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    8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट: सैलरी, फिटमेंट फैक्टर से इंश्योरेंस तक, कर्मचारियों ने रख दीं ये 5 बड़ी मांगें!

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 04:16 PM (IST)

    आठवें वेतन आयोग के लागू होने की संभावना के बीच, ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉई फेडरेशन ने केंद्र सरकार के सामने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए पांच प्रमुख ...और पढ़ें

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    8th Pay Commission पर बड़ा अपडेट: सैलरी, फिटमेंट फैक्टर से इंश्योरेंस तक, कर्मचारियों ने रख दीं ये 5 बड़ी मांगें!

    नई दिल्ली| सातवां वेतन आयोग खत्म हो चुका है और नए साल में आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है। नया साल यानी 2026 लागू होते ही लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि आखिर बढ़ी सैलरी कब आएगी। इस बीच ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉई फेडरेशन ने केंद्र सरकार के सामने कर्मचारियों और पेंशनर्स की ओर से 5 बड़ी मांगें रखी हैं। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने जागरण बिजनेस से खास बातचीत में बताया कि ये मांगें देश के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख से ज्यादा पेंशनर्स से जुड़ी हैं।

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    पहली मांग: फैमिली यूनिट बढ़ाने की मांग

    डॉ. मंजीत पटेल के मुताबिक, सबसे पहली और सबसे अहम मांग फिटमेंट फैक्टर (8th pay commission fitment factor) से जुड़ी है। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि फैमिली यूनिट (Demand to increase family unit) तीन से बढ़ाकर पांच की जाए। इससे फिटमेंट फैक्टर अपने आप बेहतर होगा और आम कर्मचारी भी इसे आसानी से समझ पाएगा।"

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    दूसरी मांगः इंश्योरेंस पर भी बड़ा मुद्दा

    दूसरी बड़ी मांग कर्मचारियों के बीमा को लेकर है। अभी बीमा कटौती ₹30, ₹60 और ₹120 के हिसाब से होती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाली राशि बेहद कम है। डॉ. पटेल ने कहा, "₹30 कटने पर कोई बीमा नहीं मिलता और ₹60 पर सिर्फ ₹60 हजार। इतने पैसों में न अंतिम संस्कार ठीक से हो पाता है और न ही शव को घर ले जाया जा सकता है।" उन्होंने मांग की कि न्यूनतम बीमा ₹25-50 लाख, मिड लेवल पर ₹60 लाख से ₹1 करोड़ और उच्च स्तर पर ₹1.5-2 करोड़ तक किया जाए।

    तीसरी मांगः मेडिकल का मुद्दा अहम

    तीसरी मांग मेडिकल सुविधाओं से जुड़ी है। CGHS के तहत जहां अस्पताल उपलब्ध नहीं हैं, वहां सरकार सिर्फ ₹1000 महीना फिक्स मेडिकल अलाउंस देती है। इस पर डॉ. पटेल ने कहा, "आज एक डॉक्टर की फीस ही ₹1000 से ₹2000 हो जाती है। बच्चों और बुजुर्गों के इलाज के लिए यह रकम नाकाफी है।" उन्होंने इसे 15–20 गुना बढ़ाने और आयुष्मान भारत की तरह अच्छे प्राइवेट अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की मांग रखी।

    चौथी मांगः दिल्ली सरकार के कर्मचारियों पर बड़ी मांग

    चौथा मुद्दा दिल्ली सरकार के कर्मचारियों का है। उन्होंने बताया कि दिल्ली एकमात्र ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है जहां कर्मचारियों के नियम केंद्र सरकार तय करती है। रिटायरमेंट के बाद बाहर के राज्यों से आए कर्मचारियों को इलाज के लिए दिल्ली आना पड़ता है। इसलिए मांग है कि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को CGHS या DGHS में से किसी एक को चुनने का विकल्प मिले।

    पांचवीं मांगः एक समान हो बेसिक सैलरी (8th Pay Commission Salary Hike 2026)

    पांचवीं अहम मांग वेतन विसंगतियों (पे एनोमली) को लेकर है। डॉ. पटेल ने उदाहरण देते हुए कहा, "केंद्र और यूपी में लेवल-6 की बेसिक सैलरी करीब ₹35,400 है, लेकिन बिहार में वही सैलरी ₹25,000 है।" उन्होंने कहा कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के तहत बेसिक सैलरी और डीए पूरे देश में एक समान होने चाहिए, जबकि भत्तों में राज्यों के हिसाब से बदलाव हो सकता है।

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    अंत में डॉ. मंजीत पटेल ने कहा कि वेतन आयोग सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर और PSU कर्मचारियों के लिए भी उम्मीदें लेकर आता है। हमारी फेडरेशन पूरी मजबूती से कर्मचारियों की आवाज सरकार तक पहुंचा रही है।

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