14 घंटे रेंगकर पूरा किया पहाड़ियों का सफर
जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: भानमल गेंहू की मशीन में एक हाथ कटवा बैठा था। इस हालत में भी केदारघाटी में आई आपदा के बीच भानमल ने पत्नी सोनी देवी के साथ 14 घंटे पथरीली पहाड़ियों पर बैठकर और रेंगकर सफर तय किया। कई बार उनका हौसला कमजोर पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे टूटने नहीं दिया और उनका यही हौसला आज यह सब मंजर बयां करने के लिए उन्हें जिंदा रखे है।
लसडावन लिमबाड़ा जिला चित्तौड़ राजस्थान निवासी भानमल और उनकी पत्नी सोनी देवी 15 जून को केदारनाथ के दर्शन करने के बाद गौरीकुंड आ गए थे। बाबा केदार के दर्शन के बाद उनका मन काफी प्रसन्न था। बाबा केदार के दर्शनों की मुराद जो पूरी हो गई थी। लेकिन, इसके बाद जो हुआ वह यह दंपती ताउम्र नहीं भूला सकते। इस दंपती की बुजुर्ग आंखें भी केदार घाटी में हुए प्रलय को कैद किए हुए है। भानमल का हालांकि एक हाथ कटा है, मगर हिम्मत पूरी है।
इस उम्र में भी शरीर की अपंगता ने भानमल के इरादों को नहीं तोड़ा। यही कारण है कि भानमल व उनकी पत्नी सुरक्षित ऋषिकेश पहुंचकर रिलीव सेंटर में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। भानमल के मुताबिक 16 जून की सुबह पांच बजे जब जमकर पानी बरसने लगा तो चारों तरफ तबाही का मंजर था। इसे देखते ही उनके रोंगटे खड़े हो गए। अपनी पूरी जिंदगी में उन्होंने ऐसी प्रलय नहीं देखी।
मकान घरौंदों की तरह पानी में बह रहे थे। इसमें रह रहे लोग भी पानी में समाते दिखे। गाड़ियां भी पानी के साथ बह रही थी। बरसते पानी में मैं पत्नी के साथ पहाड़ी की ओर भागा। तीन रात और दो दिन पहाड़ी में ही बिताए। इस दौरान खाने को कुछ नहीं था। भूखे प्यासे ही वहां जान की सलामती के लिए बैठे रहे। जब वापस लौटे तो पुलिया टूट चुकी थी।
16 व 17 जून को 14 घंटे पहाड़ी से पहाड़ी चलते रहे। इसे चलना भी नहीं कहा जाएगा, बल्कि खाई में गिरने का डर था। इसलिए सरक-सरक कर कभी कोहनी के बल तो कभी बैठकर 14 घंटे का सफर तय किया। भानमल के मुताबिक किसी तरह गौरीगांव पहुंचे, जहां दो रात थाने में बिताई। गौरीगांव से हेलीकाप्टर ने हमें गुप्तकाशी तक छोड़ा। वहां से गाड़ी में बैठकर ऋषिकेश पहुंचे।
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