IND vs ENG: लॉर्ड्स पिच की चुनौती से कैसे निपटेगी टीम इंडिया? बल्लेबाजी कोच ने दे दिया गुरु मंत्र
भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले जाने वाले तीसरे टेस्ट मैच से पहले अपनी टीम के बल्लेबाजों को गुरू मंत्र दिया है। कोटक ने माना है कि इस बार लॉर्ड्स की पिच बीते दो मैचों से अलग होगी जिसपर बल्लेबाजी करना आसान नहीं होगा।

विशेष संवाददाता, जागरण लंदन: भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने कहा कि लॉर्ड्स टेस्ट की पिच पिछले दो मुकाबलों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर भारतीय बल्लेबाज बिना वजह के जोखिम भरे शॉट नहीं खेलते हैं तो वे अपनी शानदार लय को जारी रख सकते हैं।
कोटक ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा, पिच पर थोड़ी घास है, जो पिछली दोनों पिचों से ज्यादा है। लेकिन मैच से एक दिन पहले अंतिम कटिंग के बाद ही साफ तस्वीर सामने आएगी। आमतौर पर लॉर्ड्स में पहली और दूसरी पारी के स्कोर कम रहते हैं, जिससे साफ है कि यह पिच गेंदबाजों के लिए सहायक होगी। बल्लेबाजों को चाहिए कि वे क्रीज पर समय बिताएं, जितना समय आप क्रीज पर देंगे, उतना ही बेहतर आप ढल सकेंगे।
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आर्चर की वापसी से कड़ी होगी चुनौती
कोटक ने कहा, जोफ्रा आर्चर की वापसी भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण होगी। इंग्लैंड घरेलू टीम है और अगर वे चुनौतीपूर्ण पिच देना चाहते हैं, तो यह जायज है। लेकिन अगर आप टिककर खेलते हैं, तो कोई भी विकेट मुश्किल नहीं होती।
पंत जैसे खिलाड़ी अलग
कोटक ने स्वीकार किया कि ऋषभ पंत जैसे आक्रामक खिलाड़ियों के लिए नियम थोड़े अलग होते हैं। उन्होंने कहा कि हर टीम में कुछ खिलाड़ी होते हैं जो विपक्ष की गति तोड़ सकते हैं। जैसे जायसवाल और पंत। हां, पंत के फैसले कभी-कभी गलत दिखते हैं, लेकिन वह हर फैसले पर सोचते हैं और मेरे साथ अपनी रणनीति पर बात करते हैं।
ढलान से डरने की जरूरत नहीं
कोच के अनुसार, लॉर्ड्स की प्रसिद्ध स्लोप (ढलान) को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ी कहते हैं कि उन्हें स्लोप समझ में नहीं आती, लेकिन मुझे लगता है कि यह मानसिकता पर निर्भर करता है। गिल की फॉर्म पर बात करते हुए कोटक ने कहा कि उन्होंने अपनी तकनीक में थोड़ा बदलाव किया है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया है। गिल अब पिच पर समय बिता रहे हैं। अगर कोई ढीली गेंद मिलती है तो वो उसे बाउंड्री में बदलने में सक्षम हैं। उन्होंने 150-140 गेंदों में रन बनाए हैं, ये उनकी मानसिक दृढ़ता का संकेत है।
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