कम्युनिटी पुलिसिंग से मजबूत करेंगे सांप्रदायिक सद्भाव
लखनऊ(जागरण ब्यूरो)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों ने यूपी पुलिस को सबक दिया है।
लखनऊ(जागरण ब्यूरो)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक दंगों ने यूपी पुलिस को सबक दिया है। सांप्रदायिक सद्भाव का ताना-बाना मजबूत करने के लिए पुलिस महानिदेशक देवराज नागर ने कम्युनिटी पुलिसिंग पर जोर दिया है। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में जन सामान्य से संवाद और बेहतर रिश्ता बनाने की रणनीति बनाई है। नागर का मानना है कि इस प्रयोग से काफी हद तक वह वैमनस्यता और अविश्वास को दूर कर सकेंगे।
डीजीपी नागर सांप्रदायिक चुनौतियों पर सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों के विमर्श में शामिल होने के लिए बुधवार शाम दिल्ली रवाना हो गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की समीक्षा के दौरान नागर ने यह पाया कि छोटे-छोटे मामलों में भी पुलिस से चूक हुई। लिहाजा उन्होंने प्रदेश की पुलिस को जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने के लिए आपसी संवाद की ओर उन्मुख किया है। इसके साथ ही उनकी यह सख्त हिदायत है कि सूबे में सांप्रदायिक दृष्टिकोण से चिन्हित विवादों के निस्तारण की कार्यवाही योजनाबद्ध रूप से की जाए। डीजीपी ने और भी कई प्रमुख निर्देश जारी किये हैं। डीजीपी ने सभी एसएसपी और एसपी की प्रत्येक दशा में अपने अपने जिलों में सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने की जिम्मेदारी सौंपी है।
आवश्यक दिशा निर्देश
-सांप्रदायिक तत्वों और समस्या उत्पन्न करने वाले अपराधियों की सूची तैयार रखें। इनके विरूद्ध प्राथमिकता के आधार पर निरोधात्मक कार्रवाई करें।
-सभी थानेदार अपने क्षेत्र के प्रमुख और सामाजिक लोगों की सूची बनाएं और उनसे संवाद स्थापित कर तनाव कम करने में उनकी मदद लें।
-सांप्रदायिक दृष्टिकोण से छोटे से छोटे विवादों का निस्तारण समयबद्ध एवं योजनाबद्ध तरीके से किया जाए। सांप्रदायिक विवादों से सम्बंधित पिछले तीन वर्षो की लंबित विवेचना पूरी की जाए।
-पुलिस अफसर व्यापक जनसंपर्क करते हुए अभिसूचना तंत्र विकसित करें और ऐसी अप्रिय घटनाओं पर अंकुश लगाएं।
-दंगों में शामिल और दंगा भड़काने वालों के खिलाफ रासुका, गैंगस्टर एक्ट जैसे कानून का प्रयोग करें।
-सांप्रदायिक घटनाओं के अभियुक्तों के शस्त्र लाइसेंस निलंबित और निरस्त करने की प्रक्रिया अपनाएं।
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