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Bihar Weather Update: बिहार में कमजोर पड़ा मानसून, वज्रपात की घटनाओं में वृद्धि के आसार; पढ़ें मौसम का पूरा अपडेट

Bihar Monsoon News बिहार में मानसून कमजोर पड़ गया है। राज्य में अभी तक औसत से भी कम वर्षा हुई है। हालांकि अगले दो से तीन दिनों बाद राज्य में एक बार फिर से मानसून के सक्रिय होने की उम्मीद की जा रही है। वहीं वज्रपात की घटनाओं में वृद्धि के आसार हैं। वहीं मध्य बिहार के कुछ इलाके में हल्की वर्षा स्थानीय कारणों से हो सकती है।

By Niraj Kumar Edited By: Rajat Mourya Wed, 10 Jul 2024 07:36 AM (IST)
बिहार में मानसून कमजोर पड़ गया है। (फोटो- ANI)

जागरण संवाददाता, पटना। Bihar Weather Update राज्य में फिलहाल मानसून काफी कमजोर पड़ गया है। मानसून कमजोर होने के बावजूद प्रदेश के कुछ इलाके में वज्रपात की घटनाओं में वृद्धि होने के आसार बन गए हैं। खासकर उत्तरी बिहार के कुछ जिलों में मेघगर्जन की घटनाओं में वृद्धि होने का अनुमान है। वहीं, मध्य बिहार के कुछ इलाके में हल्की वर्षा स्थानीय कारणों से हो सकती है।

मंगलवार को राज्य में सर्वाधिक तापमान औरंगाबाद में 38.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सबसे कम न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, राजधानी में अधिकतम तापमान 35 एवं न्यूनतम तापमान 28.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मानसून कमजोर, वर्षा में आई कमी

मौसम विज्ञानियों का कहना है कि राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून (Bihar Monsoon 2024) के कमजोर पड़ने के कारण वर्षा में कमी आई है। कुछ इलाके में स्थानीय कारणों से हल्की वर्षा हो रही है। अगले दो से तीन दिनों बाद राज्य में एक बार फिर से मानसून के सक्रिय होने की उम्मीद की जा रही है। उसके बाद राज्य में वर्षा तेज हो जाएगी। अब तक सामान्य से नौ प्रतिशत कम हुई वर्षा

औसत से भी कम हुई बारिश

इस मानसून सीजन में अब तक औसत से नौ प्रतिशत वर्षा (Bihar Rain Forecast) रिकॉर्ड की गई है। राज्य में मानसून के दौरान 243.8 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। जो औसत वर्षा से नौ प्रतिशत कम है। हालांकि, जुलाई में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद की जा रही है। बिहार में जून से लेकर सितंबर तक मानसून की वर्षा होती है। राज्य में औसतन वर्षा एक हजार मिलीमीटर होती है। इस वर्ष भी उसी के आसपास वर्षा होने की उम्मीद की जा रही है।

किसानों को हो रही परेशानी

जून में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की कमी के कारण अधिकांश किसान अभी तक धान की रोपनी नहीं शुरू कर पाए। जिन जगहों पर नहर या नलकूप से सिंचाई की व्यवस्था है वहां पर धान की रोपनी की जा रही है। परंतु जहां पर इसकी व्यवस्था नहीं है वहां के किसान आकाश की ओर नजरें लगायें हैं ताकि वर्षा हो सके।

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