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    व्हाट्सएप को लेकर सरकारी नियम बनाए जाने की मांग मंजूर, जानें व्हाट्सएप को लेकर क्यों मचा है हंगामा

    By MMI TeamEdited By:
    Updated: Wed, 18 Jan 2017 01:00 PM (IST)

    फेसबुक पर व्हाट्सएप यूजर्स की जानकारी को साझा करने का मामले पर एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नियम बनाए जाने की मांग को मंजूर कर लिया है

    व्हाट्सएप को लेकर सरकारी नियम बनाए जाने की मांग मंजूर, जानें व्हाट्सएप को लेकर क्यों मचा है हंगामा

    नई दिल्ली। इंस्टेंट मैसेजिंग व्हाट्सएप को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नियम बनाए जाने की मांग को मंजूर कर लिया है। आपको बता दें कि व्हाट्सएप की तरफ से एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें फेसबुक द्वारा उपभोक्ताओं की जानकारी शेयर करने का विरोध किया गया था। ऐसे में हम आज आपको इस मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बताने जा रहे हैं। तो चलिए एक नजर डालते हैं इस पूरे मामले पर:

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    क्या है पूरा मामला?

    व्हाट्सएप अपनी डाटा प्राइवेसी के लिए जाना जाता है। 2016 की शुरुआत में कंपनी ने एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन पेश किया था, जिसके तहत यूजर्स की पर्सनल चैट कोई थर्ड पार्टी नहीं पढ़ सकती थी। लेकिन 2016 के आखिरी में फेसबुक ने व्हाट्सएप यूजर्स की निजी जानकारी फेसबुक पर शेयर करने की बात कही। इस कदम के पीछे कंपनी का मानना है कि वह फेसबुक के जरिए यूजर्स को और भी ज्यादा टारगेटेड विज्ञापन और बेहतर फ्रेंड सजेशन देगा। हालांकि ये एड आपको व्हाट्सएप पर नहीं फेसबुक पर ही नजर आएंगे।

    क्या-क्या हो सकता है फेसबुक पर शेयर?

    व्हाट्सएप ने यूजर्स का नंबर फेसबुक पर शेयर होने की बात कही थी। लेकिन इस स्वाइपिंग से आपका प्रोफाइल फोटो, स्टेटस, कॉन्टैक्ट डिटेल, पर्सनल मेल आईडी, कॉन्टैक्ट लिस्ट, ब्राउजर डिटेल, हार्डवेयर नंबर और डिटेल जैसी चीजें फेसबुक से शेयर की जा सकती हैं।

    सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

    इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई, जिसमें इसे निजता के अधिकार का हनन बताया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इससे न सिर्फ उपभोक्ता का ब्यौरा, बल्कि उसकी निजी बातचीत भी गलत हाथों में जा सकती है। सुनवाई की शुरुआत में जस्टिस जे एस खेहर और डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच याचिका पर सहमत नजर नहीं आयी। जस्टिस खेहर ने कहा, “ये एक निजी सेवा है। इसके अपने नियम हैं। जिसे पसंद है, इस्तेमाल करे और न पसंद हो तो छोड़ दे।” याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे ने ऑनलाइन मैसेजिंग सेवाओं के लिए सरकारी नियम को जरूरी बताया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नियम बनाए जाने की मांग को मंजूरी दे दी।

    कानूनी तौर पर क्या है प्रावधान?

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के जानकारों के मुताबिक, अगर व्हाट्सएप कंपनी अपने यूजर्स को इस पॉलिसी के बारे में पहले से सूचित करती हैं, तो ऐसे में यह कदम कानूनी तौर पर गलत नहीं है। लेकिन अगर यूजर को बिना बताए उनकी निजी जानकारी को फेसबुक पर शेयर किय जाता है, तो यह गैरकानूनी कदम माना जाएगा। इस बदलाव के लिए कंपनी अपने यूजर्स को नोटिफेकशन भेजेगी साथ ही उन्हें उसे चुनने का वक्त भी दिया जाएगा।