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क्या धनतेरस पर नहीं खरीद पाएंगे चांदी, 1 किलो छोड़िए 1 ग्राम के लिए भी किल्लत! एक्सपर्ट से जानिए क्यों हो रहा ऐसा

Published: Tue, 14 Oct 2025 01:14 PM (IST)Updated: Tue, 14 Oct 2025 01:28 PM (IST)

Silver Rate: दीपावली के अवसर पर धनतेरस पर चांदी की उपलब्धता को लेकर चिंता है। विश्व स्तर पर चांदी की ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। Silver Rate: दिवाली पास आ रही है। दीपावली (Diwali 2025) से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार है। धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार की कहानी कुछ और है। दरअसल, देश ही नहीं दुनिया में चांदी की किल्लत है। चांदी मिल नहीं रही है। शॉर्टेज हो गयी है। ऐसे में करोड़ों भारतीयों के मन में एक सवाल उठा है कि क्या धनतेरस पर चांदी मिलेगी या नहीं? क्योंकि चांदी की कीमतें (Silver Price) सोने से तेज भागती हुई आसमान पर पहले ही पहुंच चुकी है। इसके बावजूद डिमांड कम नहीं हो रही है। बढ़ती कीमत डिमांड को कम करने में भी नाकाम है। इस बढ़ती डिमांड में हमने कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया से जाना कि क्या धनतेरस के मौके पर चांदी मिलेगी या नहीं? आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या जवाब दिया।

धनतेरस पर क्या चांदी मिलेगी या नहीं?

कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट अजय केडिया से जागरण बिजनेस की टीम ने सवाल पूछा कि क्या धनतेरस के मौके पर चांदी की किल्लत के बीच लोगों को चांदी मिल पाएगी या नहीं? इस प्रश्न के जवाब पर अजय केडिया ने कहा कि देखिए चांदी की किल्लत सिर्फ भारत ही नहीं पूरे विश्व में है। चांदी की शॉर्टेज के पीछे की एक नहीं कई वजह है। जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे क्रिटिल मेटल की लिस्ट में डाल दिया है। इसके अलावा कई देशों के केंद्रीय बैंक सोने की तरह चांदी की भी खरीदारी कर रहे हैं। वहीं, तीसरा कारण है कि चांदी का प्रोडक्शन डिमांड के अनुसार बहुत कम हो रहा है। और चांदी एक तरह से इंडस्ट्रियल मेटल है। इसलिए इसकी डिमांड बढ़ती ही जा रही है।

अजय केडिया ने कहा, "देखिए धनतेरस के मौके पर बड़े शहरों जैसे- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और जयपुर में आप प्रीमियम पे करके चांदी खरीद सकते हैं। एक किलो के पीछे आपको 25 से 50 हजार रुपये की अतिरिक्त राशि देकर लोग चांदी खरीद रहे हैं। यानी चांदी की वास्तविक कीमत से 25 से 50 हजार रुपये ज्यादा पैसे देकर लोग चांदी खरीद रहे हैं। बड़े शहरों के ज्वेलर्स के पास चांदी का स्टॉक है। इसलिए इस शहरों में प्रीमियम पे करने पर चांदी मिल जा रही है। लेकिन छोटो शहरों में ज्वेलर्स के पास स्टॉक ही नहीं तो इसलिए वे ऑर्डर नहीं ले रहे हैं। संभव है टियर 2 और टियर 3 शहरों में धनतेरस के मौके पर चांदी न मिल पाए।"

भारत में क्यों हो रही है चांदी की कमी?

दुनिया में चाँदी का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत, चांदी के बर्तनों, आभूषणों, सिक्कों, बार और सौर ऊर्जा से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, औद्योगिक अनुप्रयोगों में इस धातु का उपयोग करता है। यह अपनी 80% से अधिक मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है।

2025 के पहले आठ महीनों में, चाँदी का आयात 42% घटकर 3,302 टन रह गया, जबकि निवेश माँग, विशेष रूप से ईटीएफ से, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस उछाल ने 2024 में आयातित अधिशेष को अवशोषित कर लिया, जिससे कमी पैदा हो गई जिसे अब अतिरिक्त विदेशी शिपमेंट के माध्यम से पूरा करने की आवश्यकता है।

भारत बड़ी मात्रा में चांदी का आयात क्यों नहीं कर पा रहा है?

भारत में, वायदा कीमतों की तुलना में चाँदी जिस भारी प्रीमियम पर कारोबार कर रही है, वह सामान्य परिस्थितियों में बैंकों को नकद प्रीमियम का लाभ उठाने के लिए आयात बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। लेकिन प्रमुख उत्पादक देशों से सीमित आपूर्ति, मजबूत औद्योगिक और निवेश मांग, और रसद संबंधी बाधाओं ने प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में भौतिक बाज़ार को तंग कर दिया है। लंदन में, लीज दरें, या भौतिक चाँदी उधार लेने की लागत, 30% से ज्यादा बढ़ गई है।

Silver ETF: नए सब्सक्रिप्शन पर अस्थायी रोक

सितंबर में सिल्वर ईटीएफ में रिकॉर्ड 53.42 अरब रुपये का निवेश हुआ, जो अक्टूबर की शुरुआत तक जारी रहा। नियामक नियमों के अनुसार, भौतिक रूप से समर्थित ईटीएफ को चांदी की सब्सक्राइब्ड मात्रा को भौतिक रूप में रखना होता है, जो आमतौर पर बैंकों और बुलियन डीलरों से खरीदी जाती है।

लेकिन, जब उन्होंने पिछले हफ्ते चांदी खरीदने की कोशिश की, तो उन्हें भारी प्रीमियम चुकाना पड़ा।  इन प्रीमियमों ने नए सब्सक्राइबर्स के लिए अधिग्रहण की लागत बढ़ा दी है। निवेशकों को बढ़ी हुई कीमतों से बचाने के लिए, ईटीएफ ने नए सब्सक्रिप्शन को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।