नई दिल्ली। आज भारतीय शेयर बाजारों की शुरुआत जबरदस्त गिरावट के साथ हुई। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बाजारों और एशियाई बाजारों में जारी गिरावट के असर से घरेलू शेयर बाजारों में भी कोहराम मचा है। अब तक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 5 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। फिलहाल बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 1700.00 अंक यानि 6.22 फीसद की गिरावट के साथ 25,653.12 अंक पर है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी भी 497.85 अंक गिरकर 7,926.25 अंक के स्तर पर पहुंच गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक एशियाई बाजारों की गिरावट का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही गिरावट है। इससे निवेशक डरे हुए हैं और बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। दूसरी तरफ कमोडिटी के दामों भी गिरावट का दौर है।

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मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की भी जमकर पिटाई हुई है। सीएनएक्स मिडकैप इंडेक्स करीब 4 फीसद लुढ़ककर 13,215 के स्तर पर आ गया है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 3.75 फीसद टूटकर 11,200 के नीचे आ गया है।

बीएसई के सभी सेक्टर में जमकर बिकवाली दिख रही है। रियल्टी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आई है। बीएसई के रियल्टी इंडेक्स में 4.9 फीसद और ऑटो इंडेक्स में 4 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है। बैंक निफ्टी 3.8 फीसद लुढ़ककर 17,400 के नीचे आ गया है।

बाजार में कारोबार के इस दौरान यस बैंक, वेदांता, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, टाटा मोटर्स, गेल और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में 6.8-4.75 फीसद तक की कमजोरी आई है। मिडकैप शेयरों में वक्रांगी, ओसीएल इंडिया, एसकेएस माइक्रोफाइनेंस, हेक्सावेयर और केईसी इंटरनेशनल सबसे ज्यादा 15.2-7.8 फीसद तक लुढ़के हैं।

एशियाई बाजारों का बुरा हाल

एशियाई बाजारों में तेज गिरावट का दौर देखने को मिला है। चीन के बाजारों में सपाट शुरुआत के बाद तेज गिरावट देखने को मिल रही है । शंघाई कंपोजिट फिलहाल 8 फीसद की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। चीन ने रविवार को 547 अरब डॉलर के पेंशन फंड को स्टॉक मार्केट में लगाने की मंजूरी दे दी। एक्सपर्ट्स इसे चीन की सरकार का एक और आश्चर्यजनक तौर पर बड़ा कदम मान रहे हैं। इसलिए चीन सरकार के इस कदम को मार्केट के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। चीन का यह पेंशन फंड दुनिया का सबसे बड़ा फंड है। सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस फंड को बड़ी परियोजनाओं में निवेश किया जाएगा और सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों के स्टॉक्स को खरीदकर दीर्घकालिक फायदा उठाने की कोशिश की जाएगी। सरकार ने अपने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इसके पीछे इस भारी भरकम फंड से ज्यादा रिटर्न हासिल करने का इरादा है। यह रकम अभी तक बैंकों या कम आय वाले ट्रेजरी बांड्स में लगी हुई थी। वहीं दूसरे एशियाई बाजारों में दबाव देखने को मिल रही है। जापान, ताइवान और हांगकांग के बाजारों में पांच फीसद तक की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है।

डॉलर के मुकाबले रुपया भी धड़ाम

रुपये में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही। आज हफ्ते की शुरुआत भी रुपये की गिरावट के साथ हुई है। फिलहाल एक डॉलर की कीमत 66.44 रुपये पर है। जल्द ही इसके 66.50 तक पहुंचने की संभावना जाहिर की जा रही है। आज डॉलर के मुकाबले रुपया 64 पैसे यानि 1 फीसद की गिरावट भारी गिरावट के साथ 66.47 के स्तर पर खुला है। वहीं पिछले हफ्ते डॉलर के मुकाबले रुपया 65.83 पर बंद हुआ था।

कच्चे तेल के दाम 40 डॉलर के नीचे, सोना 1160 डॉलर के ऊपर

वैश्विक बाजारों में पिछले 8 हफ्तों से कच्चे तेल के दाम लगातार घट रहे हैं। फिलहाल नायमैक्स पर डब्ल्यूटीआई क्रूड 2 फीसद से ज्यादा फिसलकर 40 डॉलर प्रति बैरल के नीचे है। इसके अलावा ब्रेंट क्रूड 1.25 फीसद गिरकर 44.7 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर नजर आ रहा है।

वहीं, सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6 हफ्ते के ऊपरी स्तरों पर पहुंच गया है। फिलहाल कॉमैक्स पर सोने का भाव 1,160 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया है। लेकिन कॉमैक्स पर चांदी 0.5 फीसद टूटकर 15.2 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई है।

मिनटों में डूबे निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये

शेयर मार्केट में भारी गिरावट की शुरुआती कुछ मिनटों में ही निवेशकों के दो लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए। इसके बाद यह आंकड़ा चार लाख करोड़ तक पहुंच गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप 100 लाख करोड़ रुपये के स्तर से नीचे आ गया है।

आरबीआई गवर्नर ने इकोनॉमी पर जताया भरोसा

आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने अर्थव्यवस्था पर पूरा भरोसा जताया है। राजन ने कहा,' आरबीआई की शेयर बाजार की रफ्तार पर नजर है। दूसरी इमर्जिंग इकोनॉमी के मुकाबले भारत कहीं बेहतर स्थिति में है। अनिश्चितताओं से निपटने के लिए देश को अपनी घरेलू स्थिति और मजबूत करनी होगी। आर्थिक सुधारों से देश की ग्रोथ बढ़ाई जा सकती है। देश के पास काफी विदेशी मुद्रा भंडार है। रुपए को संभालने के लिए इसके इस्तेमाल करने में नहीं हिचकिचाएंगे।'

क्या है शेयर मार्केट में इतनी बड़ी गिरावट की वजह

1. वैश्विक बाजारों से मिले निगेटिव सेंटिमेंट्स शेयर बाजार में सोमवार की गिरावट के पीछे प्रमुख वजह है।


2. चीन के बाजार में सुस्ती की आशंका को देखते हुए विदेशी निवेशक उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से अपना पैसा निकाल रहे हैं। यही कारण है कि भारत जैसे उभरते बाजार से निवेशक पैसा समेटकर ले जा रहे है।


3. चीन के शेयर बाजार में भी सोमवार को 8 फीसद से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। गिरावट के साथ ही शंघाई कंपोजिट ने साल भर की पूरी बढ़त गंवा दी।


4. रविवार को ही चीन सरकार ने 547 अरब डॉलर के पेंशन फंड को स्टॉक मार्केट में लगाने की मंजूरी दी थी। इसके बावजूद बाजार में गिरावट इस बात का संकेत है कि चीन सरकार के कदम मंदी को रोकने में नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में चीन के मंदी के भंवर में फंसने की संभावना प्रबल हो गई है और वैश्विक निवेशक भी डरे हुए हैं कि कहीं इसके असर से दुनिया भर में मंदी ना छा जाए।

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Posted By: Shashi Bhushan Kumar