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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 13, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mother's Day: अभाव में पल रहे 100 मासूम बच्चों को बुलंदशहर में मिलीं बड़ी मां

By Nawal MishraEdited By:
Published: Sat, 13 May 2017 07:53 PM (IST)Updated: Sun, 14 May 2017 10:51 PM (IST)

बुलंदशहर में अभाव में पल रहे 100 मासूम बच्चों की बड़ी मां हैं। जिनकी मां उनके सपने पूरा नहीं कर ...और पढ़ें

Mother's Day: अभाव में पल रहे 100 मासूम बच्चों को बुलंदशहर में मिलीं बड़ी मां
Mother's Day: अभाव में पल रहे 100 मासूम बच्चों को बुलंदशहर में मिलीं बड़ी मां

बुलंदशहर (राहुल सक्सेना)। मां को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है लेकिन ऐसे बच्चे भी हैं, जिनकी मां अभावों के चलते उनके सपने पूरा नहीं कर पातीं। ऐसे बच्चों के लिये मां का फर्ज निभा रही हैं नीरा मित्तल। इनमें भीख मांगने वाले बच्चे भी हैं और झुग्गियों में रहने वाले भी। उनके स्नेह और समर्पण पर प्यार लुटाते बच्चे उन्हें बड़ी मां कहकर संबोधित करते हैं। कालाआम सिविल लाइन निवासी नीरा मित्तल ने दो दशक पहले तीन-चार वर्ष के कुछ बच्चों को भीख मांगते देखा तो मन विचलित हो गया। उसी शाम परिवार के साथ घूमने गई तो फुटपाथ पर छोटे बच्चों को सोते देखा। उसी समय बारिश शुरू हुई तो नींद से जागे बच्चे रोने लगे। यह देख उनका दिल कांप गया। उस वक्त उन्होंने बच्चों को कुछ पैसे दिये। 

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गरीब बच्चों का भविष्य संवारना

घर की जिम्मेदारियों के कारण गरीब बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए समय और धन की व्यवस्था नहीं हो पाई लेकिन उन्होंने प्रण किया कि मौका मिलते ही ऐसे बच्चों के जीवन में उजियारा लाने की सार्थक पहल करूंगी।एक दशक पहले उन्होंने मोहल्ला गिरधारी नगर में बालवाड़ी खोली। शुरू में घुमंतू एवं झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले करीब 20 बच्चों का प्रवेश कराया। कुछ अभिभावकों ने विरोध किया तो उन्हें किसी तरह समझाया। इसके बाद दूसरी बालवाड़ी बीसा कालोनी में खोली। दोनों में इस समय पांच-छह साल उम्र वाले 100 बच्चे पढऩे आ रहे हैं। किताबों से लेकर सारा खर्च वे खुद उठाती हैं। 

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सुबह-शाम जाती बालवाड़ी

बालवाड़ी में दो शिक्षिकाएं हैं। शिक्षिकाओं का बच्चों के प्रति व्यवहार जानने वे सुबह-शाम बालवाड़ी जाती हैं। बच्चे कुछ कमी बताते हैं तो उन्हें दूर भी कराती हैं। बच्चों के साथ सही व्यवहार नहीं करने पर एक शिक्षिका को निकाल भी चुकी हैं। बच्चे के पांच साल का होने पर अभिभावकों को नामांकन सरकारी स्कूल में कराने को प्रेरित करती रहती हैं।नीरा रोजाना बच्चों को कुछ न कुछ खाने के लिए लेकर पहुंचती हैं। बच्चे उनको बड़ी मां कहकर पुकारते हैं। बताती हैं कि बच्चों का यह संबोधन दिल को बड़ा सुकून देता है। यही बच्चे मेरी दुनिया हैं। मेरे तीन बेटे और पांच पौते-पोतियां हैं। पोते-पोतियों को बालवाड़ी में बच्चों से मिलवाने लाती रहती हूं। 

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