जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्राकृतिक झंझावात से जूझ रहे किसान राहत की बाट जोह रहे हैं, लेकिन राज्यों की सुस्ती उनके आड़े आ रही है। नुकसान के आकलन व विस्तृत ब्योरा भेजने में विलंब के चलते हलकान किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। केंद्र ने राज्यों से तेजी से कार्रवाई करने व पीड़ित किसानों के आंसू पोंछने की अपील की है। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने स्वीकार किया है कि इस बार पांच फीसद तक उत्पादन कम हो सकता है।

उन्होंने माना कि यह फौरी अनुमान है। राज्यों की ओर से भेजे जाने वाले विस्तृत ब्योरे के बाद ही किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचा जा सकता है। रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की खेती के भारी नुकसान की खबरें हैं। खरीफ सीजन के तैयारी सम्मेलन में अनौपचारिक चर्चा के दौरान बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से नुकसान को कमतर नहीं आंका गया।

करीब एक करोड़ हेक्टेयर गेहूं की खेती प्रभावित हुई। इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा व मध्य प्रदेश में खासा नुकसान हुआ। गेहूं की पैदावार में पांच फीसद की कमी का यह अनुमान बहुत जल्दी में दिया गया। सरकार ने गेहूं की कुल पैदावार का लक्ष्य 9.57 करोड़ टन निर्धारित किया। यह पिछले साल के 9.59 करोड़ टन से मामूली कम है। खरीफ तैयारी सम्मेलन में देश के सभी राज्यों के प्रतिनिधियों के सम्मेलन में कृषि मंत्री सिंह ने जलवायु परिवर्तन से खेती के समक्ष आने वाली चुनौतियां का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि समूची दुनिया इससे निपटने की रणनीति पर विचार कर रही है। खेती के घटते संसाधनों के बीच किसानों की आय बढ़ाने के लिए बागवानी व मत्स्य पालन के साथ विविधीकरण पर ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया।

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