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    Bhagalpur News: 'साहब मेहरबान तो नर्स पहलवान...', बिना काम किए ले ली लाखों की सैलरी-इंक्रीमेंट

    Bhagalpur News भागलपुर के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्टाफ नर्स प्रतिमा कुमारी बिना काम किए तीन साल में 28 लाख रुपये वेतन और इंक्रीमेंट लेती रही। अस्पताल के कर्मचारियों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ जिसमें फर्जी हाजिरी लगाकर लाखों रुपये निकाले गए। फिलहाल अधीक्षक ने जांच के आदेश दिए हैं।

    By Mihir Kumar Edited By: Sanjeev Kumar Updated: Thu, 24 Apr 2025 04:00 PM (IST)
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    नर्स और डॉक्टर ने बिना काम के ले ली लाखों की सैलरी (जागरण)

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur News: पूर्वी बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में जनता की गाढ़ी कमाई की खुली लूट मची है। डॉक्टर-कर्मचारी सब के सब सरकार के खजाने पर हाथ साफ करने में लगे हैं। डॉक्टर के अटेंडेंस फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद यहां बिना काम किए वेतन-भत्ते के पैसे डकारने के एक नए मामले का पर्दाफाश हुआ है।

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    जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कालेज अस्पताल के पैथोलाजी विभाग, अधीक्षक और मेट्रन कार्यालय के कर्मचारियों की सांठगांठ से स्टाफ नर्स प्रतिमा कुमारी-6 तीन साल तक बिना काम किए वेतन-इंक्रीमेंट (कुल 28 लाख) लेती रही।

    सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि प्रतिमा ने इस दौरान 37 बार तीन-तीन सप्ताह का उपार्जित अवकाश (ईएल) का आवेदन मेट्रन कार्यालय में दिया और इसे स्वीकृत भी कर दिया गया। धोखाधड़ी ऐसी कि यहां एक साल में अधिकतम 31 ईएल के सरकारी नियम को भी ठेंगा दिखा दिया गया।

    वहीं फर्जीवाड़ा की हदें लांघते हुए हर माह प्रतिमा की उपस्थिति बना कर अधीक्षक कार्यालय भेजा जाता रहा और धड़ाधड़ वेतन की निकासी की जाती रही। हालांकि, वर्तमान व्यवस्था में नर्स की हाजिरी दो जगह बनती है।

    लेकिन दोनों जगह सेटिंग कर अधीक्षक की नाक के नीचे लाखों के भ्रष्टाचार किए गए। इधर, मामला सामने आने के बाद अधीक्षक डा. हेमशंकर शर्मा ने संबंधित लिपिकों से शोकाज पूछा है।

    आंख बंद और डिब्बा गायब, बायोमीट्रिक को भी झांसा

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सभी नर्स की हाजिरी सबसे पहले अस्पताल अधीक्षक कार्यालय के बाहर बायोमीट्रिक पर बनती है। फिर नर्स संबंधित विभाग में जाकर पंजी में हाजिरी बनाती हैं। ऐसे में वेतन बनाने से पहले दोनों हाजिरी का मिलान किया जाता है।

    कौन कितने दिन अवकाश पर है, इसकी सूचना भी अंकित की जाती है। लेकिन प्रतिमा-6 के मामले में अधीक्षक कार्यालय के लिपिक ने आंख बंद और डिब्बा गायब वाला खेल कर दिया। तीन साल तक ऐसा किसकी शह पर किया गया, उसे कितनी हिस्सेदारी मिली, यह भी जांच का विषय है। बताया गया कि वेतन बनाने के बाद लिपिक अधीक्षक के हस्ताक्षर से इसे जारी कराता है।

    इसके बाद सभी को बैंक खाते में सैलरी भेज दी जाती है। जबकि नियम के मुताबिक कम से कम तीन अधिकारियों को जारी किए जा रहे वेतन की जांच करनी होती है। लेकिन, इस अस्पताल में सभी कायदे-कानून को धत्ता बताया जा रहा है।

    पूर्व अधीक्षक भी जांच की जद में, दी थी दो वेतनवृद्धि

    इस मामले में अस्पताल के दो पूर्व अधीक्षक डा. उदय नारायण सिंह एवं डा. राकेश कुमार भी जांच की जद में आ गए हैं। इन दोनों के कार्यकाल में प्रतिमा-6 लगातार ड्यूटी से गायब रही। अस्पताल के सर्वेसर्वा होने के बावजूद इसकी जानकारी इन दोनों अधिकारियों को न हो, यह कतई संभव नहीं दिख रहा। इतना ही नहीं इन दोनों अधीक्षकों ने प्रतिमा-6 को दो बार सेवा लाभ और वेतनवृद्धि भी दे दी।

    बताया गया कि डा. राकेश ने उसे जो इंक्रीमेंट दिया उसका लाभ अभी नहीं मिला है। वहीं वर्तमान अस्पताल अधीक्षक इस बात की जांच में लगे हैं कि प्रतिमा को कुल कितना अवकाश मिलना चाहिए था। इसके बदले उसने कितना अवकाश लिया। वहीं आगे की कार्रवाई लिपिक के शोकाज के जवाब आने के बाद करने की बात कही जा रही है।

    गजब की व्यवस्था, अवकाश में भी बनता रहा वेतन

    इस मामले में प्रथमदृष्टया वेतन-उपस्थिति बनाने वाले कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आ रही है। बड़ा सवाल यह कि अवकाश में रहने पर भी आखिर कौन और कैसे पैथोलाजी विभाग की उपस्थिति पंजी में प्रतिमा-6 की हाजिरी बना रहा था। क्या मेट्रन कार्यालय ने उसके पिछले बार-बार अवकाश पर जाने की जानकारी अधीक्षक कार्यालय को दी गई। तीन साल से ड्यूटी से गायब होने पर आखिर अधीक्षक ने संज्ञान क्यों नहीं लिया। उसे वेतन देने के साथ ही इंक्रीमेंट क्यों दिया गया?

     इस मामले में लीपापोती का कोई सवाल नहीं है। तीन साल छुट्टी में रहकर कैसे वेतन लिया गया, इसकी गहन जांच हो रही है। इसके लिए जांच टीम का गठन कर दिया गया है। जो भी इसमें दोषी होंगे उन पर कठोर कार्रवाई होगी। डा. हेमशंकर शर्मा, अस्पताल अधीक्षक

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