Bihar Crime: बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म कांड को दबाने वाले पटना के थानेदार समेत चार निलंबित, ये है पूरा मामला
नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को दबाने वाले राजधानी पटना के पितवास थाने के प्रभारी राहुल कुमार ओडी अफसर सह एएसआइ हरि शंकर पंडित एएसआइ शशि भूषण प्रसाद और मुंशी सिपाही सूर्यदेव कुमार को पुलिस कप्तान राजीव मिश्रा ने रविवार को निलंबित कर दिया। अभी ये चारों फरार हैं। अब पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
जागरण संवाददाता, पटना। नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को दबाने वाले राजधानी पटना के पितवास थाने के प्रभारी राहुल कुमार, ओडी अफसर सह एएसआइ हरि शंकर पंडित, एएसआइ शशि भूषण प्रसाद और मुंशी सिपाही सूर्यदेव कुमार को पुलिस कप्तान राजीव मिश्रा ने रविवार को निलंबित कर दिया।
इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। साथ ही थाने के दलाल प्रेम कुमार, उसके सहयोगी जयप्रकाश समेत दो अन्य लोगों के विरुद्ध पीड़ित परिवार को हथियार का भय दिखाने एवं दुष्कर्म का वीडियो प्रसारित करने की धमकी देने के आरोप में आर्म्स एक्ट, पाक्सो व आइपीसी की धारा के तहत प्राथमिकी की गई है।
अभी ये चारों फरार हैं। दैनिक जागरण ने रविवार के अंक में पृष्ठ संख्या पांच पर ‘पांच बार सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता के पिता से बदलवाया आवेदन, छेड़छाड़ की बात लिखवाई’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसमें पुलिस के अमानवीय चेहरे एवं दलाल की भूमिका को उजागर किया था।
इसके बाद वरीय अधिकारियों ने मामले में कार्रवाई की। दुष्कर्म का एक आरोपित गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य पांच को पुलिस तलाश रही है।
नहीं लगाई थी सामूहिक दुष्कर्म की धारा
दैनिक जागरण में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद सिटी एसपी (पश्चिमी) अभिनव धीमान स्वयं पितवास थाने पहुंचे और सभी बिंदुओं पर छानबीन की। इसमें उन्होंने पाया कि थानेदार ने प्राथमिकी में सामूहिक दुष्कर्म की जगह छेड़छाड़ की धारा लगाई थी।
एसपी ने बताया कि इस कांड का जांचकर्ता फुलवारीशरीफ डीएसपी (द्वितीय) दीपक कुमार को बनाया गया है। उनके माध्यम से न्यायालय में सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण आदि अपराध की धारा जोड़ने के लिए शुद्धि पत्र दिया जाएगा।
साथ ही सामूहिक दुष्कर्म कांड के आरोपितों, दलाल एवं उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी को डीएसपी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई, जिसमें नौबतपुर समेत अन्य थानों के तेज-तर्रार अफसरों को शामिल किया गया है।
एसपी ने टीम को निर्देश दिया है कि एफएसएल की रिपोर्ट एवं तकनीकी विश्लेषण कर पुख्ता साक्ष्य को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि आरोपितों को कड़ी सजा मिल सके।
दुष्कर्म के दौरान वीडियो बना रहा था जयप्रकाश
बताया जाता है कि दलाल प्रेम का सहयोगी जयप्रकाश सामूहिक दुष्कर्म कांड का भी आरोपित है। वह दुष्कर्म के दौरान वीडियो बना रहा था। जब उसे जानकारी मिली कि पीड़ित परिवार शिकायत करने थाने जा रहा है, तब उसका दुस्साहस इतना कि वह प्रेम के साथ उनके घर पर धमक गया था।
उसने घर में हथियार तान कर थाने नहीं जाने की धमकी दी थी, इस बीच ग्रामीण जुट गए। इसके बाद वह प्रेम के साथ थाने पर चला गया। पीड़िता के चाचा के अनुसार, थाने के बाहर भी जयप्रकाश ने पिस्टल तान दी थी।
पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप कर उसे भगा दिया था। इसके बाद पीड़ित परिवार ने सामाजिक संगठनों एवं मीडिया को घटना की जानकारी दी, तब पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म कांड के एक आरोपित सूरज कुमार उर्फ सूगन मांझी को गिरफ्तार किया था।
मेडिकल जांच प्रक्रिया भी अमानवीय
दरिंदों की हैवानित का शिकार बनी 11 वर्षीया बच्ची एवं उसके स्वजन को पुलिस ने तो निराश किया ही। अब रही-सही कसर कानूनी प्रक्रिया ने पूरी कर दी। पीड़िता के स्वजन ने बताया कि वे दो दिनों से मेडिकल जांच की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पुलिस के साथ पीएमसीएच के चक्कर काट रहे हैं।
शनिवार को दिन में चार बजे पहुंचे तो माइक्रो बायोलाजी लैब में ताला लगा था। उन्हें अगले दिन को आने के लिए कहा गया। रविवार को दोबारा पीएमसीएच गए तो भी लैब बंद था।
उन्हें अब सोमवार को आने के लिए कहा गया है। हैरत है कि निजी जांच लैब के प्रतिनिधि घर आकर सैंपल ले जाते हैं, लेकिन आधुनिक युग में अब भी दुष्कर्म पीड़िताओं को अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। यह घोर अमानवीय है।
महिला पुलिसकर्मी के साथ भीड़ में खड़ी लड़की को देख कर आसपास के लोग अंदाजा लगा लेते हैं कि इसके साथ दुष्कर्म हुआ होगा। इस कारण पीड़िताओं को चेहरा ढंक कर जाना पड़ता है। गर्मी के दिन में रविवार को पीड़ित बच्ची भी इसी तरह पीएमसीएच में खड़ी थी। पसीना पोंछने के लिए भी वह चेहरे से दुपट्टा नहीं हटा सकती थी।
क्या है मामला .
सूरज, जयप्रकाश, नीरज, टोनू और दो अज्ञात युवक गुरुवार की दोपहर तीन बजे घर से कुरकुरे लाने गई बच्ची को अगवा कर टेंट हाउस में लेकर गए थे। वहां सभी ने बारी-बारी से बच्ची से दुष्कर्म किया था। उसकी चीखें दुकान से बाहर न जाएं, इसलिए जेनरेटर चालू कर दिया था।
बाद में चाचा को बच्ची अचेत स्थिति में टेंट हाउस में मिली थी। अगले दिन वे शिकायत करने थाने गए थे, परंतु पुलिसकर्मियों व थाने के दलाल ने सामूहिक दुष्कर्म की जगह छेड़छाड़ का आवेदन लिखवा कर प्राथमिकी स्वीकार की थी।
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