Bihar News: बैंक कर्मचारी मोटी रकम लेकर बेच रहे थे स्टांप, वकील के हाथ लगा मामला; अब कर दी ये मांग
मुजफ्फरपुर के सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक में स्टाम्प बिक्री में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। डीएम के आदेश पर हुई जांच में कर्मचारियों द्वारा बड़ी रकम के लेनदेन की बात सामने आई है। अधिवक्ता अरुण कुमार शुक्ला ने कालाबाजारी का आरोप लगाया था जिसके बाद जांच शुरू हुई। जांच रिपोर्ट में बैंक का ऑडिट कराने की सिफारिश की गई है।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। दी सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक मुजफ्फरपुर से स्टांप की बिक्री में गड़बड़ी की जा रही है। यही नहीं इसमें शामिल कर्मचारियों की ओर से बड़ी राशि का लेनदेन भी किया जा रहा है।
डीएम सुब्रत कुमार सेन के आदेश से हुई जांच में यह बात सामने आई है। एसडीओ पूर्वी अमित कुमार ने डीएम को जांच रिपोर्ट भेजते हुए कार्यालय का औचक निरीक्षण, कर्मचारियों से पूछताछ एवं दी सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक का ऑडिट कराने की अनुशंसा की है।
स्टांपिंग की बिक्री में गड़बड़ी के जांच की मांग
विदित हो कि अधिवक्ता अरुण कुमार शुक्ला ने दी सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक द्वारा ई-कोर्ट एवं ई-स्टांपिंग की बिक्री में गड़बड़ी एवं कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए मामले की जांच का आग्रह डीएम से किया था।
डीएम ने एसडीओ पूर्वी से इसकी जांच कराते हुए रिपोर्ट मांगी थी। दैनिक जागरण ने अप्रैल में मामले की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसमें गड़बड़ी की आशंका जताई गई थी।
साक्ष्य के आधार पर हुई जांच
कार्यपालक दंडाधिकारी एवं अपर निर्वाचन पदाधिकारी पूर्वी राजू कुमार ने मामले की जांच की। इसमें उन्होंने बैंक की प्रबंध निदेशक श्रुति चंद्र बोस एवं कर्मचारियों से जानकारी ली। इसके अलावा अन्य साक्ष्य के आधार पर जांच की।
इसमें उन्होंने पाया कि स्टांप की बिक्री में लगे कर्मचारियों द्वारा बड़ी राशि का लेनदेन किया जा रहा है। यह साक्ष्य कर्मचारियों की ओर से बनाए गए वाट्सएप ग्रुप पर भी पाया गया।
जांच रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि स्टांप की बिक्री में गड़बड़ी भी प्रतीत होती है। इसे देखते हुए बैंक का ऑडिट किया जाए। साथ ही औचक निरीक्षण और कर्मचारियों से पूछताछ की जाए।
वर्ष 2022 से नहीं हुआ ऑडिट
मामले की जांच के दौरान बैंक की प्रबंध निदेशक ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक ऑडिट नहीं हुआ है। इसका निरीक्षण भी नहीं हुआ है। ऑडिट का प्रस्ताव है। इसे शीघ्र करा लिया जाएगा।
आईडी बनाए जाने का बैंक ने किया बचाव
इस मामले में एक और गंभीर आरोप लगाया गया था। इसमें कई वरीय अधिकारियों और कर्मचारियों की जगह ई-कोर्ट एवं ई-स्टांपिंग की बिक्री एक आदेशपाल रवि कुमार की आईडी पर की जा रही है। यह आरोप सत्य पाया गया।
हालांकि प्रबंध निदेशक ने इस निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि आदेशपाल भी एक कर्मचारी ही है। इसलिए उसके नाम से आईडी बनाई गई है।
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