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    संस्कृत भाषा को बचाने पर दिया जोर

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    Updated: Sat, 05 Mar 2016 05:35 PM (IST)

    संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में संस्कृत भाषा के

    संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार पर जोर दिया गया। साथ ही भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए भी कार्य करने की बात कही गई।

    श्री 1008 स्वामी सचिदानंद सरस्वती संस्कृत महाविद्यालय मंडल में उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से मासिक कर्मकांड व पौरोहित्य प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। शिविर का समापन राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित व संस्कृत अकादमी हरिद्वार के नामित सदस्य आचार्य सुरेशानंद गौड़ ने किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी पौराणिक भाषा रही है। मगर आज इसके प्रचार-प्रसार में कमी के कारण लोग संस्कृत को भूलते जा रहे हैं। कहा कि यदि हमें अपनी प्राचीन संस्कृति को बचाना है तो इसके लिए संस्कृत भाषा का संरक्षण भी करना होगा। विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर तिवारी ने भी संस्कृत भाषा को बचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.ओमप्रकाश डिमरी, जपी नौटियाल, जगदीश प्रसाद सेमवाल, भोलादत्त सती, कृष्णानंद पंत समेत कई लोग शामिल थे।

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