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    Bihar School: सरकार जानेगी शिक्षा व्यवस्था का हाल, 81 हजार सरकारी विद्यालयों को इन मानकों पर मिलेगी रैंकिंग

    Updated: Sun, 08 Dec 2024 02:06 PM (IST)

    बिहार सरकार प्रदेश के 81 हजार विद्यालयों की रैंकिंग कर शिक्षा व्यवस्था का हाल जानेगी। इसके लिए को-करिकुलर एक्टिविटीज स्वच्छता अनुशासन रिसोर्स यूटिलाइजेशन शिकायत निवारण सहित कई मानक निर्धारित किए गए हैं। इन मानको के आधार पर विद्यालयों को अंक दिए जाएंगे।85-100 के बीच अंक लाने वाले टाप विद्यालयों को पांच स्टार मिलेंगे। वहीं 75 से 84 अंक लाने वाले विद्यालयों को चार स्टार दिए जाएंगे।

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    राज्य के 81 हजार विद्यालयों को मिलेगी रैंकिंग

    दीनानाथ साहनी, पटना। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले मार्च में राज्य के सभी 81 हजार विद्यालयों की रैंकिंग कर सरकार शिक्षा व्यवस्था का हाल जानेगी। इसके लिए शिक्षा विभाग द्वारा कई मापदंडों के आधार पर रैंकिंग देने की योजना को अमल में लाने की तैयारी हो रही है।

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    विभाग का कहना है कि राज्य में स्कूली शिक्षा में और बेहतर सुधार लाने का सरकार का यह एक्शन प्लॉन है। इस प्लान के जरिए पहली बार सरकारी विद्यालयों की रैंकिंग करने का अहम निर्णय लिया है।

    इन मानदंडों के आधार पर मिलेगी रैंकिंग

    सरकार के इस फैसले से स्कूली शिक्षा और छात्र-छात्राओं के समग्र विकास पर जोर रहेगा। इसको लेकर सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में सुधार लाने की प्राथमिकता भी दी जाएगी।

    रैंकिंग के लिए तय फार्मेट में शिक्षा, को-करिकुलर एक्टिविटीज, स्वच्छता, अनुशासन, रिसोर्स यूटिलाइजेशन, शिकायत निवारण आदि विशिष्ट मानदंडों को आधार बनाया गया है।

    इसी आधार पर प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के लिए अलग-अलग रैंकिंग की जाएगी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ.एस. सिद्धार्थ ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र लिख कर विभाग के फैसले के बारे में अवगत कराया है।

    पत्र में कहा गया है कि सभी विद्यालयों की रैंकिंग निर्धारित मापदंडों के आधार पर साल में दो बार की जाएगी।

    मार्च और नवंबर में पूरा करना होगा काम

    हर साल मार्च और नवंबर में रैंकिंग कार्य पूरा करना होगा। तय फॉर्मेट में शिक्षा, को-करिकुलर एक्टिविटीज, स्वच्छता, अनुशासन, रिसोर्स यूटिलाइजेशन, शिकायत निवारण आदि विशिष्ट मानदंडों के आधार पर प्राथमिक, माध्यमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के लिए अलग-अलग रैंकिंग की जाएगी।

    सरकार ने यह फैसला नीति आयोग द्वारा स्कूली शिक्षा क्षेत्र में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए विकसित स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स के चलते लिया है।

    इस इंडेक्स का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी ताकत और कमजोरियों की पहचान करने और जरूरी पाठ्यक्रम सुधार या नीतिगत हस्तक्षेप करने के लिए एक मंच प्रदान करके शिक्षा नीति पर परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना है।

    शिक्षकों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट भी अनिवार्य

    शिक्षा विभाग के मुताबिक प्रत्येक विद्यालय की रैंकिंग सौ अंकों की होगी और शिक्षकों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट के लिए यह अनिवार्य भी होगी। इसका उद्देश्य छात्रों को समग्र शिक्षा के लिए गुणवत्ता में सुधार करना है और इसके लिए शिक्षकों की भूमिका सर्वोपरि है।

    टॉप करने वाले संस्थानों का वर्गीकरण करने के लिए विद्यालयों को उनकी रैंकिंग के आधार पर स्टार आवंटित किए जाएंगे, जैसा कि यूजीसी ने कालेजों और विश्वविद्यालयों के लिए किया है।

    नंबर के आधार पर विद्यालयों को मिलेंगे स्टार

    • 85-100 के बीच अंक लाने वाले टाप विद्यालयों को पांच स्टार मिलेंगे।
    • 75 से 84 अंक लाने वाले विद्यालयों को चार स्टार मिलेंगे।
    • 50 से 74 अंक लाने वाले विद्यालयों को तीन स्टार मिलेंगे।
    • 25 से 49 अंक लाने वाले विद्यालयों को दो स्टार मिलेंगे।
    • शून्य से 24 अंक लाने वाले विद्यालयों को एक स्टार दिए जाएंगे।

    विद्यालयों की इस स्टार रेटिंग का उद्देश्य उन्हें आकांक्षी और गुणवत्ता के प्रति जागरूक बनाना है, जिससे छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा देने के लिए बढ़िया माहौल तैयार होगा। इससे कमजोर विद्यालयों को भी आगे बढ़ने और कड़ी मेहनत करने में मदद मिलेगी।

    वे भी इसमें शामिल होंगे और सरकार से अपनी ज़रूरत की मांग करेंगे। इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को सर्वश्रेष्ठ देने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना है।

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