जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के गर्वनर डॉ. रघुराम राजन ने मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए ब्याज दरों में कटौती की है। रेपो रेट में आधा फीसद की कटौती की गई है और 50 बेसिक अंक की कमी की गई है। रेपो रेट अब 6.75 और रिवर्स रेपो रेट 5.75 हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय जब देश की अर्थव्यवस्था के और सुस्त होने के आसार बढ़ रहे हैं, रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 50 आधार अंकों या आधा फीसद की कटौती कर कर्ज को सस्ता करने का रास्ता साफ किया है। दरअसल, रेपो दर वो दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक अन्य व्यावसायिक बैंको को कर्जा देता है। अब ये बैंकों पर निर्भर है कि वो कितनी जल्दी कर्जा सस्ता कर अपने मौजूदा ग्राहको और अन्य ग्राहको राहत देते हैं। इस साल जनवरी से लेकर अब तक रिजर्व बैंक रेपो दरों में 1.25% फीसद की कटौती कर चुका है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज चालू वित्त वर्ष की चौथी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश की। महत्वपूर्ण नीतिगत दरों पर फैसला करते समय राजन ने विभिन्न कारकों मसलन निचली मुद्रास्फीति, औद्योगिक उत्पादन में सुस्ती, सामान्य से कम मानसून और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों बढोतरी के फैसले को टालने आदि को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट में कटौती की घोषणा की। चीन में सुस्ती के भारत पर असर को कम करने के लिए रिजर्व बैंक गवर्नर पर वित्त मंत्रालय के अलावा उद्योग जगत का भी ब्याज दरों में कटौती के लिए दबाव था।

ज्यादातर बैंकरों की राय थी कि मुद्रास्फीति में कमी तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा यथास्थिति कायम रखने से रिजर्व बैंक के लिए रेपो दर को 0.25 प्रतिशत घटाकर 7 प्रतिशत पर लाने की गुंजाइश बनी थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी पिछले सप्ताह कहा था कि अब ब्याज दरें नीचे आनी चाहिए। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने कहा कि उसे उम्मीद था कि केंद्रीय बैंक रेपो दरों में चौथाई फीसदी की कटौती कर इसे सात प्रतिशत पर लाएगा।

भारतीय स्टेट बैंक की चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा था कि आगामी महीनों में खाद्य वस्तुओं के दाम चढने की संभावना नहीं है, ऐसे में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बनती है। भट्टाचार्य ने कहा था, 'मेरा अभी भी मानना है कि देश में नीतिगत दरों में कटौती की गुंजाइश है। कितनी अभी यह कह पाना मुश्किल है।'

यूनियन बैंक आफ इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरुण तिवारी ने कहा था कि रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में चौथाई फीसदी कटौती की संभावना है। तिवारी ने कहा था कि रेपो दर में 29 सितंबर को 0.25 प्रतिशत की कटौती हो सकती है। हालांकि बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी है इसलिए सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में बदलाव नहीं होगा।

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इस वर्ष के शुरू में ही रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 75 आधार अंकों (0.75 फीसद) की कटौती की थी लेकिन उसका पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं मिला है। हाल के दिनों में वित्त मंत्रालय कई बार परोक्ष तौर पर ब्याज दरों में और कमी करने की मांग कर चुका है।

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अगस्त, 2015 में आरबीआइ ने खराब मानसून और वैश्विक हालात की वजह से ब्याज दरों को और घटाने से मना कर दिया था। आरबीआई को उम्मीद है कि जनवरी 2016 तक रिटेल महंगाई दर 5.8 फीसदी तक आ जाएगी। वहीं मार्च में रिटेल महंगाई दर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है। अक्टूबर-दिसंबर 2015 तक रिटेल महंगाई दर 5.5 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि आरबीआई ने ग्रोथ के लक्ष्य को घटा दिया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2016 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.6 फीसदी से घटाकर 7.4 फीसदी कर दिया है।

आरबीआई के मुताबिक 1 साल में एसएलआर 1 फीसदी घटेगा और मार्च 2017 में एसएलआर 20.5 फीसदी होगा। इसके अलावा बॉन्ड बाजार में बड़ा विदेशी निवेश आएगा। 1 साल में बॉन्ड बाजार में 1.85 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा। आरबीआई ने हाउसिंग लोन पर रिस्क वेटेज 50 फीसदी घटा दिया है। आरबीआई के इस कदम से हाउसिंग फॉर ऑल को बड़ा बूस्टर मिलेगा। साथ ही स्टेट डेवलपमेंट लोन में एफआईआई सीमा बढ़ा दी गई है और 2 चरणों में एफआईआई निवेश सीमा बढ़ेगी।

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रिजर्व बैंक के ब्याज दरों में कटौती के बाद सभी तरह के लोन की दरों में कमी होने की संभावना है। खासतौर से होम लोन की दरों में भी कमी होने से रियल सेक्टर को काफी राहत मिलेगी। इसके अलावा ऑटो लोन में कमी होने से ऑटो सेक्टर को भी फायदा होगा।

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Posted By: Sanjeev Tiwari