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    Cyber Crime: अनपढ़ से CA तक.. साइबर ठगों का नेटवर्क, प्राइवेट कंपनी की आड़ में ट्रांसफर करा रहे ठगी की रकम

    Updated: Mon, 16 Dec 2024 03:25 PM (IST)

    साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है बावजूद इसके पुलिस के हाथ खाली हैं। साइबर ठगों के गिरोह में अनपढ़ से लेकर तकनीकी जानकार और CA तक शामिल हैं जो आसानी से ठगी के पैसों को ट्रांसफर कर लेते हैं। यही नहीं पिछले कुछ समय में प्राइवेट कंपनी बनाकर ठगी की मोटी रकम उसमें ट्रांसफर कराई जा रही है।

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    तेजी से बढ़ रहे साइबर क्राइम के मामले

    आशीष शुक्ल, पटना। साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ना तो दूर ठगी की रकम किस गिरोह तक पहुंच रही है, इसकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया है। पुलिस भी मोबाइल का आइएमईआइ और सिमकार्ड को बंद कराने के साथ एक बैंक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर धनराशि को ब्लॉक कराने में उलझी होती है। जैसे ही पता चलता है ठगी में म्यूल खाते का इस्तेमाल हुआ है, जांच वहीं उलझ जा रही है।

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    ठगों के गिरोह में अनपढ़ से चार्टेड अकाउंटेंट तक

    ठगों के चेन में तकनीकी जानकार से लेकर कम पढ़े लिखे, चार्टेड अकाउंटेंट से लेकर फर्जी कंपनी तैयार कर खाता खोलने वाले लोगों की भी संलिप्तता उजागर हो चुकी है। कंपनी के नाम से खुले खातों में मोटी रकम ट्रांसफर कराई जा रही है।

    पुलिस ऐसे खातों की पहचान कर संबंधित खाता धारक का सत्यापन करती है, लेकिन वह उस पते पर मिलते ही नहीं।

    नौकरी की लालच में फंसते लोग

    • पुलिस गिरफ्त में वे आते है जो नौकरी के झांसे में आकर साइबर ठगी के लिए खोले गए काल सेंटर में काम करते है।
    • लालच में आकर अपने खाते को किराए पर देते हैं या फिर ठगी की रकम निकालने के लिए एटीएम पर पहुंचने वाले ठग होते है।
    • इन सब के बीच की कड़ी और मास्टरमाइंड कौन है? पुलिस उसके करीब भी नहीं पहुंच पा रही है।

    एक साल में गिरफ्तार किए गए जा चुके 590 अपराधी

    • साइबर थाना, इओयू की विशेष टीम और अन्य थानों की पुलिस बीते जनवरी से दस दिसंबर के बीच 590 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
    • इसमें तेलंगना, आंध्र प्रदेश, गुजरात के साथ ही दूसरे राज्य के भी ठग शामिल हैं।
    • कई गिरोह के अपराधी इसमें शामिल हैं, लेकिन इनकी गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस सरगना तक नहीं पहुंच पाती है।
    • इसमें अधिक आरोपित सरगना से मिले ही नहीं या फिर वह किसी और के संपर्क में थे।

    11 दिनों में खोली गईं थीं आठ कंपनियां

    सितंबर में आर्थिक अपराध इकाई की साइबर सेल की टीम टेलीग्राम और वाट्सएप पर ग्रुप बनाकर वर्क फ्रॉम होम जॉब के नाम पर लोगों को मुनाफा का झांसा देकर मोटी रकम अलग अलग खातों में मंगा रहे। रकम भी 50 लाख से अधिक है। लोगों से ठगे गए पैसों को प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के अकाउंट में ट्रांसफर कराया जा रहा था।

    • जांच में पता चला कि साइबर ठगों द्वारा दो चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहे छात्रों के साथ मिलकर आठ कंपनियां नवंबर 11 नृवंबर 2022 से 22 नवंबर 2022 तक खोली गई थी।
    • इस गिरोह को कोलकाता से संचालित किया जा रहा था। जबकि गिरोह के अन्य सदस्य कंपनी के खाते में आने वाले पैसों की पटना सहित अन्य जिलों से निकासी कर लेते थे।
    • एटीएम के साथ चेक का भी इस्तेमाल किया जा रहा था।

    टेलीकॉम पर नकेल

    एनसीआरपी पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें मिलने पर पुलिस मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर के साथ अन्य जानकारी जुटाती है। जिन नंबरों से फोन कर ठगी की शिकायतें आ रही थी, उसमें से 3842 मोबाइल नंबर को ब्लॉक कराया गया।

    इसके साथ ही तकनीकी अनुसंधान में सिम कार्ड जिस मोबाइल में इस्तेमाल हो रहा था, उसका डिटेल निकालने पर मिले आइएमईआई नंबर को ब्लॉक कराया गया। ऐसे 13 सौ नंबर सामने आ चुके थे।

    दो साल पूर्व ही सामने आ चुका है अकाउंट का राज

    वर्ष 2022 में पत्रकारनगर पुलिस की गिरफ्त में आया कुंदन पटना में ही रह रहा था। गिरोह को पहले से बताया गया कि कोई भी सदस्य पुलिस की गिरफ्त में आए तो उसी समय बाकी सदस्य अपना मोबाइल व सिम कार्ड बदलते है।

    ठगी के लिए सिमकार्ड, मोबाइल, सिम बाक्स, एप और सॉफ्टवेयर से लेकर लैपटॉप उन्हें कहीं से मिल जा रहे थे, लेकिन ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए खाता नंबर के साथ एटीएम कार्ड और उससे लिंक मोबाइल नंबर की जरूरत पड़ रही थी।

    तब गिरोह ने कमीशन पर कई लोगों को सक्रिय किया, जिनका काम सिर्फ दूर दराज गांव के लोगों को झांसा देकर उनसे हर महीने पांच हजार रुपये देने वादा कर उनका एटीएम व पॉसबुक जमाकर गिरोह तक पहुंचाना था।

    इस गैंग ने पांच सौ से अधिक बैंक खाते खोलवा रखे थे। दो साल पूर्व यह राज उजागर हुआ, इसके बाद भी पुलिस, बैंक और अन्य जांच एजेंसी ऐसे खाता धारकों पर नकेल नहीं कस सकी और अब यहीं खाता पुलिस के लिए गले की हड्डी बनी हुई है।

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