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    Silver Price Crashes: अगर हुआ ऐसा तो 60% तक टूट जाएगी चांदी? एक्सपर्ट्स ने बता दिया सच

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 11:59 AM (IST)

    चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद 13.75% गिरीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें और गिरावट आ सकती है। औद्योगिक मांग में बदलाव और भू-राजनी ...और पढ़ें

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    Silver Price Crashes: अगर हुआ ऐसा तो 60% तक टूट जाएगी चांदी? एक्सपर्ट्स ने बता दिया सच

    नई दिल्ली। Silver Price Crashes: चांदी की रफ्तार ने आम आदमी के दिल की धड़कन को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 2 लाख के पार जा चुकी चांदी जिस रफ्तार से भाग रही है उसे देख ऐसा लग रहा है कि आने वाले कुछ समय में सिल्वर की कीमतें 3 लाख तक भी पहुंच सकती हैं। हालांकि, पिछले एक हफ्ते से चांदी के दामों में जारी तेजी और भारी गिरावट ने निवेशकों को डरा दिया है। इसी बीच बहुत से एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी में और भी करेक्शन आना बाकी है।

    सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में $82.670 प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के बाद, COMEX चांदी की कीमत $71.300 प्रति औंस पर खत्म हुई, जो शुक्रवार को रिकॉर्ड हाई से $11.37 प्रति औंस या 13.75% की गिरावट थी। 2025 में सिल्वर की बढ़ती डिमांड-सप्लाई की कमी के कारण लगभग 180% बढ़ गई। सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलने की घोषणा के बाद इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने से चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

    चीन-अमेरिका में चल रही तकरार

    चीन और अमेरिका के बीच चांदी की कीमतों को ज्यादा और कम करने के लिए भी एक अंदरूणी जंग चल रही है। एक ओर जहां अमेरिका नहीं चाहता कि मेटल की कीमतेें बढ़ें तो दूसरी ओर चीन चाहता है कि मेटल की कीमतें बढ़ें ताकि डॉलर की वैल्यू कम हो। दुनिया डॉलर इकोनॉमी नहीं बल्कि मेटल बेस्ड इकोनॉमी बने। लेकिन ऐसा न हो इसके लिए अमेरिका पुरजोर कोशिश कर रहा है।

    कुछ स्ट्रक्चरल बदलाव, जैसे अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव के कारण पेरू और चाड से एक्सपोर्ट सप्लाई में रुकावट, और 1 जनवरी, 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी प्रॉफिट-बुकिंग के बाद निचले स्तरों पर सपोर्ट दिया। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स ने अब सुझाव दिया है कि चांदी में लॉन्ग पोजीशन रखने वाले इन्वेस्टर्स को प्रॉफिट बुक करने और अपनी पोजीशन से बाहर निकलने पर विचार करना चाहिए।

    मार्केट एक्सपर्ट्स का क्या है कहना?

    मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चांदी की कीमत खतरनाक लेवल पर पहुंच गई है, और इस कीमत में बढ़ोतरी की वजह से इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड खतरे में पड़ सकती है। एक्सपर्ट्स ने कहा कि अगर किसी इंडस्ट्री की लागत एक खास लेवल से अधिक बढ़ जाती है, तो वह दूसरे ऑप्शन देखने लगती है।

    फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल पहले ही चांदी को छोड़कर तांबे की तरफ बढ़ चुके हैं। जहां तक बैटरी की बात है, तो चांदी से कॉपर बाइंडिंग टेक्निक पर स्विच करने की कोशिशें की जा रही हैं।

    चांदी में आएगी 60% तक की गिरावट

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की कीमतें या तो $82.670 प्रति औंस के अपने पीक पर पहुंच गई हैं या इंस्टीट्यूशंस द्वारा शॉर्ट कवरिंग की वजह से कुछ समय के लिए और बढ़ सकती हैं। ऐसे में, यह फरवरी 2026 तक $100 प्रति औंस के लेवल तक पहुंच सकती है या उसके करीब जा सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, FY27 में, इस सफेद धातु के मंदी की चपेट में रहने की उम्मीद है और FY27 के आखिर तक इसमें 60% तक की गिरावट आ सकती है।

    या वेल्थ के डायरेक्टर अनुज गुप्ता ने सिल्वर इन्वेस्टर्स को पुरानी बातों को याद करने की सलाह देते हुए कहा, "सिल्वर की कीमतों का इतिहास रहा है कि एक मजबूत बुल ट्रेंड के बाद इसमें भारी गिरावट आती है। हमने ऐसा 1980 में देखा था, जब हंट ब्रदर्स ने कथित तौर पर दुनिया के सिल्वर रिजर्व का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जमा कर लिया था। इससे एक्सचेंजों को मार्जिन मनी बढ़ानी पड़ी, जो पहले ही शुरू हो चुकी है क्योंकि CDX ने मार्जिन मनी 25% बढ़ा दी है। लिक्विडिटी की कमी के कारण शॉर्ट-कवरिंग शुरू हो गई, और सिल्वर की कीमतें लगभग $49.50 से गिरकर लगभग $11 प्रति औंस हो गईं। 2011 में भी ऐसा ही हुआ था जब सिल्वर की कीमतें लगभग $48 प्रति औंस के लेवल पर पहुंचने के बाद 75% गिर गई थीं।"

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