विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bihar News: बिहार में अफीम की खेती पर बड़ा एक्शन, 800 एकड़ की फसल नष्ट; 146 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

Published: Sun, 20 Apr 2025 08:52 AM (IST)

बिहार में पुलिस और सुरक्षा बलों ने ड्रोन और सेटेलाइट तस्वीरों की मदद से 800 एकड़ से अधिक में फैली ...और पढ़ें

बिहार में 800 एकड़ अफीम की खेती नष्ट
बिहार में 800 एकड़ अफीम की खेती नष्ट

HighLights

  1. 790.5 एकड़ में लगी अफीम के अवैध खेत किए गए नष्ट
  2. 21.54 एकड़ में भांग के अवैध खेत को भी किया गया नष्ट
  3. अवैध खेती के मामले में 146 प्राथमिकी दर्ज की गई अफीम की

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में नक्सलियों के घटते प्रभाव का असर अवैध ढंग से की जा रही अफीम की खेती पर भी पड़ा है। बिहार पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के सघन ऑपरेशन से उनका दायरा अब झारखंड के सीमावर्ती जंगली इलाकों तक ही रह गया है। इन इलाकों में भी सेटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन की मदद से अफीम के अवैध खेतों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है।

छह माह में करीब आठ सौ एकड़ में लगी अफीम की फसल नष्ट

बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले छह माह में करीब आठ सौ एकड़ में लगी अफीम समेत अन्य मादक पदार्थों की अवैध खेती को नष्ट किया है।

इसमें 790.5 एकड़ में अफीम, जबकि 21.54 एकड़ में भांग की अवैध खेत को नष्ट किया गया है। इस मामले में 146 प्राथमिकी भी दर्ज की गई हैं, जिसके आधार पर आरोपितों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है।

आधी हुई नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या

बिहार में पिछले छह सालों में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या आधी हो गई है। वर्ष 2018 में जहां 16 जिले नक्सल प्रभावित थे वहीं अब सात-आठ जिले ही नक्सली असर वाले रह गए हैं। उत्तर बिहार को नक्सल मुक्त घोषित किया जा चुका है।

अब दक्षिण बिहार में झारखंड से सटे नक्सलियों के बचे-खुचे प्रभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर सुरक्षा और संचार के माध्यम मजबूत किए जा रहे हैं। इसका असर भी हो रहा है। पहले जिन इलाकों में पुलिस और सुरक्षाबलों की पहुंच नहीं थी, अब वहां लगातार गश्ती हो रही। इसके कारण इन इलाकों में अफीम की खेती या अन्य अवैध काम कम हुए हैं।

पुलिस के वरीय अधिकारियों के अनुसार, अब अफीम की खेती मुख्य रूप से झारखंड से सटे जंगली इलाकों तक रह गई है। इसमें गया के चकरबंधा और धनगई जबकि औरंगाबाद के कुछ इलाके हैं, जहां इस साल बिहार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया है।

ऑपरेशन में मिल रहा लोगों का सहयोग

इस ऑपरेशन में जनसहयोग भी मिल रहा है और आसपास के लोग भी पुलिस को इन अवैध कामों की जानकारी दे रहे हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इन सुदूर जंगली इलाकों से भी नक्सल प्रभाव के साथ अफीम की खेती भी इतिहास की बात हो जाएगी।

इस तरह घट रहा प्रभाव

वर्ष
अफीम की नष्ट फसल
2022-23 1289.60 एकड़
2023-24 2486.70 एकड़
2024-25 812.04 एकड़

ये भी पढ़ें

Bettiah News: देर रात बेतिया पुलिस लाइन में गोलियों की तड़तड़ाहट, सिपाही ने साथी को मारी 12 गोली

Ara News: आरा में जमीन विवाद में हिंसक झड़प और फायरिंग, गायिका हेमा पांडेय के पिता समेत 4 गिरफ्तार