Bihar News: डिजिटल करेंसी से करोड़ों की ठगी, पटना से मधुबनी का युवक गिरफ्तार; ऐसे किया फ्रॉड
साइबर पुलिस ने डिजिटल मुद्राओं के नाम पर करोड़ों की ठगी करने के आरोप में पटना से मधुबनी के नीतेश कुमार झा को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी कंपनी बनाकर लोगों को 24 घंटे में पैसा दोगुना और सात महीने में चार गुना करने का लालच देता था। इससे पहले इस मामले में अजय कुमार राय को भी गिरफ्तार किया गया था जो वेफ्लैक नामक फर्जी कंपनी का निदेशक था।

जागरण संवाददाता, दरभंगा। फर्जी कंपनी बनाकर डिजिटल मुद्राओं से रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाकर करोड़ों की ठगी करने के मामले में साइबर थाने की पुलिस ने गुरुवार को एक आरोपित को पटना से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उपाधीक्षक सह थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने बताया कि तकनीकी इनपुट के आधार पर पटना के कंकड़बाग मोहल्ला में छापेमारी की गई, जहां से मधुबनी जिले के बिस्फी थानाक्षेत्र के नीतेश कुमार झा को दबोच लिया गया।
इस पर फर्जी कंपनी बनाकर टोकन खरीदने पर 24 घंटे में पैसा दो गुना और सात महीने में चार गुणा करने का झांसा देकर ठगी करने का आरोप है। इससे पूर्व, बेगूसराय जिला के चकिया थाना क्षेत्र के अमरपुर निवासी अजय कुमार राय को गिरफ्तार किया गया था, जो वेफ्लैक नामक फर्जी कंपनी बनाकर स्वयं निदेशक बन गया और दरभंगा, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, समस्तीपुर, पटना, बेगूसराय आदि जिलों सहित दूसरे राज्यों में ठगी करने के लिए एजेंट बहाल कर दिया था।
सिंहवाड़ा थानाक्षेत्र के सिंहवाड़ा निवासी विवेकानंद महाराज ने नौ दिसंबर 2023 में जो प्राथमिकी दर्ज कराई थी उसमें एक करोड़ 16 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप था।
विश्वास जीतने के लिए कराया गोवा का टूर:
कंपनी ने निदेशक अजय ने पीड़ितों को एक बार नहीं दो बार ठगी का शिकार बनाया। जब पीड़ित ब्याज के साथ रुपये वापस करने का दबाव देने लगे तो अजय ने सभी को गुमराह कर दिया। कहा- सभी के डालर को दूसरे कंपनी में लगाया गया है। ऐसी स्थिति में फिलहाल, भुगतान संभव नहीं है।
यदि पैसा वापस लेना है तो नई कंपनी वेफ्लैक डाट आईओ में नए रुपये निवेश करना होगा। इसके बाद पुराना राशि भी भुगतान हो जाएगा। लोगों ने लालच में आकर फिर से अपनी जमा राशि को निवेश कर दिया। विश्वास में लेने के लिए अजय ने पीड़ितों को गोवा का टूर भी कराया और गिफ्ट भी दिया।
ठगी के शिकार हुए लोगों को नहीं मिला रुपये:
ठगी के शिकार हुए लोगों को अब तक एक भी रुपये नहीं मिले हैं। अब तक जिन पीड़ितों का नाम सामने आया है उसमें मधुबनी जिला के राजनगर निवासी ममता देवी से 15 लाख, हीरा देवी से दो लाख, मुन्नी देवी से 12 लाख, महेश कुमार राय से तीन लाख, मो. उमर से 02.55 लाख, राजेश कुमार से 15 लाख, मधुबनी जिला के खजौली निवासी अरुण कुमार साफी से 05.50 लाख, रंजीत कुमार यादव से 59 हजार, रणधीर कुमार से 85 हजार, नूर आलम से 24 लाख, जयनगर के अरविंद कुमार से छह लाख, शंकर राय से 24 लाख, पंकज साह से 23 लाख की ठगी की गई है।
वहीं, दरभंगा के कमतौल निवासी पप्पू बैठा से पांच लाख, बहादुरपुर के तारालाही निवासी मिथिलेश कुमार से 01.50 लाख, ओझौल निवासी अशोक साह से 35 लाख, मनीगाछी निवासी संतोष कुमार महासेठ से आठ लाख रुपये लेकर ठगी कर ली। इसके अतिरिक्त 50 से 60 आदमी ऐसे हैं जिनसे लाखों की ठगी की है।
पत्नी सहित कोलकाता की महिला का नहीं मिला सुराग:
करोड़ों की ठगी करने वाले अजय काफी शातिर पाया गया था। वह अपने नाम से दो खाता संचालित करता था। जबकि, पत्नी के नाम एक प्रोडक्ट कंपनी बनाकर उसे निदेशक बना दिया था। जांच में यह बात सामने आई थी कि ठगी के रुपये में पत्नी के खाते का इस्तेमाल किया था। उसके नेटवर्क में एक कोलकाता की भी महिला शामिल है। जो अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर है।
साथ ही जांच में नौ कमीशन एजेंट का नाम सामने आया। इसमें अब तक मात्र एक नितेश की गिरफ्तारी हो पाई है। एजेंट के माध्यम से बड़े होटलों में सेमिनार का आयोजन होता था। इसमें डेढ़ सौ लोगों को शामिल करने का लक्ष्य होता था।
इसमें बाहरी लोग डिजिटल मुद्राओं से रातों-रात अमीर बनाने का सपना दिखाते थे। इसमें सात माह में निवेश किए गए रुपये चार गुणा हो जाने का यकीन दिलाया जाता था। बेहतर भोजन के साथ कीमती गिफ्ट भी दिया जाता था।
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