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    एटीएम फ्रॉड से परेशान हुए बैंक, जानिए क्या होता है मालवेयर?

    By Shilpa SrivastavaEdited By:
    Updated: Thu, 20 Oct 2016 05:00 PM (IST)

    30 लाख खाताधारकों के डेबिट कार्ड की जानकारियां चोरी होना देश के वित्तीय तंत्र में बड़ी सेंधमारी है

    नई दिल्ली: 30 लाख खाताधारकों के डेबिट कार्ड की जानकारियां चोरी होना देश के वित्तीय तंत्र में बड़ी सेंधमारी है। इस सेंधमारी के चलते आईसीआईसीआई, एसबीआई, एचडीएफसी, यस बैंक और ऐक्सिस बैंक के खाताधारकों की सुरक्षा के मद्देनजर बैंकों की परेशानी बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि बैंक का मानना है कि चीनी हैकरों ने यह अटैक किया है। वहीं एसबीआई के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक ने यह फ्रॉड मालवेयर के जरिए व्हाइट लेवल एटीएम से हुआ है। आज जागरण डॉट कॉम की बिजनेस टीम आपको बताने की कोशिश करेगी कि मालवेयर वायरस होता क्या है और इसने कैसे लोगों के खातों में सेंधमारी की।

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    क्या होता है मालवेयर:

    जानकारी के मुताबिक मालवेयर एक खतरनाक स्क्रिप्ट होती है जिसमें वो प्रोग्राम लिखे होते हैं जिसके इस्तेमाल से सिस्टम में रखा डेटा चुराया जा सकता है। इसे किसी अटैचमैंट या रिमूवेबल ड्राइव के जरिए सर्वर में इंजेक्ट कराया जाता है। एक्सपर्ट के मुताबिक हैकर्स ने एसबीआई के एटीएम नेटवर्क के सर्वर में इसे इंजेक्ट किया होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि एटीएम के सॉफ्टवेयर इंटरकनेक्टेड होते हैं। अगर आप इसे एक बार सर्वर में डाल देते हैं तो इसे रन कराने के लिए कई बार रिमोट एक्सेस की जरूरत होती है, हालांकि कई बार यह खुद से भी एक्टिवेट हो जाते हैं। एक बार एक्टिवेट होने के बाद सिस्टम से महत्वपूर्ण डेटा हैकर्स के पास पहुंचने शुरू हो जाते हैं। अगर हैकर्स ने ऐसा किया होगा तो जाहिर तौर पर न सिर्फ एटीएम पिन बल्कि कार्ड की अन्य जानकारियां मसलन कार्ड नंबर भी उनके पास पहुंच गए होंगे।

    कैसे हुई सेंधमारी समझिए:

    एक टेक्निकल एक्सपर्ट ने बताया कि जब आप अपना कार्ड एटीएम मशीन में एक बार इन्सर्ट कराते हैं तो सर्वर में मौजूद मालवेयर वायरस कार्ड की क्लोनिंग कर लेता है और कार्ड की पीछे लगी मैग्नेटिक चिप में ये वायरस भेज देता है। इस तरह से आपके कार्ड की सारी जानकारियां चोरी हो जाती हैं। इसके बाद उसी एटीएम से कोई भी हैकर्स क्लोनिंग वाले एटीएम के जरिए मालवेयर वायरस की मदद से जानकारी का इस्तेमाल कर व्यक्ति के खाते से पैसे चुरा लेता है।

    हैकर्स आमतौर पर ओपन नेटवर्क के जरिए ही सेंध लगाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके लिए उन्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। मालवेयर की मदद से हैकर्स के पास इन एटीएम नेटवर्क में इस्तेमाल किए गए कार्ड्स की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जातीं हैं।

    हैकर्स के पास हर काट मौजूद:

    कार्ड की जानकारी मिलने के बाद भी किसी कार्ड से पैसे उड़ाना आसान नहीं होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पेमेंट गेटवे में इसके लिए ओटीपी या 3डी सिक्योर कोड की जरूरत पड़ती है। हालांकि हैकर्स के पास इसकी काट भी रहती है। इसके लिए हैकर्स कार्ड की क्लोनिंग करते हैं, फिर चुराए गए डेटा को अप्लाई करते हैं। ऐसे में कार्ड से पैसे उड़ाना काफी हद तक आसान हो जाता है। ऐसा सभी नहीं लेकिन अधिकतर कार्ड्स के साथ होता है।

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