लखनऊ के पार्क रोड पर भी है शीला दीक्षित का आवास
शीला दीक्षित की जड़ें उत्तर प्रदेश में बहुत गहरी हैं। उन्नाव में जहां उनकी ससुराल है, वहीं प्रदेश की राजधानी के पार्क रोड पर उनका निवास भी है।
लखनऊ(अजय श्रीवास्तव)। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री व उत्तर प्रदेश से कांग्रेस की मुख्यमंत्री उम्मीदवार शीला दीक्षित की जड़ें उत्तर प्रदेश में बहुत गहरी हैं। उन्नाव में जहां उनकी ससुराल है, वहीं प्रदेश की राजधानी के पार्क रोड पर उनका निवास भी है।
लखनऊ से उनका पुराना नाता रहा है। खास बात यह है कि उनका पुराना आवास प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास पांच कालिदास से एक किलोमीटर से कम ही दूरी पर है।
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हजरतगंज चौराहे से चंद कदम पर पार्क लेन में यह आवास है। हालांकि लंबे समय से अपने आवास पर वह नहीं आईं, लेकिन उनके रिश्तेदार यहां आकर ठहरते रहते हैं। जलकल का बिल भी शीला दीक्षित के नाम से ही जारी होता है। आवासीय सोसायटी का रखरखाव शुल्क रजिस्टर में भी शीला दीक्षित का नाम दर्ज है।
ऐसे में अब शीला दीक्षित को प्रदेश की राजनीति करने के लिए लखनऊ में ठिकाना नहीं तलाशना पड़ेगा। इस दौरान घर से आते-जाते समय भी हमेशा मुख्यमंत्री आवास का रास्ता भी नजर आएगा, जहां रहने की उम्मीद लेकर वह वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में उतरने आईं हैं।
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पार्क रोड में एलडीए की पार्क लेन कॉलोनी में उनका आवास डी-4 में है। ऊपरी मंजिल में यह फ्लैट है। हालांकि म्यूटेशन न होने से नगर निगम में अभी सचिव विकास प्राधिकरण के नाम पर डिमांड है और जिस पर 42 हजार रुपये का भवन कर बकाया है। पार्क लेन आवासीय सोसायटी के कोषाध्यक्ष जे गोडिन कहते हैं कि उक्त आवास शीला दीक्षित का है।
ससुर ने खरीदा था आवास
पार्क लेन कॉलोनी नगर महापालिका ने 1964 के आसपास बनाई थी। बाद में नगर महापालिका से एलडीए के अधीन यह कॉलोनी आ गई थी।
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पहले कॉलोनी में किराए पर आवास दिए गए और बाद में उन्हें बेच दिया गया। यह आवास पहले शीला दीक्षित के ससुर के नाम था और उनकी मौत के बाद पति के नाम दर्ज हो गया। पति की मौत के बाद आवास शीला दीक्षित के नाम दर्ज हो गया था।
रामप्रकाश गुप्त भी यहां रहते थे
भाजपा शासनकाल में मुख्यमंत्री रहे रामप्रकाश गुप्ता का भी आवास पार्क लेन में है।
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जब वह मुख्यमंत्री बने थे, उस वक्त भी वह पार्क लेन के आवास पर ही थे, लेकिन उनकी मौत के बाद आवास बेटे के नाम दर्ज हो गया था। इस लिहाज से शांत दिखने वाले पार्क लेन में राजनीति की हलचल पहले भी रहती थी और संभावना जताई जा रही है कि शीला दीक्षित के आने के बाद यहां कांग्रेसी हलचल तेज होगी।
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