विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रामगंगा नदी को बचाने की कवायद तेज

By JagranEdited By:
Published: Tue, 23 May 2017 06:38 PM (IST)

संवाद सहयोगी, चौखुटिया: बीते कुछ वर्षो से पश्चिमी रामगंगा नदी का जलस्तर साल-दर-साल तेजी से घट रहा है

रामगंगा नदी को बचाने की कवायद तेज
रामगंगा नदी को बचाने की कवायद तेज

संवाद सहयोगी, चौखुटिया: बीते कुछ वर्षो से पश्चिमी रामगंगा नदी का जलस्तर साल-दर-साल तेजी से घट रहा है। ऐसे में नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए रामगंगा सेवा समिति ने जनचेतना जागृत करने हेतु एक मुहिम शुरू की है। इसके तहत प्रथम चरण में समिति की टीम ने रामगंगा नदी, उससे जुड़े जल स्रोतों व गाड़-गधेरों का दो दिन तक धरातलीय सर्वे कर घटते जलस्तर के कारणों का अध्ययन किया। टीम का दृढ़ मत है कि नदी को बचाने के लिए सभी को मिलकर सघन व विस्तृत अभियान चलाना होगा।

पश्चिमी रामगंगा नदी का मुख्य उद्गम स्थल चमोली जनपद के गैरसैंण विकास खंड अंतर्गत रामनाली स्थान के पास एक जलस्रोत के रूप में है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम इस स्थान से गुजर रहे थे, तब सीता की प्यास बुझाने के लिए लक्ष्मण ने यहां तीर मारकर जलधारा उत्पन्न की। यही धारा आगे बढ़कर कई अन्य जल धाराओं व गधेरों को मिलाकर पश्चिमी रामगंगा नदी कहलाने लगी।

इधर नदी के अस्तित्व को खतरे के मद्देनजर रामगंगा सेवा समिति के छह सदस्यीय टीम ने नदी व उससे जुड़े गधेरों व जल स्रोतों का उद्गम स्थान रामनाली गैरसैंण से लेकर चौखुटिया तक सघन स्थलीय सर्वे किया। इस दौरान टीम ने आम लोगों से संवाद कर पाया कि गत एक दशक से जलस्रोत, गधेरे व नालों में पानी की मात्रा कम हुई है। चूंकि रामगंगा नदी जलस्रोतों पर आधारित है, ऐसे में नदी का जलस्तर भी तेजी से घटा है।

सर्वे के बाद टीम लीडर डा. कुलदीप बिष्ट व लीलाधर मठपाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के साथ साथ जंगलों की आग, जल स्रोतों से छेड़छाड़, चीड़ की बेतहाशा वृद्धि, पेड़ों का अवैध कटान, नदी व गाड़ गधेरों में खनन, मानव का प्रकृति के प्रति बढ़ती उदासीनता व योजनाओं के नाम पर सीमेंट का बढ़ता प्रयोग आदि कारणों से जलस्तर में कमी आई है। जो भविष्य के लिए खतरा है।

द्वितीय चरण में समिति सघन जनजागरण अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करेगी एवं उन्हें स्रोतों के आसपास पौधरोपण खाल-खंतियों का निर्माण कर बरसाती पानी को एकत्रित करने, पानी की बर्बादी रोकने व नदी में हो रहे अवैध खनन को रोकने की दिशा में सचेत करेगी। जलधारा को बचाना ही समिति का संकल्प है। टीम में प्रधान जीवन नेगी, मनोहर तिवारी व बीरेंद्र बिष्ट आदि थे।