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    सच के साथी सीनियर्स: एक्सपर्ट ने बिहारशरीफ में वरिष्ठ नागरिकों को दी फैक्ट चेकिंग की ट्रेनिंग

    Updated: Thu, 20 Mar 2025 11:45 PM (IST)

    सच के साथी-सीनियर्स अभियान के तहत बिहारशरीफ में वरिष्ठ नागरिकों को फैक्ट-चेकिंग की ट्रेनिंग दी गई। कार्यक्रम में डिजिटल फ्रॉड से बचने के तरीके भी बताए गए। जागरण न्यू मीडिया की फैक्ट चेकिंग विंग विश्‍वास न्‍यूज के एक्सपर्ट ने डीपफेक वीडियो और एआई निर्मित तस्वीरों को पहचानने के तरीके बताए। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने सवाल भी पूछे जिनके एक्सपर्ट ने बखूबी जवाब दिए।

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    'सच के साथी- सीनियर्स' अभियान के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए फैक्ट चेकिंग की कार्यशाला का आयोजन।

    जागरण न्यूज नेटवर्क, बिहारशरीफ। 'सच के साथी- सीनियर्स' अभियान का कारवां 20 मार्च को बिहार के बिहारशरीफ पहुंचा।

    जागरण न्यू मीडिया की फैक्ट चेकिंग विंग विश्‍वास न्‍यूज के एक्सपर्ट ने अभियान के तहत कार्यशाला का आयोजन किया, जिसमें फैक्ट चेकिंग के बुनियादी प्रशिक्षण के अलावा डिजिटल फ्रॉड से बचने के तरीके भी बताए गए।

    कार्यक्रम का आयोजन बस स्टैंड के पास स्थित होटल ममता इंटरनेशनल में किया गया। मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत जागरण न्यू मीडिया के सीनियर एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) मयंक कुमार शुक्ला ने की।

    जागरण न्यू मीडिया के सीनियर एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) मयंक कुमार शुक्ला।

    उन्होंने लोगों को डीपफेक वीडियो या एआई निर्मित तस्वीरों को पहचानने के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि डीपफेक वीडियो में अक्सर किसी सेलिब्रेटी का चेहरा अन्य वीडियो पर लगाकर वायरल कर दिया जाता है या फिर किसी की वॉयस क्लोन करके किसी अन्य वीडियो में जोड़ दी जाती है, जिससे वह वीडियो असली लगता है।

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    इन्हें ध्यान से देखकर या सोर्स पर जाकर इनके बारे में पता किया जा सकता है। उन्होंने ओपन सर्च और गूगल लेंस का प्रयोग कर संदिग्ध पोस्ट की जांच करने का तरीका भी बताया।

    इस दौरान विश्‍वास न्‍यूज के एसोसिएट एडिटर एवं फैक्ट चेकर अभिषेक पाराशर ने वहां मौजूद लोगों को डिजिटल सेफ्टी के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि आजकल डिजिटल अरेस्ट के मामले बढ़ रहे हैं। इस तरह की कॉल अक्सर +92 (पाकिस्तान) के नंबर से आती हैं और उन पर पुलिस की वर्दी में किसी शख्स की तस्वीर लगी होती है।

    वे आपसे पहले आपके बेटे या पति का नाम पूछते हैं और फिर उन पर कोई गंभीर आरोप लगाकर वारंट निकलने की बात कहकर डराते हैं। सरकारी एजेंसी इस तरह से कोई जांच नहीं करती है। साथ ही उन्होंने फ्री या सस्ते के लालच में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी।

    कार्यक्रम के अंत में उन्होंने आने वाले चुनाव के लिए सबको जागरूक रहते हुए किसी भी पोस्ट या संदेश को बिना जांचे-परखे आगे फॉरवर्ड न करने की नसीहत दी। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सवाल भी पूछे, जिनके जवाब एक्सपर्ट ने बखूबी दिए।

    21 को पटना में होगा सेमिनार

    पटना के होटल विजय तेज क्लार्क इन में 21 मार्च को इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें एक्सपर्ट लोगों को फैक्ट चेकिंग के बुनियादी प्रशिक्षण के साथ ही डिजिटल सेफ्टी के टिप्स देंगे।

    • तारीख : 21 मार्च
    • समय : 2 बजे से
    • स्‍थान : होटल विजय तेज क्लार्क इन, पटना

    15 राज्‍यों में कार्यक्रम

    बिहार के अलावा महाराष्ट्र, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत कुल 15 राज्यों में इस कार्यक्रम का आयोजन हो चुका है।

    विश्‍वास न्‍यूज इन राज्यों के 50 शहरों में वरिष्ठ और अन्य नागरिकों को मिस-इन्फॉर्मेशन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रशिक्षित कर रही है।

    गूगल न्यूज इनिशिएटिव की पहल पर MICA के सहयोग से विश्वास न्यूज के इस अभियान का उद्देश्य समाज को भ्रामक सूचनाओं से निपटने के लिए तैयार करने के साथ ही उन्हें फैक्ट चेक की बुनियादी जानकारी से रूबरू कराना है।

    इस अभियान के तहत हाइब्रिड (ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से) मोड में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

    'सच के साथी-सीनियर्स' अभियान के बारे में

    'सच के साथी-सीनियर्स' विश्वास न्यूज का जागरूकता के लिए प्रशिक्षण और मीडिया साक्षरता अभियान है। विश्वास न्यूज जागरण समूह की फैक्ट चेकिंग टीम है, जो अब तक करीब छह करोड़ से अधिक नागरिकों को जागरूकता अभियान से जोड़ चुकी है।

    विश्वास न्यूज टीम इंटरनेशनल फैक्ट चेकिंग नेटवर्क (आईएफसीएन) और गूगल न्यूज इनीशिएटिव के साथ फैक्ट चेकिंग और मीडिया लिटरेसी पर 2018 से काम कर रही है।

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