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    Share Market Tips: बंपर रिटर्न चाहिए तो स्टॉक सिलेक्शन के जरिए खोजने होंगे छुपे हुए हीरे

    By Pawan JayaswalEdited By:
    Updated: Mon, 10 Aug 2020 07:10 PM (IST)

    Share Market Tipsना तो MF निवेश धीमा हो रहा है और न ही यह बाजारों को प्रभावित करेगा। MF ने संबंधित समूहों के शेयरों को बेचकर ही रिडेंप्शंस की व्यवस्था की है। PC Pixabay

    Share Market Tips: बंपर रिटर्न चाहिए तो स्टॉक सिलेक्शन के जरिए खोजने होंगे छुपे हुए हीरे

    नई दिल्ली, किशोर ओस्तवाल। पहली तिमाही के नतीजों ने सभी तथाकथित विशेषज्ञों के शून्य से 55 फीसद मैन्युफैक्चरिंग की भविष्यवाणी करने वाले दावों को खतरनाक मार्जिन के साथ फेल कर दिया है। पहली तिमाही में कोई बड़ी आर्थिक गतिविधि नहीं होने के बावजूद औसत बिक्री अब तक 2 फीसद से अधिक और शुद्ध लाभ 17 फीसद से अधिक रहा है। पिछले सात वर्षों में पहली बार म्युचुअल फंड में नेगेटिव फ्लो देखने को मिला है। ऐसा पहले नहीं देखा गया। आमतौर पर यह रिटेल निवेशकों द्वारा होता है, लेकिन हमारे विचार से म्युचुअल फंडों से धन की निकासी रिटेल निवेशकों ने नहीं बल्कि बड़े कॉर्पोरेट्स ने की है।

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    अगर हम मौजूदा लिक्विडिटी और निवेश गतिविधियों के साथ इस तथ्य का विश्लेषण करें, तो हमें तर्क की तह तक जाना चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था विकास कर रही थी, लेकिन भारत में निजी निवेश की गति अब तक उस स्तर तक नहीं थी। केवल कुछ बड़े समूह ही ग्रीन फील्ड परियोजनाओं के जरिए विस्तार की कोशिश कर रहे थे। कोरना वायरस महामारी ने इनऑर्गेनिक ग्रोथ का एक नया अवसर खोला है। अचानक टेक ओवर्स और फंड राइजिंग ने गति पकड़नी शुरू की है।

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    रिलायंस, कोटक, एचडीएफसी, टाटा, एक्सिस, आईसीआईसीआई, इंडसइंड, महिंद्रा, यस बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और दूसरी कई कंपनियां फंड जुटा रही हैं। यही नहीं, इस चुनौतीपूर्ण समय में आईपीओ भी आ रहे हैं।

    इस तरह के निवेश के लिए हम म्युचुअल फंड में पड़े बेकार पैसे को वापस ले लेते हैं और इसलिए म्यूचुअल फंड में नेगेटिव फ्लो देखा जाता है। ना तो म्युचु्अल फंड निवेश धीमा हो रहा है और न ही यह बाजारों को प्रभावित करेगा। म्युचुअल फंड ने संबंधित समूहों के शेयरों को बेचकर ही रिडेंप्शंस की व्यवस्था की है। उदाहरण के तौर पर जब रिलायंस ने म्युचुअल फंड में निवेश किया था, तब यह  समझ थी कि वे 50 फीसद Reliance में ही निवेश करेंगे। अब जब रिलायंस ने रिडेंप्शन के लिए अनुरोध किया तो उन्होंने रिलायंस के शेयर बेचे और और रिडेंप्शन के दबाव को कम किया। इस प्रकार रिटेल का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि बाजार बढ़ रहा है।

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    जब एफपीआई की बात आई तो उन्हें महसूस हुआ कि COVID-19 एक एब्रेशन है, जिसका प्रभाव अगली कुछ तिमाहियों में खत्म हो सकता है और उसके बाद पहले की तरह ग्रोथ प्राप्त की जा सकती है, इसलिए उन्होंने अधिक से अधिक निवेश करने का फैसला किया। उसी समय अमेरिका ने लिक्विडिटी के लिए कई घोषणाएं कीं। एफईडी क्यूई इस बार 13 लाख करोड़ अमरीकी डालर है। जब लेहमैन हुआ तो 800 अरब डॉलर की लिक्विडिटी डाली गई थी और अब यह 13 लाख करोड़ डॉलर है।

    हालांकि, माना जाता है कि कुछ सुधार अपरिहार्य हैं, हम यह भी मानते हैं कि शेयर बाजार में सैकड़ों GEMS हैं, जिन्हें निवेश के लिए चुना जा सकता है, जो कुछ ही हफ्तों में सालना रिटर्न दे सकते हैं। उदाहरण के तौर पर हमारे पास प्रमुख कीमतों के बढ़ने के समय से ही NILES LTD नाम की कंपनी पर खरीद की कॉल थी। इस स्टॉक में दो दिन में 30 फीसद का उछाल आया है। इसी तरह की स्थिति एक दुसरी कंपनी FOODS and INNS में हो सकती है। इसमें 50 से 100 फीसद का उछाल देखा जा सकता है। इन कुछ नामों को साझा करने के पीछे का कारण यह बात बतानी है कि धन छिपे हुए gems में हो सकता है, जिन्हें स्टॉक सलेक्शन के माध्यम से पहचाना जा सकता है।

    (लेखक सीएनआई रिसर्च लिमिटेड के सीएमडी हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)