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    Cyber Crime: रिटायर डॉक्टर; होटल और 74 लाख की ठगी: डिजिटल अरेस्ट का चौंकाने वाला केस, पटना से दुबई तक जुड़े तार

    Updated: Fri, 13 Dec 2024 03:08 PM (IST)

    नालंदा मेडिकल कालेज एंड हॉस्पिटल (एनएमसीएच) के सेवानिवृत्त डॉक्टर से 74 लाख की ठगी मामले के तार दुबई तक जुड़ रहे हैं। डॉक्टर से बेंगलुरु ऋषिकेश और अन्य दो अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजी गई थी। ठग पैसों रुपयों को बायनेंस के माध्यम से यूएसडीटी खरीदकर दुबई में कैश करवा लेते थे। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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    रिटायर डॉक्टर से ठगी का दुबई कनेक्शन

    जागरण संवाददाता, पटना। शेयर ट्रेडिंग और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का नेटवर्क दुबई तक फैला है। डिजिटल अरेस्ट के बाद पीड़ित की रकम सेल कंपनियों, इंटरप्राइज या व्यक्तियों के खाते में भेजने के बाद बायनेंस (एक्सचेंज) के माध्यम से ठग क्रिप्टो करंसी खरीदकर दुबई में कैश करवा रहे हैं।

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    फिलहाल, पुलिस इस पर कुछ भी बोलने से बच रही है। हाल ही में पटना में सेवानिवृत्त डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 74 लाख की ठगी मामले में भी दुबई कनेक्शन जुड़ने लगा है।

    अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए रुपये

    सेवानिवृत्त डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट करने के दौरान ठगों ने उनसे बेंगलुरु, ऋषिकेश सहित तीन जगहों पर तीन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए थे। यहां से कुछ रकम का दुबई के एक बैंक के एटीएम से भी ट्रांजेक्शन किया गया था। साथ ही गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान, एर्नाकुलम से भी रुपयों की निकासी की गई थी। ठगों ने रुपये कई स्तर पर ट्रांसफर किया था।

    अब पुलिस पहले जिस खाते में रुपये ट्रांसफर कराया गया था, उसका ब्योरा जुटाने के साथ ही यह भी पता कर रही है कि ठगी की रकम दूसरे देश के बैंक तक किस चेन के जरिए पहुंच गई।

    साइबर थाना पटना डीएसपी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर और चिकित्सक से ठगी मामले का अनुसंधान किया जा रहा है। कुछ लोगों का नाम सामने आया है, उसका सत्यापन कराया जा रहा है।

    पैसा आते ही दूसरे खातों में ट्रांसफर

    चिकित्सक को होटल में डिजिटल अरेस्ट किया गया था। ठग जैसे-जैसे उनसे रुपये ट्रांसफर कराते गए, उसके कुछ देर बाद ही निकासी भी करते गए। वहीं, सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर से 3.7 करोड़ की ठगी मामले में दूसरे देश में रुपये भेजने का कोई कनेक्शन सामने नहीं आया है।

    इसमें तीन लोगों की पहचान की गई है, जो अलग-अलग राज्यों के हैं। उनके ठिकानों की भी सूचना मिली हैं, जिसका स्थानीय पुलिस के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है।

    साइबर ठगी के 3 चर्चित मामले

    साइबर थाने में डिजिटल अरेस्ट के तीन चर्चित मामले सामने आ चुके हैं। कई अन्य मामले भी हैं, लेकिन उसमें ठगी की रकम कम है। पीड़ित द्वारा यह पता कर लिया जा रहा है कि पहले किस बैंक खाते में रकम ट्रांसफर कराई गई और कितने स्तर पर पैसे बंटते गए।

    डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बीच इन सवालों का जवाब खोज रही पुलिस

    • डार्करूम कहां बनाए गए हैं?
    • इसका सरगना कौन है?
    • वह गिरोह को कहां से आपरेट कर रहे हैं?
    • गिरोह के तार किस राज्य या किन देशों से जुड़े हैं?
    • ठगों का नेटवर्क कैसे काम कर रहा है?
    • ठगी की रकम कैसे दूसरे देश में पहुंच रही है?
    • फिर यहां सक्रिय गिरोह के सदस्यों तक कैसे पहुंच रही है?

    40 दिन में 345 मामले दर्ज

    साइबर थाने में बीते 40 दिनों में 345 मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें केस दर्ज कर पुलिस अनुसंधान में जुटी है। इसमें सबसे अधिक बिजली काटने, क्रेडिट कार्ड अपडेट, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर जालसाजी, डिजिटल अरेस्ट, फोन कर फर्जी मैसेज भेज पैसा वापस मांगना सहित अन्य तरीकों से ठगी के हैं।

    ठगी की रकम की बात करें तो सबसे अधिक शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा का झांसा और डिजिटल अरेस्ट कर पैसे ट्रांसफर कराया गया। हाल ही में सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर, चिकित्सक और शिक्षक से करीब चार करोड़ की ठगी हो चुकी है।

    साइबर थाने में हर दिन दस से 12 मामले आ रहे हैं, इसमें कुछ ऐसे भी केस होते हैं, जो जालसाजी के होते है। वहीं, साइबर थाने में जून 2023 से नवंबर 2024 में 28 सौ केस दर्ज हो चुके हैं। इन मामलों में पुलिस ठगी की गई रकम बरामद करने व अपराधियों का पता लगाने में जुटी है।

    600 की कुर्ती के लिए 30 हजार गंवाए

    साइबर ठग के झांसे में आकर एक युवती छह सौ की कुर्ती के लिए तीस हजार रुपये गंवा बैठी। ठग ने झांसे में लेकर युवती से कई किश्तों में रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पीड़िता की शिकायत पर साइबर थाने की पुलिस केस दर्ज कर अनुसंधान में जुटी है।

    एसके पुरी थाना क्षेत्र की निवासी युवती ने इंस्टाग्राम पर कपड़े के ऑनलाइन सेल से संबंधित फोटो देखी। 599 की कुर्ती पसंद आ गई। बुकिंग से पहले वाट्सएप पर प्रोडेक्ट के बारे में मैसेज के जरिए जानकारी दी गई।

    वाट्सएप पर ही कुर्ती का ऑर्डर दिया गया और भुगतान के लिए क्यूआर कोड भेजा गया। क्यूआर कोड के माध्यम से पीड़िता ने 599 का भुगतान कर दिया। ठगों ने यकीन दिलाने के लिए अपना आधार और पैन कार्ड की तस्वीर भी भेजी।

    उसके दो दिनों बाद युवती के पास फिर फोन आया। बोला गया कि आपने जो भुगतान किया वह निर्धारित समय के भीतर नहीं आया। इसलिए आपको तत्काल 22 सौ और देना होगा, जिसमें से दस रुपये काटकर बाकी रकम लौट दी जाएगी। इसके साथ दूसरे के नाम से क्यूआर कोड भेजा गया।

    युवती ने विश्वास में आकर 22 सौ रुपये भेज दिए। बोला गया कि पैसे नहीं आए हैं, उन्होंने फिर से क्यूआर कोड पर 22 सौ ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद उनसे कई बार में अलग-अलग क्यूआर कोड पर 30 हजार रुपये ट्रांसफर कर लिया गया। तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ और थाने में प्राथमिकी कराई।

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