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    Bihar Politics: किस ओर करवट लेगी किशनगंज की जनता? पीके और ओवैसी की एंट्री से बदल सकते हैं चुनावी समीकरण

    By Chandra SinghEdited By: Piyush Pandey
    Updated: Sun, 11 May 2025 04:39 PM (IST)

    सीमांचल में एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और प्रशांत किशोर के दौरे से चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। किशनगंज जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में ओवैसी की रैलियों में भीड़ महागठबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकती है। वक्फ कानून पर ओवैसी के रुख को अल्पसंख्यक अपना हितैषी मान रहे हैं। एआईएमआईएम दो दर्जन से अधिक सीटों पर जीतने का दावा कर रही है जिससे महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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    खबर की प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    चन्द्र भूषण सिंह, बहादुरगंज (किशनगंज)। आगामी विधान सभा चुनाव में अभी पांच-छह माह बाकी है। परन्तु हाल के दिनों में सीमांचल में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के भ्रमण से चुनावी सरगर्मी तेज हो गयी हैं।

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    खास कर किशनगंज जैसे मुस्लिम बाहुल्य इलाके में एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बहादुरगंज के सभा में समर्थकों का जोश देखने से लगता है कि आगामी बिहार विधान सभा चुनाव में महागठबंधन को परेशानी में डाल सकती है।

    पहलगाम हमले पर जमकर पाकिस्तान को लताड़ा

    ओवैसी अपने भाषण में सर्वप्रथम जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले की निंदा करने एवं बहन-बेटियों के सुहाग उजाड़ने पर भावनात्मक भाषण किये जाने पर कुछ लोगों का नजरिया बदला है। वहीं, वक्फ कानून पर अपना पक्ष जोरदार तरीके से रखने पर अल्पसंख्यक वर्तमान समय उन्हें एक मात्र अपना हितैषी समझ रहे हैं।

    वैसे में सीमांचल के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में दो दर्जन से अधिक सीटों पर जीत का दावा किए जाने से निश्चित रूप से महागठबंधन के नेताओं की कुछ परेशानी अवश्य बढ़ी होगी।

    वहीं, पार्टी नेतृत्व द्वारा किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चम्पारण सहित अन्य मुस्लिम बाहुल्य जिले में अपने प्रत्याशी को उतारने को लेकर रणनीति बनाना शुरू कर दिया गया है।

    समय से पूर्व बहादुरगंज से कांग्रेस के पूर्व विधायक तौसीफ आलम एवं पूर्वी चम्पारण के ढाका से राणा रणजीत सिंह के प्रत्याशी बनाने की घोषणा से पार्टी की तैयारी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    इस बार अधिक सीट जीतने का दावा

    उधर पंतग छाप पर जीते पांच में से चार विधायक को आरजेडी द्वारा अपने पार्टी में शामिल किए जाने पर सख्त नाराज एआईएमआईएम सुप्रीमो ने 4 के बदले 24 से अधिक सीट जीतने का दावा किया।

    इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि किशनगंज जिला के बहादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज और कोचाधामन, अररिया जिला के जोकी, नरपतगंज, रानीगंज, सिकटी, अररिया और फारबिसगंज, पूर्णिया जिला के अमौर बायसी, कसबा, धमदाहा, बनमनखी, पूर्णिया सदर और रूपौली, कटिहार जिला में बलरामपुर, कटिहार, कदवा, प्राणपुर, मनिहारी, बरारी और कोढ़ा सहित पूर्वी चम्पारण के ढाका और अन्य मुस्लिम इलाके में अपना प्रत्याशी उतारेगी।

    ऐसे में ओवैसी की पार्टी यदि वक्फ कानून के बहाने मुस्लिम वोटर को यदि गोलबंद करती है तो महागठबंधन के लिए चिन्ता बढ़ सकती है। ऐसे में एनडीए सरकार को बिहार से हटाने का संकल्प लेकर चलने वाले महागठबंधन के नेता अल्पसंख्यकों का वोट कितना समेट पाएंगे, यह देखने वाली बात होगी।

    उधर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष सह अमौर के विधायक अख्तरूल ईमान के साथ पूर्व विधायक तौसीफ आलम, पूर्व जिला पार्षद अध्यक्ष फैयाज आलम के आने से पहले अपेक्षा पार्टी कार्यकर्ताओ में नया जोश अवश्य आया होगा।

    पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने नहीं खोला पत्ता

    वहीं, कुछ लोग यह कयास लगाने में जुटे हैं कि यदि पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम एआईएमआईएम से जुड़ जाते हैं तो निश्चित रूप से सीमांचल में पार्टी को लाभ मिल सकता है।

    परन्तु अभी तक पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम जदयू से इस्तीफा दिए जाने के बाद अभी तक अपना राजनीतिक पत्ता नहीं खोले हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीति के धुरंधर मास्टर मुजाहिद आलम का आगे क्या निर्णय होता है।

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