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    Bihar News: अब बिहार से यूपी की दूरी हो जाएगी कम, इस जगह पुल के निर्माण को मिल गई मंजूरी

    Updated: Thu, 30 Jan 2025 03:40 PM (IST)

    बिहार के आरा में पीपा पुल बनने से यूपी जाना आसान हो जाएगा। प्रशासन की तरफ से इसकी मंजूरी मिल गई है। दोपहिया व चार पहिया वाहनों का आवागमन शुरू होने से यूपी और बिहार के कई जिलों के बीच लगभग आठ माह से बंद पड़ा सड़क मार्ग चालू हो जाएगा। आरा-छपरा पुल होकर उत्तर प्रदेश जाने में यह दूरी करीब 150 किलोमीटर हो जाती है।

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    बिहार से यूपी जाने में लगेगा कम समय (जागरण)

    जागरण संवाददाता, आरा। Bihar News: बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड ने चार माह की लंबी जद्दो-जहद के बाद आखिरकार महुली में गंगा नदी पर पीपा पुल बनाने की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी। इस आदेश के बाद अब टेंडर डालने की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है।

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    10 फरवरी से शुरू हो जाएगा पीपा पुल का निर्माण

    सब कुछ सही रहा तो 10 फरवरी के आसपास से पीपा पुल को बनाने का कार्य शुरू हो जाएगा। यह कार्य फरवरी के अंत तक पूरा होने के साथ ही इस माह के लास्ट से आवागमन भी शुरू हो जाएगा। इसके शुरू हो जाने से बिहार और यूपी के हजारों लोगों को रोजाना आवागमन में सुविधा होगी।

    दोपहिया व चार पहिया वाहनों का आवागमन शुरू होने से यूपी और बिहार के कई जिलों के बीच लगभग आठ माह से बंद पड़ा सड़क मार्ग चालू हो जाएगा। पीपा पुल के अभाव में भोजपुर जिला के साथ साथ उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाते हैं।

    बिहार से यूपी जाने में लगेगा कम समय

    पुल पर आवागमन बंद होने से अरवल, जहानाबाद या झारखंड से आने वाली गाड़ियों को बक्सर होकर बलिया या सारण जिले के कुछ हिस्सों तक करीब 100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। यही हाल उत्तर प्रदेश से इन जिलों में आने वाली गाड़ियों की होती है। आरा छपरा पुल होकर उत्तर प्रदेश जाने में यह दूरी करीब 150 किलोमीटर हो जाती है।

    इतना ही नहीं, बड़हरा प्रखंड के अंतर्गत खवासपुर पंचायत के 18 गांवों के निवासियों को चार पहिया गाड़ी से अपने ही प्रखंड मुख्यालय या जिला मुख्यालय आने के लिए 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। 

    विभागीय लापरवाही के कारण अब केवल चार माह होगा आवागमन

    बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड की लापरवाही के कारण जिस पीपा पुल का निर्माण अक्टूबर-नवंबर में होता था, वह इस बार फरवरी में शुरू हो रहा है। इस प्रकार इसके चार माह विलंब होने के कारण अब केवल चार माह ही इस पर लोग आवागमन करेंगे। नियमानुसार जून के बाद यह खुलने लगता है। पांच वर्ष के लिए हुए टेंडर में लगभग 16 करोड़ रुपये लागत आएगा और प्रत्येक वर्ष लगभग 60 पीपा जोड़ा जाएगा। 

    स्वास्थ्य सेवा व लग्न में वरदान बन जाता है यह पुल

    गंगा के महुली घाट पर बना पीपा पुल शुरू होते ही यह अगल बगल के गांव में रहने वाले हजारों लोगों के लिए कई मायने में वरदान साबित होने लगता है। गंगा के उस पार खवासपुर समेत यूपी के बलिया छपरा के कई गांवों के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ स्वास्थ्य सेवा और शादी विवाह के समय होता है।

    पुल पर आवागमन शुरू होने से कम समय के साथ कम खर्च पर बेहतर चिकित्सा सुविधा का लाभ लेने लगते हैं। वहीं पुल होने से अकाल मौत पर भी ब्रेक लग जाता है। आवागमन प्रारंभ होने से कम खर्च पर ही बिहार और यूपी के लोग विवाह समारोह संपन्न करा लेते हैं। 

    पीपा लगाने की प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है। टेंडर की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। फरवरी के पहले सप्ताह में सभी प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद 10 फरवरी से पीपा लगाने का कार्य शुरू होने की संभावना है। पीपा पुल चालू होने से रोजाना हजारों लोगों को परिवहन में सुविधा होगी। - खुर्शीद करीम, कार्यपालक अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड, आरा प्रमंडल

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