Motihari News: 32 साल बाद 19 लोगों को उम्रकैद की सजा, मॉब लिंचिंग और हत्याकांड मामले में थे दोषी
मॉब लिंचिग और धारदार हथियार से काटकर और गोली मारकर की गई हत्या के एक मामले में पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार तिवारी ने फैसला सुनाया है। 23 मई 2001 को अभियुक्तों पर न्यायालय ने आरोप गठन किया था। इस मामले में अपर लोक अभियोजक सुभाष प्रसाद यादव ने 11 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर साक्ष्य कराया था।

संवाद सहयोगी, मोतिहारी। पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार तिवारी ने मॉब लिंचिग और धारदार हथियार से काटकर और गोली मारकर की गई हत्या के एक गंभीर मामले में फैसला सुनाया है।
पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार तिवारी इस गंभीर मामले में नामजद 19 अभियुक्तों को दोषी पाते हुए गुरुवार को आजीवन कारावास और प्रत्येक को 55000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। दोषियों को अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
इन्हें हुई सजा
मधुबन थाना के भगवानपुर निवासी बतहु भगत, अशर्फी भगत, विंदेश्वरी भगत, राजेंद्र भगत, शंकर भगत, सीताराम भगत, सोगारथ भगत को सजा सुनाई गई है।
वहीं, मधुबन थाना के ही राजेंद्र भगत, रामचंद्र भगत, विनोद भगत, जनक भगत, भोला भगत, जीत नारायण भगत, बाबूलाल भगत, प्रेमचंद्र भगत, हरि भगत, मधुबन थाना के ही घेघवा निवासी हृदया नारायण भगत, उपेंद्र भगत और मधुबन थाना के ही कोठिया निवासी रामप्रीत भगत को हुई है।
दो दर्जन नामजद लोगों पर प्राथमिकी हुई थी दर्ज
मामले में घेघवा निवासी रामएकबाल राय ने मधुबन थाना कांड संख्या 70/1993दर्ज कराते हुए दो दर्जन लोगों को नामजद और दर्जनों अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
इस मामले में पुलिस के समक्ष दिए गए बयान में कहा था कि 1 अगस्त 1993 की शाम करीब छह बजे खेत से काम करके घेघवा चौक पर पहुंचा तो सुना कि स्थानीय निवासी गुलठुल दास किसी लड़का को अपने मठ में रखे हुए है।
इसको लेकर कुशवाहा लोग हरवे हथियार से लैस होकर एकत्रित हुए हैं। वे घर के तरफ चले तो देखा कि गुलठुल दास उर्फ गुलठुल राय को एकत्रित लोग गाली दे रहे हैं।
शाम करीब 6.45 बजे सभी लोक ललकारा लगाकर के मठ को घेर लिए। गुलठुल राय जान बचाकर घेघवा चौक की तरफ भागा, जहां लोगों ने उसे घेरकर तेज हथियार से हमलाकर और गोलीमार कर हत्या कर दी।
बाद में पता चला कि स्थानीय निवासी हुकुम महतो के पोता को गुलठुल राय पकड़ कर मठ में रखा था। जिसके आक्रोश में लोगों ने उसकी हत्या कर दी। 23 मई 2001 को अभियुक्तों पर न्यायालय ने आरोप गठन की।
विचारण के दौरान नामजद पांच अभियुक्तों की मृत्यु
सत्रवाद संख्या 498/2000 विचारण के दौरान अपर लोक अभियोजक सुभाष प्रसाद यादव ने ग्यारह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कर साक्ष्य कराया। विचारण के दौरान नामजद पांच अभियुक्तों की मृत्यु हो गई।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के दलीलें सुनने के बाद नामजद अभियुक्तों को धारा 302,147,148,201/149 भादवि एवं 27 आर्म्स एक्ट में दोषी पाते हुए उक्त सजा सुनाई।
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