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    Bihar: किशनगंज-बहादुरगंज के बीच बनेगा फोरलेन हाईवे, 1100 करोड़ का प्रोजेक्ट; यात्रा में बचेंगे 25 मिनट

    किशनगंज-बहादुरगंज के बीच बनने वाली चार लेन सड़क से क्षेत्र में सड़क संपर्कता को बढ़ावा मिलेगा। यह सड़क एनएच-27 और एनएच 327ई को जोड़ेगी। इस परियोजना की कुल लागत 1117.01 करोड़ रुपए है। स्पर की लंबाई 23.649 किमी है। इसके निर्माण से एनएच 327 ई अररिया-गलगलिया और एनएच 27 पूर्णिया-मुजफ्फरपुर आपस में जुड़ जाएगा। यह नया हाईवे एक महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा होगा।

    By BHUWANESHWAR VATSYAYAN Edited By: Rajat Mourya Updated: Thu, 30 Jan 2025 07:39 PM (IST)
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    किशनगंज-बहादुरगंज के बीच बनेगा फोरलेन हाईवे, 1100 करोड़ का प्रोजेक्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    राज्य ब्यूरो, पटना। किशनगंज-बहादुरगंज खंड पर फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य शीघ्र आरंभ होगा। उपमुख्यमंत्री सह पथ निर्माण मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इससे किशनगंज में सड़क संपर्कता को नई गति मिलेगी।

    किशनगंज-बहादुरगढ़ सड़क एनएच-27 और एनएच 327ई के बीच एक स्पर कनेक्टिविटी के रूप में काम करेगा। इस परियोजना की कुल लागत 1117.01 करोड़ रुपए है। स्पर की लंबाई 23.649 किमी है।

    यह किशनगंज के उत्तर रामपुर गांव से शुरू होकर सतल इस्तमरार गांव बहादुरगंज में समाप्त होगा। इसके निर्माण से एनएच 327 ई अररिया-गलगलिया और एनएच 27 पूर्णिया-मुजफ्फरपुर आपस में जुड़ जाएगा। स्पर निर्माण के लिए निविदा जारी कर दी गयी है।

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    पूरब-पश्चिम कॉरिडोर होगा कनेक्ट

    उपमुख्यमंंत्री ने कहा कि यह नया हाईवे एक महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा होगा। यह पूरब-पश्चिम कॉरिडोर को सीधे तौर पर जोड़ेगा। विभिन्न शहरों से सिलीगुड़ी के बागडोगरा हवाई अड्डे तक की यात्रा आसान हो जाएगी। यात्रा का समय भी कम होगा।

    यात्रा में बचेंगे 25 मिनट

    किशनगंज से बहादुरगंज जाने अभी 45 मिनट लगता है जो इस स्पर के निर्माण से घटकर 20 मिनट हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना बिहार में आधारभूत संरचना के विकास का एक महत्वपूर्ण घटक है। इससे राज्य के विकास को गति मिलेगी। इससे अन्य राज्यों के साथ-साथ पड़ाेसी देशों के साथ बिहार के व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे।

    प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र, एनएच की जमीन अधिग्रहण की बाधाओं को दूर करें

    दूसरी ओर, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र लिख कर कहा है कि वे एनएच के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण की बाधाओं को प्राथमिकता के स्तर पर दूर करें।

    उन्होंने यह पत्र उन शिकायतों के बाद लिखा है, जिनमें कहा जाता है कि अधिकारियों के टाल मटोल के कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं। इससे लागत खर्च बढ़ जाता है। मुकदमे की संख्या भी बढ़ जाती है।

    टाल मटोल करना छोड़ें

    उन्होंने लिखा कि रैयतों एवं राज्य के व्यापक हित में टाल मटोल की प्रवृति पर रोक लगाने की जरूरत है। पत्र में अर्जनाधीन भूमि की प्रकृति एवं दर को लेकर सक्षम प्राधिकार, भू-अर्जन द्वारा निर्णय लेने की जगह कार्रवाई को टालने का जिक्र किया गया है।

    दिशा-निर्देशों का पालन करें

    प्रमंडलीय आयुक्तों से अनुरोध किया गया है कि विवादित मामलों में जिनमें उनसे मध्यस्थ के रूप में निर्णय लेने की अपेक्षा की जाती है, एनएच एक्ट, 1956 एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निदेशों का पालन हो रहा है या नहीं इसका अवलोकन कर लें।

    अपर मुख्य सचिव के पत्र में लिखा गया है कि अर्जनाधीन भूमि की प्रकृति एवं दर को लेकर रैयतों में अक्सर असंतोष रहता है। भूमि की प्रकृति से ही दर का निर्धारण होता है। इसी से मुआवजा तय होता है।

    इस संबंध में जिला भू अर्जन पदाधिकारियों के द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ आयुक्त सह अध्यक्ष यानी आर्बिट्रेटर के समक्ष अपील का प्रविधान है।

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