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    कॉर्बेट लैंडस्केप में सुधारे जाएंगे वन्यजीव वासस्थल, ग्रासलैंड होंगे विकसित

    By Raksha PanthariEdited By:
    Updated: Sat, 25 Nov 2017 08:54 PM (IST)

    अब कॉर्बेट लैंडस्केप के जगलों में वनय जीवों के रहने की जगह को और अधिक अनुकूल बनाया जाएगा। साथ ही आठ जगहों पर ग्रासलैंड विकसित किया जाएगा।

    कॉर्बेट लैंडस्केप में सुधारे जाएंगे वन्यजीव वासस्थल, ग्रासलैंड होंगे विकसित

    रामनगर, [जेएनएन]: कॉर्बेट लैंडस्केप के जंगलों में वन्यजीवों के वास स्थल अधिक अनुकूल बनाए जाएंगे। विशेषज्ञों की मदद से रामनगर वन प्रभाग में आठ स्थानों पर सघन ग्रासलैंड विकसित करने का काम शुरू कर दिया गया है। 

    जंगल में ग्रासलैंड ही हिंससक वन्य जीवों के छिपने, सोने व शिकार करने के अलावा चीतल सांभर, पाड़ा, हाथियों के चारे व रहने के लिए उपयुक्त जगह होती है। कॉर्बेट लैंडस्केप के रामनगर वन प्रभाग में जो ग्रासलैंड हैं, उनमें कई तरह की खरपतवार भी है। जो दूसरी प्रजाति के चारे को उगने नहीं देती है। ऐसे में चीतल, सांभर, पाड़ा व हाथियों को चारा नहीं मिल पाता है। यह खरपतवार वन्य जीवों की पंसदीदा प्रजाति के चारे के उगने में बाधक बनी है। ग्रासलैंड से खरपतवार हटाने व वन्य जीवों की निर्भरता वाली घास लगाने के लिए इन दिनों मध्यप्रदेश से वनस्पति विशेषज्ञ मुरातकर पहुंचे हैं। मुरातकार मध्यप्रदेश, उड़ीसा व छत्तीसगढ़ में बेहतर ग्रासलैंड विकसित कर चुके हैं। रामनगर वन प्रभाग यहां भी उनकी मदद ले रहा है। उन्होंने फील्ड कर्मियों को ग्रासलैंड विकसित करने से संबंधित जानकारियां दी। 

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    यह है खरपतवार 

    लैंटाना, गाजर घास, काला बासा, वन तुलसी, पाती अधिकांश क्षेत्रों में फैली है। इस चारे को वन्य जीव नहीं खाते हैं। जबकि ग्रासलैंड में खस, दूब, गोरिया, कुमेरिया, फिरकिरी, बाबड़, पेनीकम, कांस, कुस घास लगाने की तैयारी चल रही है। 

    इन स्थानों पर विकसित होंगे ग्रासलैंड 

    कोसी रेंज में जमनिया चौड़, कोटा रेंज में चौफला, भंडार पानी, कालीगाड़, कुंआचौड़, देचौरी रेंज में हाथी गलियार, सांदनी चौड़, कालाढूंगी में ढापला। 

    डीएफओ नेहा वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों को मध्यप्रदेश के विशेषज्ञ द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कर्मचारियों को बताया जा रहा है कि किस महीने में कौन सी खरपतवार हटानी है। कब उसे लगाना चाहिए। साथ ही घास को पहचानने व कौन सी घास किस जानवर के लिए है, कौन सा क्षेत्र किस घास के लिए बेहतर है, इसकी जानकारी दी जा रही है। 

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