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नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रचार-प्रसार पर तेजी के बीच सरकार ने ऑटो कंपनियों को बड़ी राहत दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल चालित वाहनों की जगह ई-वाहन को पूरी तरह अपनाने को लेकर कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की है। नीति आयोग द्वारा दोपहिया और तिपहिया वाहन कंपनियों को इलेक्ट्रिक वाहन अपना लेने के लिए दी गई समय-सीमा को देखते हुए अधिकारी का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण है।

नीति आयोग ने इस वर्ष जून में ऑटो कंपनियों से कहा था कि वे तिपहिया वाहनों को वर्ष 2023 तक और 150-सीसी क्षमता वाले दोपहिया वाहनों को वर्ष 2025 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के लिए दो सप्ताह के भीतर कार्य-योजना पेश करें। दोपहिया वाहन क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों ने इसका तीखा विरोध किया था। उनका कहना था कि उद्योग से सलाह-मशविरा किए बगैर इस तरह की समय-सीमा तय करना अवांछित है। इससे उद्योग को गहरा धक्का लगेगा और लाखों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। अब अधिकारी ने कहा है कि सरकार ने इस तरह की कोई समय-सीमा तय नहीं की है।

वाहन उद्योग संगठन FADA ने कहा था कि वाहन क्षेत्र पिछले कुछ महीनों से सुस्ती का सामना कर रहा है। बिक्री में सुस्ती के असर को कम करने के लिए पिछले तीन महीनों में वाहन डीलरों ने लगभग दो लाख नौकरियां खत्म की हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तंत्र से सरकार अगले पांच वर्ष में 40 हजार करोड़ का निवेश और 50 हजार रोजगार के अवसर विकसित करना चाहती है। वैसे तो सरकार ने लक्ष्य निर्धारित 2024 तक किया है कि पारंपरिक वाणिज्यिक बेड़े और रसद वाहनों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। सार्वजनिक परिवहन में 2030 तक एक हजार इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना है। दस शहरों के निजी परिवहन में 2024 तक पचास फीसद इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन शुरू किया जाना है।

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Posted By: Ankit Dubey

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