जीएसटी लागू करने वाले देशों से लेना होगा सबक, बाकी हैं कई सुधार
तकरीबन सभी देशों में जीएसटी की व्यवस्था एक जैसी है। कुछ देशों में इस कर की जगह वैट प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।
नई दिल्ली। बेहतर कर प्रणाली की व्यवस्था को लागू करने केे बीच जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) अभी राजनीतिक विरोधाभास बीच लटका है। इस कर प्रणाली के माध्यम से भारत आर्थिक विकास के मजबूत भविष्य की ओर देख रहा है। इससे पहले कि जीएसटी लागू हो हमें उन देशों के बारे में अध्ययन करना होगा जहां ये कर व्यवस्था लागू है।
तकरीबन सभी देशों में जीएसटी की व्यवस्था एक जैसी है। कुछ देशों में इस कर की जगह वैट प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। हालांकि यह कर वस्तु व सेवा के उपभोग पर लगाया जाता है। लेकिन शायद सबसे विवादास्पद मुद्दा यह है कि दुनिया में अलग-अलग शासन के बीच इस कर की दरों को तय करने पर असहमति है। कुछ देश अभी भी दर संरचना को तर्कसंगत बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
भारत की तरह कनाडा एकमात्र ऐसा देश है जहां जीएसटी से जुड़ी दोहरी कर प्रणाली है। कनाडा में भी जब इस टैक्स सिस्टम को लाया गया उस वक्त देश में राजनीतिक दलों में सहमति नहीं थी। हालांकि विरोध के बावजूद इस प्रणाली को लागू किया गया। कनाडा की सरकार ने जीवन निर्वाह के लिए व्यवहारिक तरीके से इसे लागू करने के बाद कर की दरों को दो बार कम किया। कई अन्य देशों ने इसे लागू करने के तुरंत बाद ही इस व्यवस्था में बड़े परिवर्तन किए।
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भारत के संदर्भ में जहां एक बार राजस्व तटस्थ दर 27% पर विचार-विमर्श किया गया था और अब वास्तविक 16-18% से कम के बारे में बात की जा रही है, ये अत्यंत प्रासंगिक है। यह जरूरी है कि एक उचित दर संरचना जीएसटी की सफलता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाए।
ज्यादातर देशों में जहां जीएसटी कर व्यवस्था को अपनाया गया है वहां कुछ आंकड़ें सामने आए हैं। जीएसटी लागू होने से मुद्रास्फीति में वृद्धि देखी गई। विशेष तौर पर ऐसा तब हुआ जबकि टैक्स दर पहले से बदले हुए रूप में इस्तेमाल किया गया। उदाहरण के लिए, सिंगापुर में जब जीएसटी की शुरुआत हुई तो साल 1994 में मुद्रास्फीति की दर में त्वरित परिवर्तन देखा गया।
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