रालोद मुखिया अजित से दोस्ती में मुलायम परिवार में शीतयुद्ध
राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया चौधरी अजित सिंह को लेकर समाजवादी पार्टी में शीतयुद्ध शुरू हो गया है।
लखनऊ। राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया चौधरी अजित सिंह को लेकर समाजवादी पार्टी में शीतयुद्ध शुरू हो गया है। मुलायम परिवार के लोग अब खुलकर रालोद-सपा के गठबंधन पर खुलकर एक दूसरे के सामने आ गए हैं। पार्टी के थिंक टैंक रामगोपाल यादव रालोद से गठबंधन के पक्ष में नहीं है। जबकि शिवपाल ने इसे एक जरुरी कदम बता रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अभी मामले में तटस्थ बने हुए हैं।
सपा प्रदेश प्रभारी शिवपाल सिंह यादव जहां सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ गठबंधन के पैरोकार हैं, वहीं राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि अजित भरोसे लायक नहीं हैं। उनसे गठबंधन का सपा को कोई लाभ नहीं होगा।
इसके पहले अमर सिंह की वापसी में भी पार्टी के थिंक टैंक रामगोपाल यादव और संसदीय कार्यमंत्री मो.आजम खान नाराजगी जता चुके हैं। लेकिन पुराने साथियों को साथ लाने में जुटे मुलायम सिंह धीरे-धीरे सभी को एकजुट करने में लगे हैं।
मुलायम और अजित की दिल्ली में दो दिन पहले हुई बातचीत के बाद राजनीतिक हलकों में सपा-रालोद गठबंधन को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई थी। यह भी चर्चा रही कि अजित को राज्यसभा भेजा जा सकता है।
हालांकि कल अजित के राज्यसभा जाने की अटकलों पर विराम लग गया लेकिन गठबंधन की संभावनाएं बनी हुई हैं। रालोद की तरफ से मुलायम-अजित की मुलाकात पर किसी नेता ने कोई टिप्पणी नहीं की।ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि जयंत चौधरी के पांच जून को ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद इस मुद्दे पर अगले दौर की बातचीत हो सकती है, लेकिन सपा नेतृत्व का विरोधाभास खुलकर सामने आ गया। रालोद से दोस्ती को लेकर मुलायम परिवार के दो बड़े नेताओं ने अलग-अलग बयान दिए।
रामगोपाल बोले अजित भरोसे लायक नहीं
सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने फीरोजाबाद में अजित पर जमकर निशाना साधा। कहा, अजित भरोसे लायक नहीं हैं। विश्वसनीयता खो चुके दल से गठबंधन करके कोई लाभ नहीं होने वाला है।
शिवपाल दिखे पक्ष में
दूसरी तरफ अजित-मुलायम की वार्ता के सूत्रधार शिवपाल सिंह यादव ने संभल में मीडिया से बातचीत के दौरान सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए गठबंधन की पैरवी की। कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ दलों को एकजुट होना चाहिए।रालोद से बातचीत चल रही है। सपा-रालोद का गठबंधन नेताजी व अजित सिंह मिलकर तय करेंगे। सपा, गांधीवादी, लोहियावादी और चौधरी चरण सिंह के अनुयायियों की एकजुटता चाहती है।
यह है गठबंधन की वजह
मुलायम सिंह, रालोद के साथ ही कांग्रेस से भी गठबंधन के पक्षधर हैं ताकि कार्यकर्ताओं में 2017 के चुनाव में सपा की सत्ता में वापसी का भरोसा पैदा हो सके।इस गठबंधन से प्रदेश में सपा के पक्ष में माहौल बनेगा, मुस्लिम वोटों के बिखर कर बसपा के पाले में जाने की चिंता काफी हद तक दूर हो सकती है।2017 के चुनाव में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों पर रोक लग सकती है।संभावित गठबंधन से राष्ट्रीय राजनीति और तीसरे मोर्चे में मुलायम का कद एक बार फिर नीतीश कुमार व ममता बनर्जी से बड़ा हो सकता है।रालोद के साथ आने से पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सपा को लाभ होने की उम्मीद।
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