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    Money Supply: सरकार के पास कहां से आता है पैसा, इसके बढ़ने या घटने का आपकी जेब पर क्या होता है असर

    By Gaurav KumarEdited By: Gaurav Kumar
    Updated: Fri, 30 Jun 2023 07:30 AM (IST)

    पैसा हम सबको प्यारा है और इसी के लिए हम सब काम भी करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि देश में मनी की सप्लाई कैसे होती है और मनी सप्लाई के सरकार के पास कितने स्रोत से। आज हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब आपको देंगे जिसे जानने के बाद आपको इस विषय पर किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी।

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    How RBI Measures the Money Supply in India, know details

    नई दिल्ली,बिजनेस डेस्क: जब भी बात अर्थव्यवस्था की आती है तो हमारे मन में सबसे पहले पैसे का ही चित्र बनता है और बने भी क्यों न, अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी ही पैसा है। अगर आपने पैसे को समझ लिया इसका मतलब आपने पूरे अर्थव्यवस्था का आधार का अध्ययन कर लिया क्योंकि इसी पे सारी चीजें टीकी हैं।

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    आज हम पैसों की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आज हम आपको देश में पैसों की आपूर्ति (मनी सप्लाई) और इसके आपूर्ति के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं क्योंकि पैसा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण पहलू है।

    क्या होती है मनी सप्लाई?

    मनी सप्लाई का मतलब पैसों का कुल स्टॉक, जो किसी विशिष्ट दिन पर अर्थव्यवस्था में सर्कुलेशन में होते हैं। इस सप्लाई में जनता द्वारा रखे गए सभी नोट, सिक्के और डिमांड डिपॉजिट शामिल होते हैं। यहां आपके लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि आरबीआई के पास रखे गए पैसों के स्टॉक को मनी सप्लाई में शामिल नहीं किया जाता है।

    मनी सप्लाई के कितने स्रोत?

    मनी सप्लाई के कुल तीन स्रोत है:

    पहला स्रोत वह जो भारत सरकार सभी सिक्के और ‘एक’ रुपये के नोट जारी करती है।

    दूसरा स्रोत वह जो आरबीआई अन्य नोट जैसे 10,20,500 इत्यादि के नोट छापती है।

    तीसरा स्रोत वह जो वाणिज्यिक बैंक डिमांड डिपॉजिट के अनुसार लोन बनाते हैं।

    भारत में मनी सप्लाई के क्या हैं उपाय?

    देश में मनी सप्लाई के कुल चार उपाय हैं, M1, M2, M3 और M4। चलिए एक-एक कर समझते हैं:

    M1 (Narrow Money):

    M1 में किसी भी दिन जनता के पास मौजूद सभी करेंसी नोट शामिल होते हैं। इसमें देश के सभी बैंकों की बचत और चालू खाता जमा दोनों की सभी डिमांड डिपॉजिट भी शामिल हैं।

    इसमें आरबीआई के पास रखी बैंकों की अन्य सभी जमा राशियां भी शामिल होती हैं। M1 = CC + DD + अन्य डिपॉजिट

    M2:

    M2 भी नैरो मनी है, इसमें M1 के सभी समावेश शामिल हैं और इसके अतिरिक्त डाकघर बैंकों की बचत जमा भी शामिल होती है। M2 = M1 + डाकघर बचत की बचत जमा

    M3 (Broad Money):

    M3 में जनता द्वारा रखे गए सभी करेंसी नोट, बैंक के पास सभी डिमांड डिपॉजिट, आरबीआई के पास सभी बैंकों की जमा और देश के सभी बैंकों की नेट एफडी शामिल हैं। M3 = M1 + बैंकों की एफडी

    M4

    M4 मनी सप्लाई का सबसे व्यापक माप है जिसका उपयोग आरबीआई करता है। इसमें M3 के सभी पहलू शामिल हैं और देश के डाकघर बैंकों की बचत भी शामिल है। यह उन सभी में सबसे कम तरल माप है। M4 = M3 + डाकघर बचत

    आपकी जेब पर क्या असर?

    अर्थशास्त्रियों के मुताबिक मनी सप्लाई के बढ़ने या घटने का असर ब्याज दरों पर पड़ता है। मनी सप्लाई ब्याज दरों को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था में प्रवाहित पैसों की मात्रा के बढ़ाने या घटाने से विभिन्न नीतियों का निर्माण होता है।

    ब्याज दरों के बढ़ने और घटने का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ता है जिससे या तो आपका लोन महंगा होगा या फिर सस्ता।