विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 16, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhath Puja 2023: महापर्व छठ कब से शुरू होगा? क्या है नहाय खाय, सूर्य पूजन व अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त

By UPENDRA KASHYAPEdited By: Mohit Tripathi
Published: Thu, 16 Nov 2023 06:28 PM (IST)

Chhath Puja 2023 चार दिनों तक मनाए जाने वाले महापर्व छठ की शुरूआत शुक्रवार से हो रही है। व्रत शुक्रवार ...और पढ़ें

शुक्रवार से शुरू हो रहा महापर्व छठ ।
शुक्रवार से शुरू हो रहा महापर्व छठ ।

HighLights

  1. 05.36 बजे से पहले अर्घ्य देकर व्रत का करें पारण।
  2. चार दिवसीय छठ आज से आरंभ, घर से बाजार तक तैयारी।

संवाद सहयोगी, दाउदनगर (औरंगाबाद)। चार दिनों तक मनाए जाने वाले महापर्व छठ की शुरूआत शुक्रवार से हो रही है। छठव्रती छठ पूजा को लेकर अपनी तैयारियों में जुट गए है। सुबह से लेकर शाम तक बाजारों में रौनक दिखाई दे रही है। व्रतधारी पूजा के लिए आवश्यक सामाग्रियों की तैयारी में जुट गए हैं।

लोग नहाय खाए से पहले गेहूं की सफाई और धुलाई में जुटे हैं। इसकी पिसाई आमतौर पर लोग जाता चक्की में नहाए खाए के दिन करते हैं। इसे लेकर घरों में छत पर गेहूं धोकर व्रत करने वाली महिलाओं ने सुखाया।

शुद्धता का खास ध्यान रखते हुए किसी न किसी को सूखाते हुए गेहूं की निगरानी में तैनात रखा, ताकि कोई पशु, पंक्षी, कीड़ा, मकोड़ा उसे अपवित्र न करे।

शुक्रवार को बरौना से शुरू होगा महापर्व

व्रत शुक्रवार को बरौना अर्थात नहाय खाय से प्रारंभ हो रहा है। दूसरा दिन शनिवार को लोहंडा (खीर रोटी का प्रसाद सूर्यास्त के बाद चंद्रोदय काल में खाने का प्रचलन), तीसरा दिन रविवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं, अंतिम और चौथे दिन सोमवार को उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाता है।

11.38 बजे तक कर लें नहाय खाय बरौना 

कर्मकांडी आचार्य लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि शुक्रवार को चतुर्थी दिन 11.38 बजे तक नहाय खाय बरौना कर लेना चाहिए।

शनिवार संध्या 05.22 बजे के बाद रात्रि 09.42 बजे से पहले तक महाप्रसाद ग्रहण कर लेना चाहिए। बताया कि अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य रविवार को 05.22 बजे करना है।

सोमवार को 05.36 बजे से पहले अर्घ्य देकर संपन्न करें व्रत

पारण सोमवार को अरुणोदय काल (सूर्योदय से पहले जब लालिमा छाया हुआ होता है) 05.36 बजे से पहले अर्घ्य कर पारण कर व्रत संपन्न करें। सप्तमी मिला हुआ छ्ठ व्रत करने का विशेष महत्व है। रविवार होने के कारण इसकी महत्ता और बढ़ गई है।

यह भी पढ़ें: आखिर कब रुकेगी तस्करी? शराबबंदी वाले बिहार में लिकर की भरमार, हर माह पकड़ी जा रही 22 कंटेनर दारु; ये रही चौंकाने वाली रिपोर्ट