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अहीर राजा बुद्ध की नगरी में दूध के लिए मारामारी

Publish Date:Mon, 26 Aug 2013 12:14 AM (IST) | Updated Date:Mon, 26 Aug 2013 12:15 AM (IST)
अहीर राजा बुद्ध की नगरी में दूध के लिए मारामारी

बदायूं : अहीर राजा बुद्ध द्वारा बसाये गए बुद्धामऊ (अब बदायूं) में एक-एक पाव दूध हासिल करने के लिए मारामारी होगी, ऐसा तो शायद कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा। कभी देश में दूध-दही की नदियां बहाने वाले और फिर श्वेत क्रांति की मशाल थामने वाले यदुवंशियों की धरती पर दूध के लिए टोकन लेकर लाइन लगानी पड़ रही है। ऐसा तब हो रहा है जब जिले में रोजाना 35-40 हजार लीटर दूध तैयार हो रहा है। दुर्भाग्य यह है कि यह दूध पराग व निजी डेयरियों के माध्यम से बाहर चला जाता है और यहां का व्यक्ति को दूध के लिए मारामारी करनी पड़ती है।

बदायूं शहर में दूध के बिक्री के प्रमुख रूप से चार केंद्र हैं। सुभाष चौक स्थित एक मिष्ठान प्रतिष्ठान पर सुबह-शाम दूध लेने वालों की इस कदर भीड़ उमड़ती है कि वहां घंटों जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। इतना ही नहीं यहां दूध के लिए बाकायदा टोकन लेकर अपने नंबर की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। दूसरा केंद्र रजी चौक स्थित एक मिष्ठान प्रतिष्ठान है। यहां भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति रहती है। रविवार को सुबह यहां दूध लेने आए मोहित पांडेय ने बताया कि सिर्फ दूध के लिए प्रतिदिन करीब पौन घंटे समय बर्बाद करना पड़ता है। त्योहारों के समय तो स्थिति और भी खराब होती है। गोपी चौक स्थित एक प्रतिष्ठान पर दूध लेने वालों की इस कदर भीड़ होती है कि जाम के कारण आए दिन दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। दूध के लिए जाम से जूझने वाला एक और स्थान है मैकू लाल चौराहा। यहां दूध के लिए आए पंकज बताते हैं कि दूधिया मिलता नहीं। अगर खोजबीन कर संपर्क भी करो तो पानीदार दूध मिलता है। अगर टोक दिया तो समझो अगले दिन से वह भी बंद। ऐसे में दुकान पर लाइन लगाकर दूध लेना मजबूरी है।

इन स्थितियों के पीछे मुख्य कारण है कि शहर में दूधियों की आवक बेहद सीमित है। निजी डेयरियों की सक्रियता से शहर के आसपास वाले गांवों तक का दूध निजी डेयरियों के जरिए गाजियाबाद व दिल्ली तक पहुंच जाता है। पराग के संग्रह केंद्रों से आने वाला 14 हजार लीटर दूध मेरठ की डेयरी में पहुंच जाता है। पॉलीपैक दूध के नाम पर सिर्फ एक ही कंपनी का दूध थोड़ा बहुत आता है।

पराग की ओर से दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट के लिए पहले भी शासन को प्रस्ताव भेजे गए थे। अब नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करवाकर भेजा जाएगा, जिससे पराग के उत्पाद दूध, दही, छाछ, मट्ठा आदि आउटलेट के माध्यम से लोगों को आसानी से सुलभ सकें। इसके अलावा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कामधेनु योजना भी शुरू की गई है। इसके लिए तीन एकड़ जमीन व 30 लाख मार्जिन मनी होनी चाहिए। 90 लाख रुपए बैंकों के माध्यम से ऋण दिलवाया जाएगा। इच्छुक लोग इस योजना का भी लाभ उठा सकते हैं।

-जयंत कुमार दीक्षित, मुख्य विकास अधिकारी, बदायूं

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Web Title:shortage of milk in kilk prodective area

(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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