साल बदलते हैं लेकिन हाल नहीं... दिल्ली-NCR में प्रदूषण की ऐसी मार; क्या है वजह और समाधान?
दिल्ली-एनसीआर 2025 में भी भारत के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में रहा, जहाँ प्रदूषण अब सालभर की समस्या बन गया है। CREA रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का वार्षि ...और पढ़ें
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क्या दोबारा साफ हवा में सांस ले पाएगी दिल्ली? (एआई जेनरेटेड)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2025 में दिल्ली-NCR भारत के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक रहा। दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण ऐसा हो गया है कि साल बदलते हैं लेकिन इसका हाल नहीं।
यहां प्रदूषण अब किसी मौसम नहीं बल्कि पूरे सालभर रहता है और यहां के लोगों की परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। प्रदूषण का मुद्दा सड़क से संसद तक गूंजा।
नया साल आ चुका है और घुटती सांसों का दौर भी जारी है। ऐसा नहीं है कि इसे बेहतर नहीं किया जा सकता है, तो बीते सालों से हम इस साल क्या सबक लेकर दिल्ली-एनसीआर की हवा को बेहतर बना सकते हैं, हमारी यह स्टोरी इसी की पड़ताल है।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दिल्ली NCR के शहरों में सबसे अधिक प्रदूषित रही, इसके बाद गाजियाबाद और नोएडा का नंबर आता है।
सालाना आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में दिल्ली में PM2.5 का स्तर थोड़ा कम हुआ, लेकिन प्रदूषण सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) में औसत स्तर 2024 से कुछ बढ़ गया।
दिल्ली के सभी 40 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर PM2.5 का सालाना स्तर राष्ट्रीय मानक (40 माइक्रोग्राम/घन मीटर) से कम से कम 1.8 गुना अधिक दर्ज किया गया।
ऐसा रहा एनसीआर के 29 शहरों का हाल
NCR के 29 शहरों में से केवल 14 शहरों में 75% से अधिक PM2.5 डेटा कवरेज उपलब्ध था, जबकि शेष 15 शहर... हरियाणा में स्थित (बहादुरगढ़, सोनीपत, धारूहेड़ा, मानेसर, रोहतक, जींद, बल्लभगढ़, चरखी दादरी, पानीपत, करनाल, नारनौल, भिवानी, फरीदाबाद, मंडीखेड़ा और पलवल)—में मॉनिटरिंग अपर्याप्त रही।
दिल्ली का सालाना PM2.5 औसत 96 माइक्रोग्राम/घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक से 2.4 गुना और WHO की सुरक्षित गाइडलाइन (5 माइक्रोग्राम/घन मीटर) से 19.2 गुना अधिक है। अप्रैल, अगस्त और दिसंबर में PM2.5 स्तर पिछले साल से ज्यादा रहा।

CREA की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के भरतपुर और अलवर को छोड़कर NCR के सभी शहरों ने सालाना PM2.5 मानक पार कर लिया।
गाजियाबाद में दैनिक PM2.5 मानक से अधिक दिनों की संख्या सबसे ज्यादा दर्ज की गई।दिल्ली में सबसे प्रदूषित मॉनिटरिंग स्टेशन जहांगीरपुरी रहा, जहां सालाना औसत PM2.5 स्तर 130 माइक्रोग्राम/घन मीटर रहा। इसके बाद क्रमशः वजीरपुर (124), बवाना (123), आनंद विहार (121) और रोहिणी (115) का स्थान रहा।
यहां तक कि दिल्ली का सबसे कम प्रदूषित स्टेशन NSIT द्वारका (73 माइक्रोग्राम/घन मीटर) भी राष्ट्रीय मानक से 1.8 गुना अधिक रहा।
क्या कहते हैं CREA के विश्लेषक?
CREA के विश्लेषक मनोज कुमार ने कहा, “NCR में प्रदूषण अब साल भर बना रहता है, न कि केवल कुछ महीनों तक। सुधार की कमी शॉर्ट-टर्म उपायों की सीमाओं को दर्शाती है।” इस बीच, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के अनुसार, दिल्ली के कुल PM2.5 का केवल 35% स्थानीय स्रोतों से आता है, शेष 65% बाहरी क्षेत्रों से।
ट्रांसपोर्ट इसका सबसे बड़ा योगदानकर्ता (लगभग 46%) है।कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के मुताबिक, 2025 का औसत AQI 201 रहा, जो 2018 के बाद सात सालों में दूसरा सबसे कम है (2024 में 209 था)।
2025 में NCR शहरों का सालाना औसत PM2.5 सांद्रता
राष्ट्रीय मानक (NAAQS): 40 μg/m³
| शहर | PM2.5 औसत (μg/m³) | NAAQS से कितना गुना |
|---|---|---|
| दिल्ली | 96 | 2.4 गुना |
| गाजियाबाद | 92 | 2.3 गुना |
| नोएडा | 88 | 2.2 गुना |
| गुरुग्राम | 85 | 2.1 गुना |
| ग्रेटर नोएडा | 82 | 2.05 गुना |
| भिवाड़ी | 80 | 2 गुना |
| मुजफ्फरनगर | 78 | 1.95 गुना |
| हापुड़ | 75 | 1.9 गुना |
| बुलंदशहर | 72 | 1.8 गुना |
| बागपत | 70 | 1.75 गुना |
| मेरठ | 68 | 1.7 गुना |
| खुरजा | 65 | 1.6 गुना |
| भरतपुर | 55 | 1.4 गुना |
| अलवर | 50 | 1.25 गुना |
दिल्लीवासियों के सामने प्रदूषण की चुनौतियां
- स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: PM2.5 जैसे महीन कण फेफड़ों और रक्तप्रवाह में घुसकर सांस की बीमारियां, हृदय रोग, अस्थमा और समय से पहले मौत का कारण बनते हैं; बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जहां सालाना हजारों मौतें प्रदूषण से जुड़ी होती हैं।
- दैनिक जीवन पर प्रभाव: सर्दियों में AQI 400-450 तक पहुंचने से घर में रहना पड़ता है, मास्क पहनना अनिवार्य होता है, स्कूल ऑनलाइन शिफ्ट होते हैं, और बाहर निकलना जोखिम भरा हो जाता है; निर्माण बंदी और कार्यालयों में 50% क्षमता से काम प्रभावित होता है।
- आर्थिक नुकसान: स्वास्थ्य खर्च बढ़ता है, उत्पादकता कम होती है, उड़ानें रद्द होती हैं, और निर्माण-डेमोलिशन बंद होने से रोजगार प्रभावित; प्रदूषण से जुड़ी लागत अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती है।
- ट्रांसबाउंडरी और मौसमी समस्या: फसल अवशेष जलाना, वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल और औद्योगिक धुआं प्रदूषण बढ़ाते हैं; सर्दियों में कम हवा और ठंडी हवा से प्रदूषक फंस जाते हैं, जिससे NCR के अन्य शहर भी प्रभावित।
- शासन और प्रवर्तन की कमी: रिएक्टिव उपाय (जैसे GRAP) अपर्याप्त, विभागों में समन्वय की कमी, और क्षेत्रीय सहयोग कमजोर, जिससे लंबे समय तक सुधार नहीं होता।
संभावित बदलाव और सुधार
- परिवहन सुधार: इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दें, 5,000 ई-बसें और 18,000 चार्जिंग स्टेशन जोड़ें; सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करें, अंतिम मील कनेक्टिविटी सुधारें, और BS-VI/CNG/ईवी वाहनों को अनिवार्य करें।
- फसल अवशेष प्रबंधन: किसानों को बायो-डिकंपोजर और मशीनरी उपलब्ध कराएं, जलाने पर विकल्प दें, और पड़ोसी राज्यों (पंजाब, हरियाणा) से समन्वय करें।
- औद्योगिक और निर्माण नियंत्रण: प्रदूषक फैक्टरियां बंद करें, कोयला पर निर्भरता घटाएं, निर्माण साइटों पर रीयल-टाइम डस्ट मॉनिटरिंग और एंटी-स्मॉग गन अनिवार्य करें; सर्विस-आधारित इंडस्ट्री को बढ़ावा दें।
- घरेलू ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन: LPG/PNG/इलेक्ट्रिक कुकिंग को सब्सिडी दें, बायोमास जलाने पर रोक लगाएं; अपशिष्ट बायो-माइनिंग से नेट-जीरो वेस्ट हासिल करें, और रीसाइक्लिंग बढ़ाएं।
- शासन और मॉनिटरिंग: क्षेत्रीय समन्वय के लिए CAQM को मजबूत करें, फंडिंग बढ़ाएं, AI-आधारित पूर्वानुमान और अतिरिक्त एयर क्वालिटी स्टेशन लगाएं; जन जागरूकता अभियान चलाएं।
- हरी पहल: शहरी हरियाली बढ़ाएं, रूफटॉप सोलर को प्रोत्साहन दें, और क्लाउड-सीडिंग जैसे पायलट प्रोजेक्ट अपनाएं।

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