Bihar News: पांच साल में ढाई गुना बढ़े बाल अपराध के मामले, परिवार टूटने और इंटरनेट मीडिया का पड़ा बुरा असर
पटना में बाल अपराध की बढ़ती घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। नशे की लत टूटते परिवार और सोशल मीडिया के कारण बच्चे अपराध की दुनिया में जा रहे हैं। पुलिस आंकड़ों के अनुसार बाल अपराधियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। चोरी तस्करी और साइबर अपराध जैसे मामलों में किशोर शामिल हैं। पुलिस और किशोर न्याय बोर्ड सुधार के लिए प्रयास कर रहे हैं।
राज्य ब्यूरो, पटना। नशे की लत, टूटते परिवार और इंटरनेट मीडिया का प्रभाव बालक-किशोरों को अपराध की दुनिया में ढकेल रहा है। राज्य में हर साल बाल अपराधियों की संख्या नया रिकॉर्ड बना रही है।
पुलिस मुख्यालय के आंकड़े खुद इसकी गवाही दे रहे। राज्य में पिछले पांच सालों में बाल अपराधियों की संख्या ढाई से तीन गुना तक बढ़ गई है।
अपराध अनुसंधान विभाग के कमजोर वर्ग के अपर पुलिस महा निदेशक अमित कुमार जैन ने बताया कि वर्ष 2020 में 7631 बालक और किशोरों के विरुद्ध 6543 कांड दर्ज किए गए थे।
यह आंकड़ा 2021 में बढ़कर 12 हजार, 2022 में 19 हजार 75, 2023 में 20 हजार 235 और 2024 में बढ़कर 21 हजार से अधिक हो गया। इस साल जून तक 10 हजार 908 बालक-किशोरों के विरुद्ध नौ हजार 126 कांड दर्ज किए गए हैं।
अगर 2020 से जून 2025 तक के कुल आंकड़े देखें तो इस दौरान 77 हजार 384 आपराधिक कांडों में 90 हजार 935 बालक-किशोर शामिल रहे हैं। इनमें 4,241 लड़कियां और 82 हजार 694 लड़के शामिल हैं।
चोरी-तस्करी और साइबर अपराध में शामिल हो रहे किशोर
एडीजी जैन ने बताया कि अपराध की दुनिया में बालकों की बढ़ती हिस्सेदारी चिंता का विषय है। पेशेवर संगठित अपराधी भी अपराध में नाबालिगों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
बालकों के विरुद्ध दर्ज कांडों में सर्वाधिक मामले चोरी, डकैती, वाहन चोरी, दुष्कर्म, नशीले पदार्थ की तस्करी या सेवन, साइबर अपराध और समूह हिंसा से जुड़े हैं।
नौ जुलाई को ही पटना के दीघा में दो किशोरों को हत्या की सुपारी लेने के अपराध में पकड़ा गया।
इनकी निशानदेही पर बड़ी संख्या में हथियारों की बरामदगी भी पुलिस ने की है। उन्होंने माता-पिता और अभिभावकों से अपने बच्चों की निगरानी करने की अपील की।
जिला स्तर पर विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन
बाल और किशोर अपराधियों के मामलों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन किया गया है, जिसका नेतृत्व डीएसपी मुख्यालय को दी गई है।
इसके अलावा प्रत्येक थाना स्तर पर बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी की नियुक्ति की गई है, जो इस तरह के कांडों का दायित्व निभाते हैं। पुलिस पदाधिकारियों को भी बाल अपराध को लेकर लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दोषी बालक-किशोरों के सुधार के लिए भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाल अपराध में सुधार के लिए किशोर न्याया बोर्ड की सक्रियता बढ़ाई गई है।
बाल सुधार गृहों के सुदृढ़ीकरण के साथ स्कूल स्तर पर जागरूकता और प्रशिक्षण व परामर्श की व्यवस्था की गई है।
हाल के वर्षों में आपराधिक कांडों में बालकों और किशोरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पेशेवर संगठित गिरोह भी बच्चों का इस्तेमाल अपराध में कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण टूटते परिवार, मादक पदार्थों का सेवन, इंटरनेट मीडिया, सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन और गलत संगत आदि है। -अमित कुमार जैन, एडीजी, कमजोर वर्ग (सीआइडी)
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