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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 28, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आम आदमी को नहीं पचा आम बजट

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Published: Sat, 28 Feb 2015 09:38 PM (IST)

जागरण संवाददाता, अमरोहा : केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार को आम बजट पेश किया। पूर्ण बहुमत वाली सरकार

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जागरण संवाददाता, अमरोहा : केंद्र की मोदी सरकार ने शनिवार को आम बजट पेश किया। पूर्ण बहुमत वाली सरकार का पहला बजट था, इसलिए लोगों को उम्मीद थी कि बजट के बाद अच्छे दिन आएंगे, पर निराश हुए। दिन भर टीवी देखकर बजट की समीक्षा करने वाले आम औ खास को बजट ने निराश किया। यह तो माना कि इससे दीर्घगामी सुधार होंगे, लेकिन तात्कालिक लाभ न मिलने से निराश व्यक्त की। वहीं महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई। बजट में कारपोरेट सेक्टर ज्यादा ध्यान रखा गया, इस पर सभी एकराय थे।

अच्छे दिन आने वाले हैं, इसी नारे के साथ केंद्र में सरकार बनाने वाली भाजपा सरकार का पहला बजट आना था। लोगों में उत्साह था। शनिवार को कई लोग सुबह से ही टीवी से चिपक गए। इसकी एक वजह यह थी कि हाल ही में यूपी सरकार ने बजट पेश किया था और उसकी हर ओर प्रशंसा हुई थी। यूपी के बजट शानदार बजट बताया गया, विशेषकर गांवों और किसानों के लिए। इसलिए उम्मीद थी कि केंद्र सरकार भी उससे बेहतर बजट पेश करेगी।

चूंकि जिला गांवों और किसानों का है, इसलिए इसी वर्ग में ज्यादा उत्साह था। दूसरा बड़ा वर्ग महिलाओं का था, जो महंगाई से जूझ रही है, उसे उम्मीद थी कि रसोई का खर्च कुछ कम होगा पर बजट देखने के बाद लोगों में निराशा हुई। घरों, चौपालों व दुकानों में चल रहे टीवी के सामने लोग बजट देख रहे थे और अपने-अपने निष्कर्ष निकाल रहे थे। ज्यादातर ने निराश करने वाला बजट बताया। सर्विस टैक्स बढ़ने का सीधा-सीधा असर महंगाई पर पड़ने वाला है, होटल हो या फिर ब्यूरी पार्लर यानी हर उस जगह जहां धन के बदले सेवा की जाती है, वहां महंगाई ही होगी। इसका असर दूसरी चीजों पर भी पड़ेगा। वहीं एक हजार से ज्यादा कीमत के जूतों के सस्ते होने और एलईडी को सस्ते होने को भी गरीब तबके ने नाराजगी जताई, क्योंकि वह तो इतनी कीमत वाली चीजें खरीदता नहीं। इसके अलावा सभी ने एक राय से यही कहा कि यह कारपोरेट सेक्टर यानी बड़ी-बड़ी कंपनियों को ध्यान में रखकर बनाया गया बजट है, इसका उद्योग क्षेत्र को दीर्घगामी लाभ हो सकता है लेकिन आम आदमी को तत्काल कहीं कोई रियायत नहीं मिलती दिख रही।