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    नेपाल रूट से घुसाये जा रहे बांग्लादेशी, बड़े शहरों में बसाने का प्लान; सरफराज की गिरफ्तारी से खुले कई राज 

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 08:38 AM (IST)

    रक्सौल में तीन बांग्लादेशी नागरिकों और सरफराज अंसारी की गिरफ्तारी ने भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय अवैध घुसपैठ नेटवर्क का खुलासा किया है। नेपाल को आसान ट् ...और पढ़ें

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    भारत–नेपाल सीमा पर तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी। फोटो जागरण

    जागरण संवाददाता, रक्सौल, पूच। भारत–नेपाल सीमा पर तीन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर उस अदृश्य नेटवर्क की ओर इशारा किया है, जो वर्षों से नेपाल को ट्रांजिट रूट बनाकर विदेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराता रहा है।

    यह गिरफ्तारी महज संयोग नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय मानव तस्करी और घुसपैठ तंत्र का संकेत मानी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों के लिए नेपाल सबसे आसान प्रवेश द्वार बन चुका है।

    नेपाल की वीजा नीति अपेक्षाकृत सरल होने के कारण विदेशी नागरिक पहले वहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचते हैं। इसके बाद सीमावर्ती भारतीय जिलों में सक्रिय एजेंट उन्हें बिना भारतीय वीजा के सीमा पार कराते हैं।

    स्थानीय गाइड नेटवर्क की पहली कड़ी

    गिरफ्तार सरफराज अंसारी को इस नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि वह सिर्फ एक गाइड नहीं, बल्कि ऐसे कई लोग हैं, जो सीमावर्ती गांवों में रहकर विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रास्तों से भारत में दाखिल कराते हैं। बदले में मोटी रकम वसूली जाती है।

    सूत्रों का दावा है कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद इन विदेशी नागरिकों को पटना, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती है। वहां उनके ठहरने, काम और पहचान छिपाने तक की योजना बनाई जाती है।

    सीमा सुरक्षा पर गंभीर सवाल

    इस घटना ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि एसएसबी द्वारा नए वर्ष को लेकर विशेष अलर्ट जारी नहीं किया गया होता, तो यह समूह भी आसानी से सीमा पार कर जाता। यह दर्शाता है कि सामान्य दिनों में नेटवर्क कितनी सहजता से सक्रिय रहता है।

    भारत–नेपाल सीमा से पहले भी घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और मानव तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद नेटवर्क का पूरी तरह भंडाफोड़ न होना प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करता है।

    एसएसबी और पुलिस कर रही गहन जांच

    एसएसबी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम मोबाइल डेटा, काल डिटेल, नेपाल में ठहरने के रिकार्ड और भारत में संपर्क सूत्रों की गहन जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नेटवर्क से जुड़े कितने एजेंट अब भी सक्रिय हैं और किन-किन रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है।

    यह मामला केवल चार लोगों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते इस नेटवर्क की जड़ तक नहीं पहुंचा गया, तो सीमावर्ती इलाकों के रास्ते अवैध गतिविधियों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।

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