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दो दोस्तों ने मिलकर बनाई थी Indigo, 2021 में राकेश गंगवाल ने छोड़ा साथ, क्या थी राहुल भाटिया से नाराजगी की वजह

Published: Mon, 08 Dec 2025 02:36 PM (IST)

इंडिगो एयरलाइन की शुरुआत 2005 में राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने मिलकर की थी। खास बात है दोनों के ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। इंडिगो संकट (Indigo Crisis) से देश में एविएशन सेक्टर की रफ्तार मानो थम सी गई। पिछले दिनों फ्लाइट्स के लगातार कैंसिल होने से अलग-अलग एयरपोर्ट पर लाखों यात्री फंस गए। इस पूरे घटनाक्रम ने कंपनी के ऑपरेशन से जुड़ी विफलताओं को सामने ला दिया। क्या आप जानते हैं इंडिगो एयरलाइन की शुरुआत 2005 में दो खास दोस्त, राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल (Rahul Bhatia & Rakesh Gangwal) ने मिलकर की थी, दोनों की पार्टनरशिप से देश की यह बड़ी एयरलाइन कंपनी बनी। लेकिन, कुछ साल बाद विवाद और मतभेद के चलते राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल की राहें अलग-अलग हो गईं।

दरअसल, 2019 में कंपनी के ऑपरेशन से जुड़े मतभेदों के चलते राकेश गंगवाल ने राहुल भाटिया के खिलाफ आवाज उठाई और सेबी में इसकी शिकायत की। वहीं, राहुल भाटिया ने भी राकेश गंगवाल पर मुकदमा दायर कर दिया।

क्यों अलग हुए राहुल और राकेश

राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने 2005 में पार्टनरशिप के साथ इंडिगो एयरलाइन शुरू की। जहां राहुल भाटिया के पास लोकल बिजनेस स्किल और एविएशन सर्विसेज का अनुभव था, वहीं राकेश गंगवाल के पास ग्लोबल एयरलाइन से जुड़ी विशेषज्ञता थी, क्योंकि वे पहले यूएस एयरवेज़ में सीईओ रह चुके थे और यूनाइटेड एयरलाइंस में सीनियर पोस्ट पर काम किया था, इसलिए दोनों ने मिलकर एविएशन सेक्टर में कुछ बड़ा करने के लिए इंडिगो एयरलाइन की शुरुआत की।

राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल की अगुवाई में इंडिगो कुछ सालों के अंदर ही देश की नंबर वन प्राइवेट एयरलाइन कंपनी बन गई। लेकिन, साल 2019 में दोनों के बीच कायम साझेदारी और आपसी भरोसा टूट गया। राकेश गंगवाल ने इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज के ज़रिए इंडिगो पर राहुल भाटिया के कंट्रोल पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, खासकर रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन और बोर्ड की स्वतंत्रता के मामले को लेकर, राकेश गंगवाल ने कहा कि इस मुद्दे पर पारदर्शिता को लेकर समझौता नहीं किया जा सकता था।

राकेश गंगवाल का मानना था कि कंपनी के मालिक का कंट्रोल गवर्नेंस पर हावी नहीं होना चाहिए, खासकर इंडिगो जैसे बड़े और प्रभावशाली सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध संस्थान में। 2019 में गंगवाल ने शिकायत के साथ सेबी का रुख किया और बाद में भाटिया द्वारा गंगवाल पर मुकदमा दायर करने के बाद, लंदन में मध्यस्थता का रुख किया।

धीरे-धीरे बेची हिस्सेदारी

इंडिगो एयरलाइन से राकेश गंगवाल का जाना सिद्धांतों से प्रेरित था। उनका मानना था कि कंपनियों के विस्तार के साथ-साथ प्रशासन के मानकों में भी बदलाव आना चाहिए। राकेश गंगवाल की असहमति केंद्रित नियंत्रण, कथित हितों के टकराव और बोर्ड की स्वतंत्रता के मुद्दों से उपजी थी। वे असमान शक्ति संतुलन से सहमत नहीं थे इसलिए उन्होंने कंपनी से अलग होने का फैसला किया।

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फरवरी 2022 में राकेश गंगवाल ने बोर्ड से इस्तीफा दे दिया और ऐलान किया कि वह अगले 5 वर्षों में धीरे-धीरे कंपनी से बाहर निकलेंगे। इसलिए उन्होंने इंडिगो में अपनी हिस्सेदारी बेचना शुरू कर दी।