Bihar Bhumi: भूमि सर्वे के बीच जमीन मालिकों को लेकर एक और बड़ा फैसला, नीतीश कैबिनेट ने लगा दी मुहर
बिहार सरकार ने भूमि विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब सभी 927 राजस्व न्यायालयों का आधुनिकीकरण किया जाएगा और यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस परियोजना के लिए 38.12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे शिकायतकर्ता और विभाग दोनों को लाभ मिलेगा। बढ़ी हुई पहुंच के कारण शिकायतकर्ता और गवाह दूर से सुनवाई में भाग ले सकेंगे।

राज्य ब्यूरो, पटना। भूमि विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई अब वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये होगी। यह काम सहजता से हो इसके लिए सभी 927 राजस्व न्यायालयों का आधुनिकीकरण होगा। साथ ही यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सेवा के लिए कंप्यूटर समेत अन्य आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे।
मंगलवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस परियोजना के लिए 38.12 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ ने बताया कि इस पूरी कवायद का मकसद अदालती कार्यवाही की दक्षता और पहुंच बढ़ाना है। जिससे शिकायतकर्ता और विभाग दोनों को लाभ मिले। बढ़ी हुई पहुंच के कारण शिकायतकर्ता और गवाह दूर से सुनवाई में भाग ले सकेंगे। जिससे यात्रा व्यय और समय दोनों की बचत होगी। इसके साथ ही सुनवाई की डिजिटल रिकार्डिंग आसानी से प्राप्त की जा सकेगी।
बक्सर जलापूर्ति योजना के लिए 156.32 करोड़ स्वीकृत
मंत्रिमंडल ने विभिन्न जिलों में स्थापित अनुदानित 626 माध्यमिक विद्यालयों को प्रविधानित संबद्धता मानकों को पूरा करने के लिए एक वर्ष का अवधि विस्तार दिया है। यह विस्तार 31 मार्च 2026 तक के लिए होगा। अमृत 2.0 के तहत बक्सर जलापूर्ति योजना के लिए 156.32 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
अमृत 2.0 के तहत मोतिहारी सिवरेज नेटवर्क परियोजना के लिए कुल 399.87 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। नवादा के पकरीबरावां में बिजली ग्रिड उप केंद्र के निर्माण के लिए 6.27 एकड़ भूमि 5.64 करोड़ लाख के भुगतान पर बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया है।
गुरुगोविंद सिहं सदर अस्पताल, पटना के परिसर के दक्षिणी पूर्वी हिस्से की 11.9 डिसिमील जमीन का उपयोग आम रास्ते के रूप में करने का प्रस्ताव भी मंत्रिमंडल ने स्वीकृत किया है। बिहार स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को लघु, मध्यम एवं अन्य उद्योगों को उचित मूल्य पर कोयला की आपूर्ति के लिए पांच वर्ष के लिए राज्य एजेंसी नामित करने की स्वीकृति।
बिहार आकस्मिकता निधि जो 350 करोड़ है उसे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 मार्च 2026 तक के लिए अस्थायी रूप से बढ़ाकर 10 हजार करोड़ करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत किया गया। मंत्रिमंडल ने शिक्षा विभाग के तहत परामर्शी के दो पदों का सृजन करते हुए दोनों पदों पर बैद्यनाथ यादव व पंकज कुमार को संविदा के आधार पर परामर्शी नियुक्त का प्रस्ताव स्वीकृत।
वित्त विभाग द्वारा गठित सप्तम वित्त आयोग के गठन की घटनोत्तर स्वीकृति। आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार चौधरी को बनाया गया है जबकि अनिल कुमार व कुमुदनी सिन्हा को सदस्य बनाया गया है. आयोग के अध्यक्ष को मंत्री का दर्जा और सदस्य को राज्य मंत्री का दर्जा देने की कैबिनेट ने स्वीकृति दी है।
बिहार कैबिनेट के अन्य निर्णय -
- तबरेज अख्तर प्राध्यापक राजकीय तिब्बी कालेज को अनिवार्य सेवा निवृत्ति देने का निर्णय।
- अनुमंडल अस्पताल बखरी बेगूसराय के डाक्टर रमण राज रमण को लगातार अनुपस्थित रहने के बाद सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव मंजूर।
- बिहार दंत शिक्षा सेवा टयूटर सहित संवर्ग नियमावली 2025 स्वीकृत।
- बिहार औषधि नियंत्रण प्रयोगशाला तकनीकी कर्मी संवर्ग संशोधन नियमावली 2925 के गठन की स्वीकृति।
- मजफ्फरपुर जिला के कुढ़नी में 5.07 एकड़ जमीन पर 100 बेड के कर्मचारी राज्य बीमा निगम अस्पताल के निर्माण की स्वीकृति।
- 2024-25 में राज्य के नगर निकायों के बकाए बिजली बिल के भुगतान के लिए कुल 301 करोड़ की राशि सहायक अनुदान के रूप में खर्च करने की घटनोत्तर स्वीकृति।
- बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 को नई नीति 2025 अधिसूचित होने तक के लिए विस्तार का प्रस्ताव स्वीकृत।
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