RN Singh Passes Away: अलविदा कह गए जदयू के कद्दावर नेता आरएन सिंह, 85 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
खगड़िया के विकास पुरुष नाम से मशहूर पूर्व विधायक और मंत्री आरएन सिंह का निधन हो गया। 85 वर्ष की आयु में उन्होंने पटना के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। खगड़िया और परबत्ता के विकास के लिए उनके प्रयासों को हमेशा याद किया जाएगा। अगुवानी-अजगैबीनाथ महासेतु के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है।

उपेंद्र, खगड़िया। पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री खगड़िया के ‘विकास पुरुष’ के नाम से प्रसिद्ध आरएन सिंह (रामानंद प्रसाद सिंह) के निधन से जिले में शोक की लहर फैल गई है। उन्होंने शनिवार की रात्रि पटना के मेदांता हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। आरएन सिंह खगड़िया ही नहीं, बल्कि अंग क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखते थे। प
रबत्ता प्रखंड के जोरावरपुर पंचायत स्थित नयागांव- सतखुट्टी निवासी राज्य के पूर्व परिवहन मंत्री रामानंद प्रसाद सिंह लगभग 85 वर्ष के थे। लगभग ढाई दशक तक खगड़िया की राजनीति के आरएन सिंह एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहे। उनकी विद्वता के हर कोई कायल रहे। वे बिहार के सर्वाधिक पढ़े-लिखे राजनेताओं में एक थे।
खगड़िया और परबत्ता के विकास को लेकर वे लगातार प्रयत्नशील रहे। अगुवानी-अजगैबीनाथ महासेतु के निर्माण को लेकर उनके संघर्ष, प्रयास सभी के जेहन में हैं। अभी यह महासेतु निर्माणाधीन है।
उन्होंने परबत्ता विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की विशाल फौज खड़ी की। जदयू नेता आरएन सिंह ने परबत्ता विधानसभा क्षेत्र में विकास की लंबी लकीर खींची। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली आदि क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य सदैव याद रखे जाएंगे।
आरएन सिंह का पॉलिटिकल करियर
बिहार राज्य विद्युत बोर्ड के उप मुख्य अभियंता के पद से त्यागपत्र देकर उन्होंने 1995 में राजनीति में कदम रखा। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस दौरान उन्होंने परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से आठ बार चुनाव लड़ा और पांच बार विजयी रहे। वर्ष 1995 में रामानंद प्रसाद सिंह उर्फ आरएन सिंह भाजपा समर्थित उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और तीसरे स्थान पर रहे। जबकि वर्ष 2000 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे।
2004 में जदयू की टिकट पर लड़ा चुनाव
वर्ष 2004 में परबत्ता विधानसभा के उपचुनाव में आरएन सिंह ने जदयू की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत का परचम लहराया। उसके बाद 2005 के फरवरी तथा अक्टूबर में हुए चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2008 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में परिवहन मंत्री बनाए गए।
2010 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन अगस्त 2014 के उपचुनाव में आरएन सिंह ने एक बार फिर जीत का परचम लहराया। फिर नवंबर 2015 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने शानदार जीत हासिल की। 2020 के चुनाव में उनके छोटे पुत्र डॉ. संजीव कुमार परबत्ता विधानसभा सीट से जदयू की टिकट पर चुनाव लड़े और जीत दर्ज करने में सफल रहे।
अपने पिता की राजनीतिक विरासत को बरकरार रखा। उनके बड़े पुत्र राजीव कुमार एमएलसी हैं। आरएन सिंह विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिथिलेश कुमार ने कहा कि जब रामानंद बाबू पटना मेदांता अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे, तब भी उनके जेहन में परबत्ता ही छाया रहा। उन्होंने अपने पुत्र राजीव कुमार और डॉ. संजीव कुमार से कहा कि जनता की सेवा में लगे रहना। विकसित परबत्ता को सींचते रहना।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।