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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पीपीपी मॉडल से मेट्रो चलाने को दोबारा सर्वे

By JagranEdited By:
Published: Tue, 03 Oct 2017 03:02 AM (IST)

जागरण संवाददाता, कानपुर : केंद्र सरकार शहर में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के त

पीपीपी मॉडल से मेट्रो चलाने को दोबारा सर्वे
पीपीपी मॉडल से मेट्रो चलाने को दोबारा सर्वे

जागरण संवाददाता, कानपुर : केंद्र सरकार शहर में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत मेट्रो का संचालन करना चाहती है। इसीलिए अब डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में संशोधन किया जाएगा। नए सिरे से सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्य में करीब करीब तीन माह लगेंगे। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन संशोधित डीपीआर को शहरी विकास मंत्रालय को भेजेगा।

शहर में आइआइटी से बड़ा चौराहा घंटाघर होते हुए नौबस्ता और सीएसए से विजय नगर, सीटीआइ होते हुए बर्रा आठ तक मेट्रो का संचालन होना है। पिछले साल 13,721 करोड़ रुपये का डीपीआर शहरी विकास मंत्रालय को भेजा गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चार अक्टूबर 2016 को इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर दिया था। मगर, शहरी विकास मंत्रालय ने मंजूरी नहीं दी। पुराने प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार और राज्य सरकार को 50-50 फीसद धनराशि इस देनी थी। अब मंत्रालय ने प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। ऐसे में सर्वे के दौरान कुछ कंपनियों से बात की जाएगी। उन्हें निवेश का ऑफर दिया जाएगा, साथ ही शेयर, लाभांश आदि तय किया जाएगा। कौन कंपनी कितना निवेश करेगी यह भी डीपीआर में शामिल किया जाएगा। सर्वे में एक दर्जन बिंदुओं को शामिल किया गया है। मेट्रो को लाभ का सौदा बनाने के लिए कुछ और उपाय भी बताने हैं। पूर्व में बने डीपीआर में इंदिरा नगर में मेट्रो कांप्लेक्स, फ्लैट आदि बना इसे लाभ का सौदा बनाने की बात थी। अब कुछ और प्रोजेक्ट भी शामिल किए जाएंगे। फिलहाल डीपीआर बनने तक पालीटेक्निक में यार्ड का निर्माण रुका रहेगा।

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