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    आरएसएस के स्कूल बना रहे मुस्लिम बच्चों का भविष्य

    By Ashish MishraEdited By:
    Updated: Wed, 22 Jun 2016 05:07 PM (IST)

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शैक्षिक अंग विद्या भारती की ओर से प्रदेश में संचालित स्कूलों में नौ हजार मुस्लिम बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं।

    लखनऊ। इसे इल्म हासिल करने की भूख कहें या समय के साथ टूटती पूर्वाग्रह की सामाजिक जकडऩ मगर यह सच है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शैक्षिक अंग विद्या भारती की ओर से प्रदेश में संचालित स्कूलों में नौ हजार मुस्लिम बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं। सरस्वती शिशु मंदिरों और सरस्वती विद्या मंदिरों के यह विद्यार्थी सुबह होने वाली प्रार्थना सभा में वंदे मातरम् गाते हैं तो दोपहर में भोजन से पहले भोजनमंत्र भी उच्चारित करते हैं।

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    प्रशासनिक दृष्टि से विद्या भारती ने प्रदेश को दो हिस्सों में बांट रखा है। पूर्वी उप्र के 49 जिलों में विद्या भारती की ओर से संचालित 1194 विद्यालयों में 6940 मुस्लिम विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। वहीं पश्चिमी उप्र के 26 जिलों में संस्था के स्कूलों में तकरीबन दो हजार मुस्लिम छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनमें से ज्यादातर मुस्लिम बच्चे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ते हैं। कुछ वर्षों में सरस्वती शिशु मंदिरों और विद्या मंदिरों में मुस्लिम विद्यार्थियों की आमद बढऩे का दावा करने वाले विद्या भारती के पश्चिमी उप्र के क्षेत्रीय मंत्री बालकृष्ण त्यागी कहते हैं कि इसकी मुख्य वजह हमारे स्कूलों की अच्छी पढ़ाई है। उन्होंने कहा कि यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में पहले 40 स्थान पर रहने वाले मेधावियों में 25 से 30 विद्यार्थी सरस्वती विद्या शिशु मंदिर के होते हैं। वहीं हाईस्कूल परीक्षा के टॉप 60 मेधावियों में लगभग दो-तिहाई हमारे विद्यालयों के छात्र-छात्राएं होते हैं। हाईस्कूल व इंटर में हमारे विद्यालयों का परीक्षाफल शत-प्रतिशत होता है। ज्यादातर बच्चे प्रथम श्रेणी में पास होते हैं। बड़ी बात है कि सरस्वती शिशु और विद्या मंदिरों के बच्चे अनुशासित होते हैं। गर्व से बताने से नहीं चूकते कि असम की दसवीं की बोर्ड परीक्षा में हमारे स्कूल के छात्र सरफराज हुसैन ने ही टॉप किया था।

    त्यागी कहते हैं कि राष्ट्रवाद को समर्पित आरएसएस कोई सांप्रदायिक संगठन नहीं है। जैसे-जैसे विद्या भारती के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी, समाज के हर संप्रदाय और वर्ग का उनके प्रति विश्वास बढ़ा। आरएसएस के संरक्षण में चल रहे इन स्कूलों से मुस्लिमों की बढ़ती नजदीकी को वह इसी नजरिये से देखते हैं। मुस्लिम छात्रों की बढ़ती आमद को देखते हुए ही विद्या भारती ने मुस्लिम शिक्षकों की नियुक्ति भी शुरू की है। पूर्वी उप्र क्षेत्र के स्कूलों में आठ मुस्लिम शिक्षक हैं जिनमें तीन पुरुष व चार महिलाएं हैं। त्यागी कहते हैं कि मुस्लिमों में पर्देदारी को देखते हुए हम प्रधानाध्यापकों से कहते हैं कि अध्यापक संपर्क कार्यक्रम के तहत जब शिक्षक मुस्लिम बच्चों के घर जाएं तो उनमें महिला शिक्षक जरूर शामिल हों।

    हालांकि हाल के वर्षों में सरस्वती शिशु मंदिरों और सरस्वती विद्या मंदिरों में मुस्लिम बच्चों की संख्या बढऩे के बारे में विद्या भारती के पदाधिकारियों के बयान परस्पर विरोधाभासी हैं। पूर्वी उप्र के क्षेत्रीय मंत्री रामकृष्ण चतुर्वेदी का कहना है कि मुस्लिम बच्चे कमोवेश काफी अरसे से सरस्वती शिशु और विद्या मंदिरों में पढ़ाई के लिए आते रहे हैं। हाल के वर्षों में उनकी संख्या में कोई उल्लेखनीय वृद्धि हुई हो, ऐसा नहीं है। वहीं विद्या भारती के मूल्यांकन एवं प्रशिक्षण प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक राजेंद्र सिंह बघेल का कहना है कि मुस्लिम बच्चों को आकर्षित करने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किये जा रहे हैं।