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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 06, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चार वर्ष पहले भी सोनम में बनी थी झील

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Published: Tue, 06 Sep 2016 01:00 AM (IST)

जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी : यह पहला मौका नहीं है जब सोनम नदी पर झील बनी हो। करीब चार वर्ष पहले भी इ

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जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी : यह पहला मौका नहीं है जब सोनम नदी पर झील बनी हो। करीब चार वर्ष पहले भी इसी स्थान पर भारी भूस्खलन से झील बनी थी, हालांकि तब तेज बहाव में मलबा बहने के बाद झील का अस्तित्व भी विलीन हो गया।

गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक श्रवण कुमार ने बताया कि सोनम नदी के आसपास की पहाड़ियों पर बादल फटने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इससे पहाड़ का मलबा सीधे नदी में गिरता है और बहाव का अवरुद्ध कर देता है।

दरअसल, ट्रांस हिमालय में सुमला व मेंडी से निकलने वाले दो नाले मिलकर सोनम नदी के तौर पर जाने जाते हैं। सर्दियों में यहां जबरदस्त बर्फबारी होती है। गर्मियों में जब यह बर्फ पिघलती है तो इन नालों में उफान आ जाता है, जो बारिश में खौफनाक रूप धर लेते हैं। पीडीए कैंप के पास इन नालों का संगम हो जाता है। यहीं से सोनम आकार लेती है। यहां से सोनम त्रिपानी कैंप होकर सुमला कैंप पहुंचती है। इस बीच इसमें अंगार और त्रिपानी नाला भी इसमें मिलता है। सुमला कैंप के बाद नागा कैंप आता है यहां नागा के निकट सोनम नदी व जादूंग गांव से आने वाली जाह्नवी नदी का संगम होता है। संगम से नदी का नाम जाड़ गंगा हो जाता है, जो आगे चलकर भैरव घाटी के पास भागीरथी में मिल जाती है।

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45 साल पहले चमोली में मचाई थी गौणाताल ने तबाही

गोपेश्वर : वर्ष 1960 बने चमोली जिले का जिला मुख्यालय चमोली कस्बे में ही था, लेकिन एक हादसे ने यहां की तस्वीर बदल दी। 1971 में गौंणा ताल के फटने से बेलाकुची की बाढ़ आई। इस बाढ़ में चमोली कस्बा तबाह हो गया। उस दौरान बाढ़ के चलते कई लोगों व मवेशियों की भी मौत हुई थी। बेलाकुची की बाढ़ के बाद 1971 में जिला मुख्यालय चमोली कस्बे से हटाकर गोपेश्वर शिफ्ट किया गया। चमोली के इतिहास पर कार्य कर चुके पत्रकार रमेश पहाड़ी बताते हैं कि निजमूला घाटी में ब्रिटिश शासन काल में एक बहुत बड़ी झील थी। जिसे गौणा ताल नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश लोग गौंणा में आकर इस ताल में नौकायन भी करते थे। किंतु वर्ष 1971 में पहाड़ से हुए भूस्खलन से जबरदस्त मलबा ताल में गिरा तो ताल ध्वस्त हो गया। इस बाढ़ का असर ऋषिकेश तक रहा।

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