बिजली से दौड़ने वाली ट्रेनों के सौ साल पूरे, केंद्र जारी करेगा 100 रुपये का रंगीन सिक्का
रेल विद्युतीकरण के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार द्वारा 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। 35 ग्राम के सिक्के में 50 प्रतिशत चांदी 40 प्रतिशत तांबा तथा पांच-पांच प्रतिशत निकल और जस्ता का मिश्रण होगा। देश में एसा पहली बार हो रहा है जब कोई रंगीन स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा। इसे लेकर गजट में भी अधिसूचना जारी कर दी है।

गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। भारतीय रेल ने इस वर्ष विद्युतीकरण के 100 वर्ष पूरे होने के साथ अपने ब्राड गेज नेटवर्क के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का कार्य पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि न केवल देश के तकनीकी विकास का प्रतीक है, बल्कि भारत के सतत परिवहन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, ये सिक्का कभी प्रचलन में नहीं आएगा।
16 अप्रैल 1853 को चली पहली ट्रेन
भारत में 16 अप्रैल 1853 को पहली बार ट्रेन चली और तीन फरवरी 1925 को मुंबई के विक्टोरिया टर्मिनस से कुर्ला तक पहली विद्युत ट्रेन पहुंची। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए भारत सरकार 100 रुपये का रंगीन सिक्का जारी करने जा रही है।
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने इस सिक्के को जारी करने के लिए चार मार्च 2025 को गजट में अधिसूचना जारी कर दी है।
100 रुपये के सिक्के में क्या कुछ होगा खास
- 44 मिमी के इस सिक्के का वजन 35 ग्राम होगा, जिसमें 50 प्रतिशत चांदी, 40 प्रतिशत तांबा तथा पांच-पांच प्रतिशत निकल और जस्ता का मिश्रण होगा।
- सिक्के के एक तरफ विद्युतीकरण को दर्शाते हुए ट्रेन इंजन का रंगीन चित्र होगा, जिसके ऊपर की परिधि पर हिंदी में तथा निचली परिधि पर अंग्रेजी में भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण का 100 वर्ष लिखा होगा।
- इस रंगीन चित्र के नीचे वर्ष 1925-2025 लिखा रहेगा। दूसरी तरफ अशोक स्तंभ के नीचे रुपये के प्रतीक चिह्न के साथ मूल्यवर्ग 100 लिखा होगा तथा अशोक स्तंभ के दाएं एवं बाएं हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा में भारत लिखा होगा।
- रेल विद्युतीकरण के सौ वर्ष पर केंद्र द्वारा जारी किया जाने वाला यह सिक्का केवल स्मारक सिक्का होगा और कभी प्रचलन में नहीं आएगा।
सिक्को का संग्रह और अध्ययन करने वाले के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है, जब देश में कोई रंगीन स्मारक सिक्का जारी होने जा रहा है। सुधीर के अनुसार पहले रंगीन स्मारक सिक्के को लेकर भारतीय रेलवे से जुड़े रेल कर्मियों सहित आमजन में भी काफी उत्साह है।
सुधीर लुणावत, मुद्रा विशेषज्ञ
तेजस, राजधानी, संपूर्ण क्रांति को पटना के बजाय मुजफ्फरपुर जंक्शन से चलाने की मांग
सोनपुर मंडल की 'मंडल संसदीय समिति' की बैठक में मुजफ्फरपुर सांसद सह केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी निषाद ने तेजस, राजधानी, संपूर्ण क्रांति ट्रेन को पटना के बजाय मुजफ्फरपुर जंक्शन से चलाने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि पटना से 12 घंटे और मुजफ्फरपुर से 18 से 22 घंटे दिल्ली जाने में लग रहे। यह यात्रियों के साथ नाइंसाफी है, इस पर गौर किया जाए।
इसके साथ ही एक जोड़ी ईएमयू /डेमू रैंक की मुजफ्फरपुर से समस्तीपुर तथा समस्तीपुर से मुजफ्फरपुर फेरी लगाने वाले ट्रेनों को संचालित किया जाए। जिनका ठहराव सभी स्टेशनों पर हो।
कोरोना काल के दौरान बंद 13021/22 (मिथिला एक्सप्रेस) का ठहराव नारायणपुर अनंत, सिलौत, सीहो, दुबहा, खुदीराम तथा कर्पूरीग्राम स्टेशन पर किया जाए। पहले इन स्टेशनों पर रुकती थी।
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