा और निजी स्कूलों पर कार्रवाई ने यह भी दिखाया कि केवल रिजल्ट काफी नहीं हैं। शिक्षा अब नंबरों से आगे, न्याय और पारदर्शिता की लड़ाई बन चुकी है।

2025 में AI ने पढ़ाई को आसान बनाया, लेकिन इसकी खतरनाक साइड भी सामने आई। एक क्लास X छात्र को AI-generated अश्लील कंटेंट से ब्लैकमेल किया गया। यह सिर्फ नकल नहीं, बच्चों की मानसिक और डिजिटल सुरक्षा का मामला बन गया।
सरकार ने कक्षा VI से X तक AI लिटरेसी शुरू की, लेकिन सबक साफ है। AI को बिना समझ और गाइडेंस के छोड़ना, बच्चों को नए किस्म के अपराधों के हवाले करना है।
2026 के लिए सीख
2026 में टेक्नोलॉजी की जरूरत तो है ही, समझ बढ़ाने की भी आवश्यकता है। रिजल्ट के साथ रेगुलेशन और सेफ्टी कल्चर जरूरी है।
2025 ने दिल्ली को एक आईना दिखाया है। जहां पता चला कि गड्ढों से ज्यादा खतरनाक है खराब प्लानिंग। बसें सिर्फ ग्रीन नहीं, पर्याप्त होनी चाहिए। यूनिवर्सिटी सिर्फ रैंकिंग नहीं, भरोसा भी बनाएं। स्कूल सिर्फ नंबर नहीं, सुरक्षा भी सिखाएं। 2026 की असली परीक्षा यह है कि दिल्ली इन सबकों को याद रखे।

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